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Thursday, February 25, 2021

निवर्तमान जिपं अध्यक्ष व प्रतिनिधि पर भ्रष्टाचार के आरोप मढ़ डीएम को सौंपा ज्ञापन

ग्यारह सूत्रीय ज्ञापन का संज्ञान लेकर जांच की उठायी मांग 

फतेहपुर, शमशाद खान । निवर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष डा0 निवेदिता सिंह एवं उनके प्रतिनिधि अभय ग्रुप आफ इंस्टीट्यूशन के चेयरमैन अभय प्रताप सिंह पर भ्रष्टाचार, ई-टेंडरिंग के नियमों का उल्लंघन एवं टेंडर के नाम पर किये गये एडवांस कमीशन आदि का आरोप लगाते हुए जिला पंचायत सदस्य प्रेमा देवी के प्रतिनिधि धीरेन्द्र प्रताप सिंह ने जिलाधिकारी को ग्यारह सूत्रीय ज्ञापन सौंपकर सभी बिन्दुओं की निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई किये जाने की मांग की है। 

जिला पं0 सदस्य प्रतिनिधि धीरेन्द्र प्रताप सिंह।

जिलाधिकारी को दिये गये ज्ञापन मंे वार्ड नं0 27 शाह की जिला पंचायत सदस्य प्रेमा देवी के प्रतिनिधि धीरेन्द्र प्रताप सिंह ने बताया कि डा0 निवेदिता सिंह द्वारा अध्यक्ष पद की शपथ ग्रहण करने के बाद उनके पति अभय प्रताप सिंह द्वारा जिला पंचायत को अपनी निजी संस्था के रूप में संचालित किया गया। ज्ञापन में बताया कि वर्ष 2016 के पूर्व निर्माण विभाग में प्राक्कलन दर से कम दर पर पड़ी निविदाओं को निरस्त कर निवर्तमान अध्यक्ष द्वारा लगभग पचास लाख रूपये का हेर-फेर किया गया। वर्ष 2020-21 की कार्य योजना का अनुमोदन सभी सदस्यों द्वारा सदन में किया गया। इसके पश्चात अध्यक्ष व अपर मुख्य अधिकारी द्वारा ई-टेंडरिंग करायी गयी। जिसमें अध्यक्ष के पति द्वारा जिला पंचायत के सभी ठेकेदारों को ठा0 युगराज सिंह महाविद्यालय में बुलाकर ई-टेंडरिंग के नियमों को ताक में रखते हुए दबाव बनाकर पन्द्रह से बीस प्रतिशत के हिसाब से एडवांस कमीशन जमा कराया गया। ठेकेदारों पर दबाव बनाया गया कि इस नियम का पालन जो नहीं करेगा भविष्य में गम्भीर परिणाम भुगतेगा। ज्ञापन में यह भी बताया कि पांच जनवरी 2016 के तत्कालीन अपर मुख्य अधिकारी द्वारा ठेकेदार की चेकों में हस्ताक्षर होने के बावजूद अभय सिंह के दबाव में चेके निरस्त कर दी गयी। जिला पंचायत में एम्बेस्डर कार होने के बावजूद व्यापारिक साझीदार रामसागर पुत्र जानकी प्रसाद की इनोवा गाड़ी नं0 यूपी-32सीए/2000 को जिला पंचायत में मासिक किराये से सम्बद्ध करवायी गयी। वर्ष 2016-17 हेतु ठेकेदारी के पंजीयन व नवीनीकरण निविदा नौ मार्च 2016 को समाचार पत्रों में प्रकाशित होने के दस दिन बाद 18 मार्च को अपने इंस्टीट्यूशन के डायरेक्टर राम सागर सोनी व अपने निजी कर्मचारी हरिनाम सिंह पुत्र रणधीर सिंह का आयकर विभाग में पंजीयन करवाकर ठेकेदारी हेतु बिना चरित्र प्रमाण पत्र व अनुभव प्रमाण पत्र लगाये बी श्रेणी में पंजीकरण कराया गया। उन्होने ज्ञापन में यह भी बताया कि फर्म सागर कंस्ट्रक्शन को दो करोड़ बारह लाख अड़तालीस हजार तीन सौ सत्तर रूपये का भुगतान बिना चरित्र प्रमाण पत्र के कर दिया गया जो नियमों का घोर उल्लंघन व भ्रष्टाचार है। स्वागत द्वारों का भुगतान बिना निविदा के कर दिया गया। इसी तरह अन्य कार्यों में भी धांधली करके जमकर भ्रष्टाचार किया गया है। उन्होने डीएम से मांग किया कि इन सभी मामलों की किसी सक्षम अधिकारी से जांच कराकर विकास कार्यों को गति प्रदान करने के साथ ही दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाये। उन्होने ज्ञापन की प्रति मुख्यमंत्री, पंचायतीराज मंत्री व प्रमुख सचिव पंचायती राज को भी भेजी है। 


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