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Monday, February 8, 2021

देव भूमि 2013 का कुदरती आपदा का मंजर याद आया......................... ...........................

देवेश प्रताप सिंह राठौर 

(उत्तर प्रदेश महासचिव आल मीडिया जर्नलिस्ट एसोसिएशन)

 .......................... वर्ष 2013 में जिस तरह से कुदरती आपका आई थी जिसमें चार हजार के ऊपर लोगों की मृत्यु हुई थी उसी का रूप कल दिन रविवार को फिर कुदरती आपदा द्वारा रूप रूप देखने को मिला लेकिन ईश्वर की थोड़ी सी कृपा रही पानी का बहाव अन्य स्थानों पर  स्थानों पर जाकी धीमा पड़ गया , बड़ीी घटनाएं होने से बच गई, जब उत्तराखंड उत्तराखंड के चमोली जिले में रविवार को कुदरत ने कहर बरपाते हुए भारी तबाही मचाई। 29 सौ किलोमीटर के दायरे में  ग्लेशियर का जाल फैला है अगर यह कभी भविष्यय में कहीं जाते ग्लेशियर गिर गया तो पूरा विश्वव जल मग्न हो जाएगा क्योंकि चीन जिस तरह  से कुदरत के साथ खिलवाड़ कर रहा है  स्पष्ट होता है कुदरत का कहर इसी तरह बरपाता रहेगा क्योंकि ईश्वर से बढ़कर इंसान बनने वाला व्यक्ति भगवान बननेे का   प्रयास कर रहा  है,रैणी गांव के शीर्ष भाग में ऋषिगंगा के मुहाने पर सुबह करीब 9:15 बजे ग्लेशियर का एक हिस्सा टूटकर ऋषिगंगा में गिर गया, जिससे नदी में भीषण बाढ़ आ गई। इस जल प्रलय से नदी पर निर्मित 13 मेगावाट की ऋषिगंगा जल विद्युत परियोजना पूरी तरह तबाह हो गई।


वहीं, एनटीपीसी की तपोवन स्थित 500 मेगावाट की निर्माणाधीन तपोवन-विष्णुगाड जल विद्युत परियोजना को भारी नुकसान पहुंचा। दोनों परियोजनाओं में काम कर रहे 155 से ज्यादा मजदूरों और स्थानीय लोगों के हताहत होने की खबर है। अभी आठ लोगों के शव मिले हैं। जिला प्रशासन के अनुसार, बाढ़ के दौरान ऋषिगंगा जल विद्युत परियोजना में 35 से 40 लोग काम कर रहे थे, जबकि तपोवन-विष्णुगाड जल विद्युत परियोजना में कार्य करने वाले 178 कर्मचारियों में से 116 काम पर थे, जिनमें से 25 लोगों को एक सुरंग से सकुशल निकाल लिया गया है। कुछ लोग मोबाइल चला रहे थे, जिससे फंसे लोगों का पता चला।आपदा की सूचना मिलने के बाद आईटीबीपी, बीआरओ, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमों को बचाव कार्य में लगाया गया है। एनडीआरएफ की चार टीमें (करीब 200 कर्मी) दिल्ली से एयरलिफ्ट करके देहरादून भेजी गईं, जिन्हें वहां से जोशीमठ भेजा गया। बताया जाता है कि पानी का बहाव इतना तेज था कि ऋषिगंगा और धौलीगंगा के किनारे बसे कई गांव भी तबाह हो गए। हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। पौड़ी, टिहरी, रुद्रप्रयाग, हरिद्वार और देहरादून समेत कई जिलों में हाई अलर्ट कर दिया गया है। वहीं, नदी का जल स्तर बढ़ने से निचले क्षेत्रों में लोगों में खलबली मची रही।

