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Thursday, February 25, 2021

बुद्धिमता से करें जैव विविधता का उपयोग: डीएफओ

आधुनिक जीवनशैली एवं जैव विविधता के अस्तित्व पर हुई संगोष्ठी

चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरि। गोस्वामी तुलसीदास राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में आधुनिक जीवनशैली एवं जैव विविधता के अस्तित्व विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ मुख्य अतिथि प्रभागीय वनाधिकारी कैलाश प्रकाश, प्राचार्य डाॅ राजेश कुमार पाल ने किया।

प्रभागीय वनाधिकारी ने बताया कि पृथ्वी पर जीवन की विविधता है। विविधता वह आधार है जिसका उपयोग अपनी बुद्धि और विकास के लिए हर सभ्यता ने किया है। जिन्होंने प्रकृति की इस देन का उपयोग बुद्धिमत्ता से और निर्वहनीय ढंग से किया वे सभ्यताएँ जीवित रहीं। जबकि उसका अति उपयोग या दुरुपयोग करने वाली सभ्यताएँ नष्ट हो गयीं। पृथ्वी पर जीवन की विविधता इतनी अधिक है कि अगर उसका निर्वहनीय उपयोग करें तो अनेक पीढ़ियों तक जैव विविधता से नये उत्पादों का विकास करते रहेंगे। मुख्य वक्ता कृषि एवं प्रौद्योगिक विवि बांदा के प्रो डाॅ देवकुमार ने बताया कि जैविक या जैव विविधता प्रकृति का वह अंग है जिसमंे किसी प्रजाति के अलग सदस्यों

संगोष्ठी में मौजूद अधिकारी।

में जीन की विविधता शामिल हैं। स्थानीय, क्षेत्रीय तथा वैश्विक स्तर पर पौधों और प्राणियों की तमाम प्रजातियों की विविधता और संवृद्धि शामिल है। डाॅ एसके चतुर्वेदी एसो. प्रोफेसर ने जैव विविधता को वैश्वीकरण एवं उद्योगीकरण के कारण हो रहे क्षरण को प्राकृतिक आपदाओं से जोड़ते हुए गहरी चिन्ता व्यक्त की। डाॅ एस कुरील ने नगरीकरण, औद्योगीकरण से हो रहे वनों के विनाश पर चर्चा करते हुए बताया कि इससे जीवों के प्राकृतिक आवास नष्ट हो रहे हैं। अनेक प्रजातियाँ विलुप्ति के कगार पर हैं। अध्यक्षीय उद्बोधन में प्राचार्य डाॅ राजेश कुमार पाल ने बताया कि देश में जैव विविधता का विनाश किस दर से हो रहा है यह अस्पष्ट है। निर्जन क्षेत्र तेजी से सिकुड़ रहे हैं। अधिकांश प्राकृतिक पारिस्थितिकीय तन्त्रों का अति उपयोग हो रहा है। संसाधनों के इस अनिर्वहनीय उपयोग के कारण जो भूखण्ड कभी उत्पादक वन और घास के मैदान थे अब रेगिस्तान बन चुके हैं। बढ़ती जनसंख्या वनों के पारिस्थितिकीय तन्त्रों का विनाश कर रही है। इस मौके पर मुख्य वक्ता डाॅ जेपी सिंह असि. प्रोफेसर राजकीय महिला महाविद्यालय बाँदा व विशिष्ट वक्ता डाॅ धीरेन्द्र सिंह, डाॅ धर्मेन्द्र सिंह, डाॅ हेमन्त सिंह बघेल, डाॅ सुनील मिश्र ने विचार रखे। संचालन डाॅ वंशगोपाल ने किया। संगोष्ठी के सहसंयोजक डाॅ अमित कुमार सिंह ने अतिथियों के प्रति आभार जताया। इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राध्यापक डाॅ रामनरेश यादव, डाॅ सीमा कुमारी, डाॅ मुकेश कुमार, डाॅ अतुल कुमार कुशवाहा, डाॅ राकेश कुमार शर्मा, डाॅ नीरज गुप्ता, बलवन्त सिंह राजोदिया समेत विवि व महाविद्यालयों के प्रोफसर, शोध छात्र, छात्राएं मौजूद रहे।


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