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Friday, February 26, 2021

बिना सुनवाई किए पंजीकरण रद्द करने का अधिकार देना देश के संविधान में प्रदत्त अधिकारों का हनन है - राजकुमार गुप्ता

 बाँदा, के एस दुबे   - भारत बंद एवं GST से चरमराई ब्यापार तथा परेशान व्यापारियों की समस्या को देखते हुए शुक्रवार 26फरवरी को ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) बांदा द्वारा जीएसटी में जटिलता को समाप्त करके व्यापार व्यापारी हित में संशोधन करके सरल करके इंस्पेक्टर राज में पाबंदी हेतु जिलाधिकारी बांदा को देश के प्रधानमंत्री व वित्त मंत्री को संबोधित ज्ञापन सिटी मजिस्ट्रेट बाँदा को दिया गया जिसमें भारी संख्या में व्यापारी उपस्थित रहे।gst से उद्वेलित व्यापारियों ने बीते  22 दिसंबर 2020 को केंद्रीय प्रत्यक्ष कर एवं कस्टम विभाग द्वारा नोटिफिकेशन नंबर 94 के माध्यम से यह जीएसटी के अंदर कई संशोधन का हवाला देते कहा कि इस नोटिफिकेशन के माध्यम से व्यापारियों द्वारा gstr-3b में ली जाने वाली इनपुट टैक्स क्रेडिट पर नियम 36(4) एवं 86(B) में शर्तों के साथ अंकुश लगा दिया गया है । यह *नैसर्गिक न्याय* के सिद्धांत के साथ ही साथ देश के यशस्वी प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी जी के *इज ऑफ डूइंग* बिजनेस परिकल्पना के विरुद्ध भी है।जीएसटी के अंतर्गत पंजीकृत व्यापारियों में अधिकांशतः व्यापारी त्रैमासिक आधार पर अपना बिक्री का रिटर्न gstr-1 भरते हैं इनसे खरीद करने पर इनपुट टैक्स क्रेडिट क्रेता के जीएसटीआर 2A एवम जीएसटीआर 2B में 4 माह के उपरांत दिखाई देगा इसका प्रभाव होगा कि बड़े व्यापारी उनसे माल खरीदना पसंद नहीं करेंगे जो कि त्रैमासिक आधार पर अपनी विवरणी दाखिल करते हैं इससे जीएसटी में पंजीकृत एक करोड़ छोटे व्यापारियों का व्यापार प्रभावित होगा और उनके समक्ष रोजी-रोटी की समस्या उत्पन्न होगी।


नियम 86B में 50 लाख मासिक बिक्री करने वालों के इनपुट टैक्स क्रेडिट को 99% पर स्थित कर देना कहीं से भी न्याय संगत नहीं हो सकता है यदि नियम 85B व्यापारियों पर लागू किया जाता है तो सरकारी संस्थाओं को कैसे की जा सकती है। पंजीकरण की धारा 29 या नियम 21ए के तहत बिना सुनवाई किए पंजीकरण रद्द करने का अधिकार देना देश के संविधान में प्रदत्त अधिकारों का हनन है । नियम  59 के अंतर्गत दो संगत gstr-3b ना जमा करने पर gstr-1 को प्रतिबंधित करना ना तो नहीं पीते और ना ही तर्कसंगत है । ईवे बिल में प्रति 100 किलोमीटर के स्थान पर 200 किलोमीटर का किया जाना युक्तिसंगत नहीं है साथ ही जब ई इनवॉइस को अवश्य किया गया है तब ई वे बिल का महत्व नहीं रह जाता है।व्यापारियों ने दिए ज्ञापन में अनुरोध किया है कि केंद्र सरकार तत्काल इस नोटिफिकेशन नंबर 94 को वापस ले,और एक बार व्यापारियों के साथ बैठकर सरकार द्वारा जीएसटी की पुनर समीक्षा की जाए और उसके उपरांत इसमें एक मुश्त संशोधन किए जाए ।

अतः देश के व्यापार और व्यापारियों के हितों में उनके निवेदन पर गंभीरता से विचार कर निराकरण किया जावे। ज्ञापन देने में कैट के प्रदेश उपाध्यक्ष राजकुमार गुप्ता राज प्रांतीय सदस्य वीरेंद्र गोयल कैट के जिला अध्यक्ष  अमित सेठ भोलू अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के जिलाध्यक्ष मनोज जैन नगर अध्यक्ष कैट अमित गुप्ता मनीष संतोष ओमर सुरेश कान्हा पीयूष गुप्ता अशोक गुप्ता पुष्कर द्विवेदी अनुराग चंदेरिया, राममिलन तिवारी, अभिषेक khanchu, राजू त्रिपाठी रामकिशोर शिवहरे नईम नेता गौरव अग्रवाल जितेंद्र गुप्ता रामजी गुप्ता पन्नालाल धुरिया अमोल जरिया नितेश श्रीवास्तव संजय निगम अकेला अवधेश रूपानी अमित रिंकू शिवपूजन गुप्ता राजापुर यार मोहम्मद बब्बू भाई अरुण कुन्नी  आज व्यापारी गण उपस्थित रहे।

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