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Wednesday, February 24, 2021

अनुकरणीय है गोपियो का प्रेम: अमरकृष्ण

चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरि। श्रीमद भागवत कथा के पांचवे दिन कथा व्यास ने गोवर्द्धन पर्वत पूजा की कथा सुनाई। उन्होंने कहा कि व्यक्ति को ऐसा दान करे जो खुद उपयोग में लाते हों।

मुख्यालय के बस स्टैन्ड स्थित केसरवानी धर्मशाला में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के पांचवे दिन भागवत कथा व्यास अमरकृष्ण शास्त्री ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण के जन्म पर एक माह तक उत्सव मनाया गया। गोपियो का प्रेम अनुकरणीय है। गोपियो जैसा कोई प्रेम नहीं किया। नंद बाबा के वासुदेव परममित्र थे। उन्होंने पुत्र की खुशी पर अपने मित्र से मिलने कंस के कारागार में मिलने गए थे। नंद बाबा ने वासुदेव से कहा कि आपके आठ पुत्रो को कंस ने मार

कथा रसपान कराते आचार्य अमरकृष्ण शास्त्री।

दिया। अपार कष्ट को सह रहे हैं। नंद बाबा को यह आभास नहीं था कि श्रीकृष्ण उन्हीं के पुत्र हैं। 60 वर्ष की आयु में नंद के दो पुत्र हुए। जिनकी खुशियां मनाने के लिए एक माह तक उत्सव मनाया गया। गोपियो ने ऐसा प्रेम किया जो आज नहीं देखा जा सकता। किसी के ऊपर संकट पड़े तो जरूर मिलना चाहिए। सुख में भले ही न जाए। भगवान श्रीकृष्ण का जन्म अष्टमी को हुआ था। चतुर्दशी को कंस ने पूतना को नंद के यहां मारने को भेजा था। पूतना पूरा श्रंगार कर पहुंची थी। भगवान श्रीकृष्ण पहचान गए और उसका वध किया। इसी प्रकार कंस के भेजे कई राक्षसों का संहार बाल काल में किया। गोवर्द्धन की कथा सुनाते हुए बताया कि प्रकृति से प्रेम करें। भगवान ने एक अंगुली में पर्वत धारण कर ब्रजवासियों की रक्षा की थी। इस मौके पर यजमान मनोज द्विवेदी, सुमित्रा द्विवेदी, अमित द्विवेदी, प्रभाकर मिश्रा, स्वपनिल द्विवेदी, राधेश्याम तिवारी, चन्द्रभूषण अवस्थी, अमरनाथ द्विवेदी आदि श्रोतागण मौजूद रहे।


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