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Friday, February 26, 2021

राधे-राधे-राधे, श्याम से मिला दे

गलती करना जीव का स्वभाव, भगवान क्षमाशील है : आचार्य जगदीश 

कथावाचक ने धु्रव और उत्पानपाद की कथा का किया विस्तृत वर्णन 

बांदा, के एस दुबे । जीव का स्वभाव है गलती करना और भगवान क्षमाशील है। मानव की गलतियों को माफ करते हैं। मानव को हर स्वरूप में भगवान का दर्शन करना चाहिए। वह सब में विराजमान है। किसी भी देवता पर भेदभाव नहीं करना चाहिए। ईश्वर तत्व व्यापक है। उन्होंने श्रद्धालुओं से कहा कि आस्था को बढ़ावा दें। 

श्रीमद्भागवत कथा का बखान करते कथावाचक आचार्य जगदीश शास्त्री

यह बात शुकुल कुआं में श्रीमद्भागवत कथा का बखान करते हुए तीसरे दिन वृंदावन से आए कथावाचक आचार्य जगदीश शास्त्री ने कही। उन्होंने कहा कि अधर्म भगवान की पीठ से और धर्म भगवान के हृदय से उत्पन्न होता है। अधर्म की पत्नी झूठ और दंभ पुत्र तथा माया पुत्री का नाम है। यह तीनो तत्व मानव में न हों तभी वहां भगवान वास करते हैं। श्रीमद्भागवत कथा में शास्त्री जी ने धु्रव और उत्तानपाद की कथा का वर्णन किया। बताया कि धु्रव पिता की गोद में बैठने जा रहे थे, तभी उन्हें रोका गया। इतना ही नहीं धु्रव को पिता की गोद हासिल करने के लिए जंगल में तप करने की बात कही गई। यह भी कहा गया कि जब तक भगवान न मिल जाएं तब तक वह अपने घर न लौटें। ध्रुव अपने घर से निकल गए और जंगल पहुंचे। रास्ते में उन्हें नारद जी मिले, उन्होंने कहा कि बिना गुरु के ज्ञान नहीं मिलता। धु्रव आगे बढ़े और ध्यान में लीन होकर उन्होंने ओम नमो भगवते वासुदेवाय का सुमिरन किया। कथावाचक ने कहा कि वर्तमान में अवस्था बढ़ रही है, आस्था नहीं। श्रद्धालुओं से कथावाचक ने आस्था को बढ़ाने
मौजूद श्रोतागण

का आवाहन किया। उन्होंने बताया कि गुरू वह होता है जो अपने शिष्य को अंधकार से उबारकर प्रकाश की ओर ले जाए। उसी को गुरू कहते हैं। ध्यान में लीन धु्रव ने पहले दिन फल खाया फिर उसका परित्याग कर दिया। इसी तरह जल, पत्ते, फिर वायु का भी त्याग कर दिया और योग क्रिया में लीन हो गए। वायु त्यागने से देवताओं को श्वांस लेने में दिक्कत होने लगी और वह भगवान विष्णु के पास पहुंचे। नारायण ने देवताओं को बताया कि उनका एक भक्त है, जिसने प्राण वायु को स्तंभित कर दिया है। अंततः अपने भक्त के सुमिरन से नारायण प्रकट हो गए और दर्शन किया। कथावाचक ने तमाम ज्ञानवर्धक बातें श्रोताओं को श्रीमद्भागवत कथा के दौरान बताईं। ध्रुव और उत्तानपाद की कथा सुनकर श्रोता भावविभोर हो गए। इस दौरान कथा परीक्षित शुकुल कुआं निवासी रामप्रसाद यादव उर्फ लाला और उनकी पत्नी प्रेमा देवी के अलावा सैकड़ों की संख्या में श्रोतागण उपस्थित रहे।  


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