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Monday, February 15, 2021

आखिर क्या है चिटफंड कंपनी.......

देवेश प्रताप सिंह राठौर "देव"

(वरिष्ठ पत्रकार)

.......................................आज के वातावरण को देखते हुए अक्सर यह शब्द किसी धोखाधड़ी या किसी कंपनी के छोटे निवेशकों की पूरी जमा पूंजी को लेकर भाग जाने के कारण चर्चा में आता है। भारत में यह कारोबार विशेषकर दक्षिणी और पूर्वी भारत के राज्यों में संगठित तौर पर फलता फूलता रहा है। लेकिन यह जानना जरूरी है कि भारत में चिट फंड का बिजनेस वैध और कानूनी तौर पर नियंत्रित है। चिट फंड्स एक्ट 1982 में ऐसी कंपनियों को परिभाषित किया गया है। इसके अलावा राज्यों में बने कानून इस बिजनेस को नियंत्रित करते हैं दक्षिण भारत के राज्यों में बड़ी संख्या में लोग ऐसी योजनाओं में अपना बचत निवेश करते हैं। आंध्र, तमिल और केरल की घरेलू अर्थव्यवस्था में चिट फंड का बड़ा योगदान रहा है। इन राज्यों में वहां की घरेलू बचत का अच्छा हिस्सा इन योजनाओं में लगा हुआ है। ऐसे में यह समझना जरूरी है कि आखिर चिट फंड होता क्या और यह काम कैसे करता है?चिट फंड बचत का एक तरीका है, जो लोगों को आसान कर्ज उपलब्ध कराने के साथ ही उनके निवेश पर ज्यादा रिटर्न देता है। बैंक से कर्ज लेने के लिए आम तौर पर कई छोटी-मोटी लेकिन जरूरी औपचारिकताओं को पूरा करना होता है, लेकिन चिट फंड में इसकी कोई बाध्यता नहीं होती। निवेश के अन्य विकल्पों के मुकाबले चिट फंड में ज्यादा रिटर्न मिलता है और कई बार यही लालच लोगों के नुकसान का कारण भी बनता है। अब समझने की कोशिश करते हैंजब आप बैंक में पैसा जमा करते हैं, तो बैंक उस पैसे को किसी व्यक्ति या संस्था को कर्ज में देकर उससे ब्याज की कमाई करता है, जिसका एक हिस्सा आपको आपकी बचत पर ब्याज के रूप में मिलता है। लेकिन चिट फंड में यह अलग तरीके से काम करता है।मान लीजिए 10 लोग मिलकर एक फंड बनाते हैं और उन्हें इसमें हर महीने 10-10 हजार रुपये जमा करने होते हैं। अगर यह चिट यानी कुल जमा एक लाख रुपये का है तो हर व्यक्ति अगले 10 महीने तक इस फंड में अपने हिस्से का 10-10 हजार रुपये जमा करता रहेगा।अगर यह फंड कानूनी तौर पर रजिस्टर्ड है तो यह पूरी रकम बैंक में जमा हो जाएगी, और तब तक इसे नहीं निकाला जा सकेगा, जब तक कि 10 महीने की अवधि पूरी नहीं हो जाती है। लेकिन अगर यह फंड रजिस्टर्ड नहीं है तो क्या होगा?यह समझने के पहले अब चिट फंड ऑपरेटर की भूमिका को समझ लेते हैं, जिसे हम चिट फंड कंपनी भी बुलाते हैं। जो कंपनी इन 10 लोगों के फंड को ऑपरेट करेगी, वह इसके बदले में एक कमीशन अमाउंट चार्ज करती है, जो आम तौर पर 3 फीसद से लेकर 10 फीसद होता है।चलिए मान लेते हैं कि फंड ऑपरेटर ने इन 10 लोगों की चिट को मैनेज करने के लिए पांच फीसदी कमीशन लिया। तो पहले महीने 10 लोगों ने मिलकर कुल एक लाख रुपये जमा किए और फंड ऑपरेटर ने इसमें से पांच फीसद कमीशन यानी 5,000 रुपये ले लिए, जिसके बाद फंड की कुल रकम 95,000 रुपये हो गई। इसे ऑपरेटर ने अपने पास रख लिया।अब अगर इन 10 व्यक्तियों के समूह में से किसी एक को कर्ज की जरूरत है, तो वह रकम के लिए बोली लगाएगा। जिसकी बोली सबसे कम होगी, उसे यह रकम दे दी जाएगी। मान लीजिए किसी व्यक्ति ने 60,000 रुपये की बोली लगाई और यह सबसे कम रही, तो उसे यह रकम दे दी जाएगी।इस रुपये को दिए जाने के बाद फंड ऑपरेटर के पास 35,000 रुपये बच गए। इस रकम को 10 लोगों में बराबर-बराबर बांट दिया जाएगा। यानी पहले ही महीने 5,000 रुपये के निवेश पर प्रति व्यक्ति को