जोशीमठ, पीपलकोटी, चमोली, नंदप्रयाग, कर्णप्रयाग के साथ ही रुद्रप्रयाग क्षेत्र में पुलिस ने लाउडस्पीकर से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए कहा। स्थानीय प्रशासन ने ऋषिकेश और हरिद्वार में गंगा किनारे के लोगों को अलर्ट करते हुए राफ्टिंग समेत सभी गतिविधियों पर रोक लगा दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह ने भी उत्तराखंड की आपदा पर चिंता जताते हुए प्रदेश सरकार को हर तरह की मदद का भरोसा दिलाया।आपदा में चमोली के विष्णुगाड-पीपलकोटी जलविद्युत परियोजना और धौलीगंगा बिजली परियोजना को भी नुकसान पहुंचा है। पीपलकोटी परियोजना अलकनंदा नदी पर है। इसके लिए डायवर्जन डैम बनाए जा रहे थे, जिसकी ऊंचाई 65-70 मीटर तक होती। इससे बिजली का उत्पादन दिसंबर, 2023 तक शुरू होने की उम्मीद थी। यह प्रोजेक्ट 400 मेगावाट का है। वहीं, 90 मीटर का झूला पुल समेत सात पुल बह गए। इस आपदा से चार हजार करोड़ रुपये से ज्यादा के नुकसान का अनुमान है। तपोवन-विष्णुगाड परियोजना में 2978 करोड़, जबकि ऋषिगंगा परियोजना में 40 करोड़ के नुकसान का अनुमान लगाया गया है। इसके अलावा करीब 1000 करोड़ के अन्य नुकसान का अनुमान है।

जोशीमठ क्षेत्र से आगे मलारी के पास सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) का एक पुल बाढ़ से बह गया। बीआरओ के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल राजीव चौधरी ने अधिकारियों को जल्द से जल्द इसे बहाल करने का निर्देश दिया है। आवश्यक दुकानों और कर्मियों को सुरक्षित स्थान पर ले जाया जा रहा है। वाडिया इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों ने घटना की आरंभिक वजह बीते दिनों हुई बर्फबारी के बाद शंक्वाकार पहाड़ों पर हुए भारी हिमस्खलन से ग्लेशियर का टूटना बताई है। हालांकि, सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा, आपदा की असली वजह जानने के लिए विशेषज्ञों की एक टीम जांच करेगी।केंद्र सरकार ने आपदा में जान गंवाने वालों के परिजनों को 2-2 लाख रुपये और गंभीर रूप से घायलों को 50-50 हजार रुपये के मुआवजे का एलान किया है। वहीं, उत्तराखंड सरकार ने मृतकों के परिजनों को 4-4 लाख रुपये मुआवजा दने की घोषणा की है। घायलों को 50-50 हजार की धनराशि दी जाएगी।मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि बचाव और राहत कार्य सरकार की पहली प्राथमिकता है, इसमें पूूरी क्षमता से काम किया जा रहा है। मुख्यमंत्री के मुताबिक चमोली में आई आपदा में कम से कम 125 लोगों के लापता होने की जानकारी है। सात शव बरामद कर लिए गए हैं। नुकसान का आकलन जारी है, जबकि कारण भी पता लगाया जा रहा है। रविवार देर शाम आपदा कंट्रोल रूम का निरीक्षण करने के बाद मीडिया से मुखातिब मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा नीति घाटी में रेणी गांव के पास ऋषि गंगा में अचानक पानी और मलबा आने की जानकारी मिली थी। यहां पर दो जल विद्युत परियोजनाएं हैं और दोनों को ही नुकसान हुआ है।करीब 13 मेगावाट की एक परियोजना में 35-36 लोग काम करते थे। इसी परियोजना से पांच किलोमीटर की दूरी पर निर्माणाधीन एनटीपीसी की जल विद्युत परियोजना में करीब 176 श्रमिक कार्यरत थे, उनका रिकॉर्ड गायब हो गया है। मुख्यमंत्री के मुताबिक बचाव एवं राहत कार्य तुरंत शुरू कर दिया गया था। उन्होंने खुद हवाई सर्वे किया और इसके बाद गाड़ी से रेणी गांव तक पहुंचे। देर शाम तक पानी का बहाव श्रीनगर आते-आते धीमा हो गया था और इससे आगे किसी खतरे की आशंका नहीं जताई जा रही है। करीब 40 लोगों को बचा भी लिया गया है।मुख्यमंत्री ने बताया कि इस समय सरकार का पूरा ध्यान राहत और बचाव पर है। देर शाम तक धौली गंगा पर रैणी गांव को अन्य से जोड़ने वाला 90 स्पान का मोटर पुल और चार अन्य झूला पुलों के बहने की जानकारी है। धौली गंगा के एक किनारे पर करीब 17 गांव हैं, जो सड़क न होने के कारण संपर्क से कट गए हैं। इनमें से 11 गांव माइग्रेटरी हैं और सर्दियों में इन गांवों के लोग गोपेश्वर आ जाते हैं।मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री ने घटना की जानकारी मिलते ही फोन किया। उस समय वे हेलीकाप्टर में थे। हवाई सर्वे के बाद वे जिस समय लौट रहे थे, उस समय फिर फोन आया। प्रधानमंत्री ने हर तरह के सहयोग का आश्वासन दिया है। इसी तरह राष्ट्रपति ने भी फोन किया और हर तरह की मदद का आश्वासन दिया। गृह मंत्री अमित शाह ने भी दो बार फोन कर जानकारी ली। इसके अलावा केंद्रीय मंत्रियों और राज्यों के मुख्यमंत्री ने भी फोन किया।

