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Sunday, February 14, 2021

अपने पैडमैन का इंतजार कर रही नैपकीन यूनिट

किशोरियों व महिलाओं के लिये मददगार यूनिट खुद संकटग्रस्त

रीपैकिंग के बाद भी अधिकारियों ने नहीं ली सुधि

नैपकीन उपयोग की अवधि 20 अगस्त को हो रही समाप्त

फतेहपुर, शमशाद खान । खागा तहसील क्षेत्र के अन्तर्गत ऐरायां ब्लॉक मुख्यालय स्थित सेनेटरी नैपकीन यूनिट को अपने पैडमैन का इंतजार है। किशोरियों व महिलाओं की उन दिनों की उलझन को सुलझाने वाली नैपकीन खुद नौकरशाही के जाल में उलझ गई है। आधी आबादी के बीच होने की बजाए करीब ढाई लाख सेनेटरी नैपकीन ब्लॉक मुख्यालय में बंद दरवाजे के पीछे कैद हैं। इन्हें अपने रहनुमा की तलाश है ताकि यह फिर अपने मकसद में कामयाब हो सकें। 

ऐरायां ब्लाक प्रांगण स्थित पंचायत उद्योग कार्यशाला भवन में वर्ष 2012 में दस लाख रुपये की लागत से सेनेटरी नैपकीन यूनिट शुरू की गई थी। पांच महिला कर्मियों को सेनेटरी नैपकीन तैयार करने का रोजगार दिया गया। यूनिट में प्रतिदिन 600 पीस नैपकीन तैयार किए जाते हैं। चार वर्षों में छह लाख से अधिक सेनेटरी नैपकीन कार्यशाला में तैयार किए जा चुके हैं। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, महिला कल्याण विभाग, जिला कारागार, शिक्षा विभाग तथा खुले बाजार में सेनेटरी नैपकीन की बिक्री हो रही थी। यूनिट की देखरेख कर रहे ग्राम पंचायत अधिकारी विपिन तिवारी ने बताया कि आर्डर नहीं मिलने की वजह से गोदाम में चालीस हजार पैकेट नैपकीन डंप पड़ी है।

बोरियों में बंद डम्प पड़ी नैपकीन।

कई बार उच्चाधिकारियों को इसके लिए पत्राचार किया गया। पत्राचार के बाद डंप नैपकीनों की रीपैकिंग की गई। जिसके बाद मार्च में सीएमओ कार्यालय से 200 पैकेट नैपकीन का आर्डर मिला। आर्डर मिलते ही नैपकीन भेजने की तैयारी की जाने लगी। वैसे ही कुछ दिनों बाद सीएमओ ने आर्डर निरस्त करने का आदेश जारी कर दिया। सकारात्मक परिणाम न आने से डंप नैपकीन की बिक्री नहीं हो पा रही है। यूनिट में तैयार सेनेटरी नैपकीन सबसे अधिक स्वास्थ्य विभाग में आपूर्ति की गई है। आंकड़ों के मुताबिक कुल तैयार नैपकिन का 60 फीसदी अस्पतालों में भेजा गया। अन्य जगहों से मांग न होने की वजह से गोदाम में नैपकीन का स्टाक डंप पड़ा हुआ है। पंचायत उद्योग के इंचार्ज ने बताया कि उद्योग के शुरुआत से लेकर 2019 तक आडिट न होने के कारण पंचायत उद्योग के निदेशक ने गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए सभी दस्तावेज लखनऊ कार्यालय तलब कराए। जिसकी जांच करने के बाद उद्योग को चलाने की बात कही लेकिन आज तक पंचायत उद्योग भवन बंद पड़ा हुआ है। सरकार को इस उद्योग से अच्छा खासा मुनाफा कमाने को मिल रहा है। बावजूद इसके अगस्त 2019 से पंचायत उद्योग में ताला लगा हुआ है। कहीं से मांग न होने की स्थिति में नैपकीन के उपयोग करने की समाप्त अवधि 20 अगस्त 2021 के नजदीक है। जिसकी अधिकारियों को कोई फिक्र नही है। पंचायत उद्योग के व्यवस्थापक का कहना है कि अगर नैपकीन की बिक्री नही हुई तो लगभग 7 लाख रुपए का नुकसान होगा।

सीलन से खराब हो रहे सेनेटरी नैपकीन

बरसात के मौसम में गोदाम के अंदर रखी सेनेटरी नैपकीन खराब होने की कगार पर पहुंच चुकी हैं। बोरियांे के ऊपर बोरियां रखी होने से नैपकीन पर अत्यधिक दबाव पड़ रहा है। यूनिट इंचार्ज विपिन तिवारी का कहना था कि चालीस हजार पैकेट नैपकीन यदि खराब होती हैं तो 7 लाख रुपये का नुकसान होगा।

सरकारी महकमा ही गुनाहगार

सेनेटरी नैपकीन की सप्लाई के लिए स्वास्थ्य विभाग और बेसिक शिक्षा विभाग को जिम्मेदार बनाया गया था लेकिन यही दोनों विभाग लचर साबित हुए जिससे यूनिट की आपूर्ति लाचार हो गई। इन दोनों विभागों ने पिछले करीब छह माह से आर्डर नहीं दिए हैं जिससे नैपकीन की डंपिंग होती गई और हालात बदतर हो गए। हालांकि ऑडिट के चलते भी आपूर्ति पर ब्रेक लगने की बात भी सामने आई है।

मुनाफे के बावजूद पड़ी मार

नैपकीन उद्योग की शुरुआत के बाद से ही हाथोंहाथ लिया गया। जिसके चलते यूनिट की बैलेंस शीट भी काफी सेहतमंद हो गई। यूनिट इंचार्ज का कहना है कि अब भी यूनिट के खाते में 10 लाख से अधिक की धनराशि मौजूद है। उन्होंने दावा किया कि यह उद्योग आर्थिक रूप से भी पूरी तरह सक्षम है। बड़ी और नामी कंपनियों से प्रतिस्पर्धा होने के बावजूद इसने अपनी पकड़ मजबूत की है।


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