3500 रुपये मिले।और जिस व्यक्ति ने पहले महीने मात्र 5,000 रुपये जमा किए, उसे 60,000 रुपये का कर्ज आसानी से मिल गया। यह सिलसिला अगले 10 महीनों तक चलता रहेगा।फंड की वजह से लोगों को बेहद कम ब्याज दर पर कर्ज मिला और साथ ही बचत पर भारी निवेश भी।कारोबार का यही तरीका चिट फंड कहलाता है।2000 के शुरुआती महीनों में कारोबारी सुदीप्तो सेन ने सारदा ग्रुप की शुरुआत की, जिसे सेबी ने बाद में कलेक्टिव इनवेस्टमेंट स्कीम के तौर पर वर्गीकृत किया। सारदा ग्रुप ने चिट फंड की तर्ज पर ज्यादा रिटर्न का लालच देकर छोटे निवेशकों को आकर्षित किया। अन्य पोंजी स्कीम (चिट फंट कंपनी) की तरह कंपनी ने एजेंट के बड़े नेटवर्क का इस्तेमाल करते हुए छोटे लोगों से पैसों की उगाही की और इसके लिए एजेंट को 25 फीसद तक का कमीशन दिया गया।कुछ ही सालों में सारदा ने करीब 2,500 करोड़ रुपये तक की पूंजी जुटा ली। कंपनी ने फिल्मस्टार, फुटबॉल क्लब में निवेश, मीडिया आउटलेट्स की खरीदारी कर अपनी ब्रांड बिल्डिंग की। स्कीम का दायरा ओडिशा, असम और त्रिपुरा तक फैला, जिसमें करीब 17 लाख से अधिक लोगों ने पैसे लगाए।इस बीच सारदा ग्रुप ने डिबेंचर और प्रीफरेंशियल बॉन्ड जारी करना शुरू किया, जो सेबी के नियमों का उल्लंघन था। सेबी की चेतावनी के बाद ग्रुप ने करीब 200 से अधिक कंपनियों का जाल खड़ा करते हुए अपने बिजनेस को आगे बढ़ाया। छोटे निवेशकों ने जहां समूह में निवेश जारी रखा वहीं कई लोगों ने चिट फंड एक्ट 1982 के तहत समूह में निवेश किया। बंगाल में चिट फंड का कारोबार सरकार नियंत्रित करती है।2012 में सेबी ने इस समूह को लोगों से पैसा जुटाने के लिए मना किया। 2013 तक आते-आते ग्रुप की हालत खराब होने लगी। कंपनी के पास आने वाली पूंजी की मात्रा, खर्च हो रही पूंजी से कम हो गई, और फिर अप्रैल 2013 में यह धराशायी हो गई। कोलकाता के विधाननगर पुलिस स्टेशन में सैंकड़ों निवेशकों ने शिकायत दर्ज कराई। सुदीप्तो सेन ने 18 पन्नों का पत्र लिखकर बताया कि कैसे नेताओं ने उनसे जबरन गलत जगह निवेश कराया। सेन के खिलाफ एफआईआर हुआ और आखिरकार उन्हें 20 अप्रैल 2013 को गिरफ्तार कर लिया गया। अब बात करते हैं