जिला चमोली के जोशीमठ-तपोवन में धौलीगंगा में ग्लेशियर टूटने के बाद बढ़े पानी के सैलाब के कारण रुद्रप्रयाग में अलकनंदा का जल स्तर एक मीटर बढ़ा है। जल स्तर अधिक बढ़ने की संभावना को देखते हुए प्रशासन ने जिले में अलर्ट जारी कर दिया है। बेलणी में नदी किनारे वाले आवासीय मकानों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने को कहा गया है। साथ ही कोटेश्वर मंदिर को सुरक्षा की दृष्टि से खाली करा दिया गया है।इसके अलावा यहां दर्शनों को पहुंचे श्रद्धालुओं को भी वापस भेज दिया गया है। कहा कि स्थिति पर पूरी नजर रखी जा रही है।  जिलाधिकारी के निर्देश पर प्रशासन व पुलिस द्वारा नगर क्षेत्र में सभी लोगों से सुरक्षा के प्रति जागरूक रहने की अपील की गई। अलकनंदा नदी किनारे स्थित कोटेश्वर मंदिर समेत अन्य स्थानों पर सुरक्षा को लेकर चौकसी बढ़ा दी गई है। जिलाधिकारी मनुज गोयल ने बताया कि अलकनंदा नदी का जलस्तर बढ़ने से भी इंकार नहीं किया जा सकता है। इंसीडेंट रिस्पांस टीम को सतर्क रहने को कहा गया है। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंदन सिंह रजवार ने बताया कि रविवार को सुबह आठ अलकनंदा नदी का जल स्तर 618.33 मीटर था। जबकि शाम पांच बजे जल स्तर पर में एक मीटर की वृद्धि हुई है, जो 619.36 मीटर पर है। बताया कि नदी के जल स्तर पर नजर रखी जा रही है।चमोली जिले के रैणी गांव में ग्लेशियर टूटने के बाद आए विनाशकारी जलप्रलय को देखते हुए जिला प्रशासन ने टिहरी जिले में भी हाई अलर्ट जारी किया है। देवप्रयाग से लेकर मुनिकीरेती तक प्रशासन ने तटीय इलाकों में रहने वालों से खाली करवा दिया है। टीएचडीसी ने टिहरी बांध से भी पानी के बहाव को भी पूरी तरह रोक दिया है। बिजली उत्पादन बंद कर दिया है। चमोली जिले के नीती घाटी स्थित रैणी गांव में ऋषि गंगा के मुहाने पर ग्लेशियर टूटने से तबाही के बाद मैदानी इलाकों में भी बाढ़ खौफ पैदा हो गया। दोपहर में आननफानन पुलिस और प्रशासन ने अलर्ट जारी कर रुड़की, लक्सर, मंगलौर, खानपुर, सुल्तानपुर आदि क्षेत्रों में मुनादी करते हुए नदियों के तटों को खाली करा दिया।लक्सर क्षेत्र में गंगा के किनारे फसल की रखवाली कर रहे करीब 500 किसानों को हटाकर गांव जाने के निर्देश दिए। वहीं, यूपी के रामसहायवाला गांव के लोगों को बालावाली इंटर कॉलेज में पहुंचा दिया गया। नदियों के किनारे बसे अन्य गांवों के ग्रामीणों ने सामान के साथ आसपास के गांवों में शरण ले ली।विद्युत परियोजनाओं की दो सुरंगे हैं। एक सुरंग करीब 150 मीटर की है और दूसरी करीब 250 मीटर की है। एक सुरंग में करीब 15 लोगों और दूसरी सुरंग में करीब 35 लोगों के फंसे होने का अनुमान है। 250 मीटर वाली सुरंग को देर शाम तक आईटीबीपी ने करीब 150 मीटर खोद लिया था। यहां मशीन न पहुंच पाने के कारण काम धीमी गति से हो रहा हैमुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री ने घटना की जानकारी मिलते ही फोन किया। उस समय वे हेलीकाप्टर में थे। हवाई सर्वे के बाद वे जिस समय लौट रहे थे, उस समय फिर फोन आया। प्रधानमंत्री ने हर तरह के सहयोग का आश्वासन दिया है। इसी तरह राष्ट्रपति ने भी फोन किया और हर तरह की मदद का आश्वासन दिया। गृह मंत्री अमित शाह ने भी दो बार फोन कर जानकारी ली। इसके अलावा केंद्रीय मंत्रियों और राज्यों के मुख्यमंत्री ने भी फोन किय