 बात करते हैं एक चिटफंड कंपनी की जहां पर वहां के मैनेजर की मनमानी चलती है अगर उनके खिलाफ किसी कर्मचारी ने विरोध किया तो उसे ववाली कहकर वहां से हटा दिया जाता है क्योंकि उनके पास वीटो पावर है वह  पावर यह है कि वह जिसको चोर बेईमान कहें वही मान्य है अगर दूसरा कोई उनकी अन्याय के प्रति उंगली उठाने का प्रयास करता है तो उसकी उंगली तोड़ने एवं उसकी नौकरी लेना उसका ट्रांसफर कराना इनके बाएं हाथ का काम है। चिटफंड कंपनी के रीजन के मैनेजर और उनके सहयोगी की तानाशाही देखी जा सकती है। बात करते हैं एक ऐसे परिवार की जहां पर परिवार का दर्जा प्राप्त है , परिवार में किस के साथ क्या दुर्व्यवहार हुआ है इस पर अंकुश लगाने वाला कोई नहीं है क्योंकि  सीडी  दर सीडीअन्याय करने वाले बैठे हुए हैं जो नीचे से ऊपर तक एक ही भाषा बोली जाती है क्योंकि उस कंपनी का प्रबंध तंत्र बड़ा मजबूत है और न्याय देने का कार्य करता है जानकार वालों ने बताया परंतु उसके सामने नीचे से ऊपर तक इतनी मोटी फाइल बना दी जाती है उसी फाइल के आधार पर निर्णय होता है मुझे एक कर्मचारी ने बताया चटपट कंपनी के रीजन के मैनेजर एक कर्मचारी के प्रति अपने असिस्टेंट से कहा इसका हर हफ्ते लेटर बनाओ इतनी मोटी फाइल बना दो एक 2 महीने के अंदर ईसका ट्रांसफर हो जाए महोदय जब कोई कर्मचारी उस अन्याय के प्रति आवाज उठाता है तो उसे रोकने का प्रयास किया जाता है क्या न्याय करने का अधिकार सब चिटफंड कंपनी के मैनेजर ओं को है क्या आपने सत्य बात बताना और कहने पर क्या वह व्यक्ति ववाली हो जाता है। कैसा है उस चिटफंड कंपनी में जो फील्ड के डेवलपमेंट के जो लोग हैं उनकी भरपूर तानाशाही चलती है, आज कंपनी की दिक्कतें आई है कंपनी दिक्कत में है फिर भी इन लोगों के दिमाग सातवें आसमान पर हैं। मैं विश्वास के साथ लिखकर आप सभी को बताना चाहता हूं अगर इन मैनेजरों की गोपनीय जांच हो जाए और कर्मचारियों के इनके बारे में गुप्त रखा जाए , कर्मचारी अपनी राय तभी सही रख सकता है,आप उनकी स्पष्ट कर कार्यों के प्रति जो अन्याय हो रहा है सब खुले शब्दों में बताइए परंतु दुर्भाग्य है जो लोग मैनेजरों के अन्याय के प्रति विरोध अमानवीय भाषा सबके सामने जलील करना यह सब चीजें उन लोगों के लिए अच्छी है इस पर कोई भी उनके खिलाफ अगर बोलता है अभद्रता के खिलाफ उसको दंड दिया जाता है,उसकी नौकरी ले ली जाती है या इतनी दूर ट्रांसफर कर दिया जाता है वह सोता नौकरी को छोड़ कर चला जाए ,जब कोई सबूत उस कंपनी के मैनेजर द्वारा अभद्रता का साक्ष्य के साथ रखा जाता है उस पर भी वह अपने काले कारनामों से मशहूर क्षेत्रीय मैनेजर उसको पलटने का काम अपने स्तर से क्योंकि उनके पास सारे कुछ पावर मौजूद होते हैं जो वह करेंगे वही मान्य है,उसको भी दबाया जाता है तुमने उस कर्मचारी के पक्ष में यह लिखा है अब मैं तुम्हें देख लूंगा नहीं अपना बयान बदलो,

यह दबाव  कर्मचारी पर डाला डाला जाता है, मैंने अभी मानव और मानव एक दूसरे के दुश्मन बने उसमें छोटी सी कहानी उपरोक्त में वर्णन की है। एक कर्मचारी  को मैनेजर और वहां के कार्यकर्ता मारने के लिए कहता है उस का सबूत भी उस व्यक्ति के पास है और उस व्यक्ति ने मेरे संज्ञान में जो प्राप्त हुई यह बात सब जगह उन सबूतों को प्रेषित किया है ,परंतु निर्णय जो दोषी है उसको बचाया गया जो निर्दोष हो उसकी नौकरी ले ली गई है। यह एक बहुत गंभीर विषय है जांच प्रक्रिया आपने देखा होगा कि  इलेक्ट्रॉनिक चैनलों में बहुत से वीडियो आते हैं से एक्सपर्ट द्वारा जब उसमें जांच पड़ताल होती है कुछ वीडियो सही होते हैं कुछ गलत होते हैं कुछ रिकॉर्डिंग गलत होती है कुछ सही होती है। क्योंकि  एक्सपर्ट होते हैं जो इस चीज को जांच करते हैं, और उस चिटफंड कंपनी में जहाज वही करता है जिसके खिलाफ हो व्यक्त दोषी होता है ऐसा आपने कहीं नहीं देखा होगा लेकिन ऐसा ही है। लेकिन अन्याय जितना भी शक्तिशाली क्यों ना हो लेकिन ईश्वर के हाथो बच नहीं सकता क्योंकि बाहुबली वर्चस्व वाले लोग जो अपने पद का दुरुपयोग करके उसे हटाने का काम करते हैं कार्य को प्राथमिकता नहीं दी जाती है। सिर्फ क्षेत्र का वह कर्मचारी उन्हीं के अधीनस्थ या कहिए वही मालिक होते हैं। जब तक यह धारणा बनी रहेगी मैंने देखा है एक ही रीजन में मैनेजर के अन्याय के कारण 19 एवं 20 लोग नौकरी छोड़ कर चले गए और उसका न्याय का पाप का घड़ा भरा और कुछ समय में ईश्वर ने उसके खिलाफ कार्यवाही की उसे दंड मिला प्रबंध तंत्र द्वारा और वह अपना सेवा का त्यागपत्र देकर चला गया। ऐसा नहीं है कि उन लोगों के प्रति प्रबंधकतंत्र कोई शीतलता वरदता है। परंतु जो शिडी  दर सीढ़ी बनी है  नीचे से लेकर ऊपर तक जो एक ही आवाज में सुर बोलते बोलते हुए आवाज  वह प्रबंध तंत्र तक पहुंचती है और मजबूर होकर प्रबंध तंत्र कागज को देखकर उस व्यक्ति के विरोध में निर्णय हो जाता है यही फील्ड के मैनेजर ओं का रामबाण है जिसे हम वीटो पावर ही कह सकते हैं।चर्चित एक चिटफंड कंपनी की एक और खासियत है वहां के जो रीजन के मैनेजर होते हैं सेक्टर आदि के जो मैनेजर होते हैं वह चाहे जितनी अभद्रता करें वह कंपनी चटपट को अपनी समझते हैं और कर्मचारियों को अंग्रेजों के जमाने जैसे जो लोग व्यवहार करते थे भारतीयों पर वह उस परिवार को करते हैं कर्मचारियों के साथ उसी में कोई एक कर्मचारी उनके अमानवीय व्यवहार अभद्रता को स्वाभिमान को ठेस पहुंचने की अति हो जाती है वह उसका विरोध करता है बस उसी जगह से उसकी उल्टी गिनती शुरू हो जाती है क्योंकि लोगों के द्वारा जानकारी प्राप्त हुई है रीजन के मैनेजर लगभग सभी जगह की बात कर सकते हैं लेकिन फिलहाल तो बुंदेलखंड के रीजनल मैनेजर कहते हैं हमने जो कहेंगे वही ऊपर तक मान्य होगा रिपोर्ट हमसे मांगी जाएगी जो हम देंगे उसी पर निर्णय होगा यह लोग चाहे जितना सरपट के एक बात और बताना चाहता हूं जब उस चिटफंड कंपनी का बहुत सारा रिकॉर्ड छत पर जलाया जा रहा था यह में जब जानकारी प्राप्त हुई उस समय का सबूत एवं रिकॉर्ड को बिना परमिशन बेचने का सबूत सभी वीडियो प्राप्त हुए जब रीजन के अधिकारी को पता चला तो उसका क्या वक्तव्य था यहां के कर्मचारियों द्वारा जानकारी प्राप्त हुई कह रहे थे लगता है हम (region manager) और जीपी निलंबित हो जाएंगे या नौकरी भी जा सकती है देखिए कितना बड़ा बदलाव हुआ वह लोग कितने नियम तोड़े  उन्हें माफ है जब उनकी नौकरी पर आई तो अपनी नौकरी  चिंता हुई और दूसरों की १० लोगों की 20 लोगों की नौकरी ले चुके जिन्हें वो अनाथ बना चुके रोजगार छीन  चुके उनकी पीड़ा उन्हें नहीं दिखाई थी जब अपने ऊपर तलवार लटकी देखी चिंतित हो गए और फोन पर फोन लखनऊ घन घनाने लगे क्योंकि उनके सैकड़ों खून माफ थे लेकिन उन्होंने चिटफंड कंपनी का पुराना रिकॉर्ड जलाया  रिकॉर्ड बेचा जो एक अनियमितताओं में आता है उसे स्थित उन्हें डर लग रहा है कि हम निलंबित हो जाएंगे हमारी नौकरी जा सकती है उन्होंने कितने लोगों को बेसहारा किया है वह याद नहीं है ।उनके दिल से पूछो जो१० सत्रह अट्ठारह १२ घंटे कार्य करते हैं उसके बाद उनको मानसिक पीड़ा की जाती है और उनके मुताबिक उनकी व्यक्तिगत कार्यों को ना करें दूरदराज का ट्रांसफर के लिए कार्रवाई आरंभ हो जाती है जब अपने पर वितती है उस समय का एहसास होता है, दूसरे को दिए गए कस्ट जब अपने पर होते हैं उस स्थिति में उन्हें एहसास होता है। देखना है रिकॉर्ड चलया गया रिकॉर्ड बेचने की समस्त वीडियो चिटफंड कंपनी के प्रबंध तंत्र तक पहुंचाया गया है । इस पर प्रबंध तंत्र क्या निर्णय लेते है यह आगे वाले अंक में आप लोगों को बताएंगे ।

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