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि उत्तराखंड को हरसंभव मदद देने के लिए दिल्ली सरकार तैयार है। केजरीवाल ने सोशल मीडिया पर ट्वीट में कहा कि चमोली जिले से आपदा की घटना बेहद चिंताजनक है। उन्होंने सभी लोगों की सुरक्षा व कुशलता की प्रार्थना की है। आपदा की इस घड़ी में उत्तराखंड की जनता तक हरसंभव मदद पहुंचाने के लिए दिल्ली सरकार तैयार है। उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने ट्वीट में लिखा है कि उत्तराखंड के चमोली में ग्लेशियर टूटने से हुई तबाही से आहत हूं। इस चुनौतीपूर्ण समय में हम उत्तराखंड के साथ एकजुटता में खड़े हैं।

मुख्यमंत्री ने बताया कि जल विद्युत परियोजनाओं में काम करने वाले स्थानीय लोग रविवार होने के कारण अवकाश पर थे। रैणी गांव के एक भेड़ पालक की भेड़ आपदा की भेंट चढ़ने की जानकारी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें सबसे पहले सोशल मीडिया से जानकारी मिली और अधिकारियों ने इसकी पुष्टि की। आपदा के समय संवाद का स्तर बेहतर रहा और राहत एवं बचाव टीम तुरंत सक्रिय हुईं। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऋषिकेश, हरिद्वार, श्रीनगर आदि के लिए हालात सामान्य हैं। एतिहातन तटीय इलाके खाली कराए गए हैं और श्रीनगर के बांध का पानी कम कर दिया गया था। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह हिमस्खलन है या कोई झील टूटी है, इसका अभी पता नहीं चल पाया है। नुकसान का आकलन किया जा रहा है। प्रदेश सरकार इतना जरूर कह सकती है कि राहत और बचाव के लिए सभी कुछ मौजूद है।

बचाव व राहत कार्यों के लिए सेना और आईटीबीपी के जवानों ने मोर्चा संभाल लिया है। आईटीबीपी के कमांडेंट शेंदिल कुमार के मुताबिक आईटीबीपी के 250 जवान रेस्क्यू ऑपरेशन में जुट गए हैं। इनमें मेडिकल अफसर सहित आठ अधिकारी भी शामिल हैं। वे एनटीपीसी पॉवर हाउस के आसपास के इलाके में कार्य कर रहे हैं। गौचर में आईटीबीपी की आठवीं बटालियन की दो टीमें जिसमें 90 जवान हैं, घटनास्थल के लिए निकल चुके हैं। इसके अलावा गौचर एवं देहरादून में एक-एक कंपनी आदेश की प्रतीक्षा कर रही है। उत्तरकाशी में मातली एवं महिडाण्डा में भी एक-एक कंपनी इस टास्क के लिए तैयार है। इसके अलावा स्पेशलिस्ट माउंटयरिंग एवं स्कीइंग इंस्टीट्यूट औली की दो टीमें तपोवन एरिया में पहुंच चुकी है। 

सेना के कर्नल एस शंकर के मुताबिक, जोशीमठ से सेना के 40 जवानों का एक दल तपोवन पहुंच गया है। एक दल जोशीमठ में है। दो सैन्य दल औली से जोशीमठ के लिए रिलीफ ऑपरेशन के लिए आ चुके हैं। रुद्रप्रयाग में दो सैन्य दल तैयार रखे गए है। एक इंजीनियरिंग टास्क फोर्स जोशीमठ से तपोवन पहुंच गया है। दो मेडिकल आफिसर एवं दो एंबुलेंस तपोवन पहुंच चुके हैं। आर्मी का हेलीपैड सिविल एडमिनिस्ट्रेशन के लिए चालू है। कम्यूनिकेशन के लिए सिविल लाइन चालू है। बरेली से दो हेलीकॉप्टर भी जोशीमठ पहुंच गए हैं।चमोली में हुई घटना के बाद रविवार को यहां प्रशासन ने बाह बाजार और रामकुंड में लोगों की आवाजाही बंद कर दी गई। इसके साथ ही ऋषिकेश-बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर वाहनों की आवाजाही बंद कर ट्रैफिक को देवप्रयाग-चाका-गजा मोटर मार्ग पर डायवर्ट किया गया। थाना प्रभारी महिपाल सिंह रावत ने बताया कि स्थिति से निपटने के लिए नगर के विभिन्न स्थानों पर पुलिस और आपदा प्रबंधन की टीम तैनात कर दी गई है।  ऋषिगंगा पावर प्रोजेक्ट के बहने की सूचना और पानी के तेज बहाव की जैसे ही जानकारी आई तो श्रीनगर जल विद्युत परियोजना की पूरी टीम सतर्क हो गई। उन्होंने तेजी से बहाव को नियंत्रित करने का काम शुरू कर दिया। कड़ी मशक्कत के बाद इंजीनियर कामयाब हो गए जिससे बड़ी तबाही होने से बच गई।

रविवार को सुबह जैसे ही ऋषिगंगा में ग्लेशियर टूटने के बाद ऋषिगंगा पावर प्रोजेक्ट बहने की सूचना आई तो अंदाजा लग गया कि आपदा में पानी और मलबे का बहाव तेज है। इस बहाव को नियंत्रित करना सबसे जरूरी था, अन्यथा बाढ़ का असर ऋषिकेश व हरिद्वार तक हो सकता था। लिहाजा, श्रीनगर जीवीके जल विद्युत परियोजना की पूरी टीम बचाव कार्यों में जुट गई।

तुरंत इस परियोजना की झील में पानी का स्तर कम करने के लिए पानी को आगे के लिए छोड़ दिया गया, ताकि पीछे से आने वाले पानी को यहां रोक कर उसकी गति को नियंत्रित किया जा सके। करीब साढ़े चार घंटे के बाद श्रीनगर बांध की झील में पानी का तेज बहाव पहुंच गया। लेकिन यहां पहले से ही झील में जगह होने की वजह से स्थिति नियंत्रण में आ गई। एक बांध के टूटने से पानी का जो वेग बना था, उसके कदम श्रीनगर बांध की वजह से रुक है,आपदा में चमोली के पीपल कोटी पावर प्रोजेक्ट, एनटीपीसी के ऋषिगंगा पावर प्रोजेक्ट और तपोवन हाईड्रो प्रोजेक्ट को काफी नुकसान पहुंचा है। धौलीगंगा पावर प्रोजेक्ट को भी नुकसान की खबर है। चमोली जिले में विष्णुगाड़ पीपलकोटी हाईड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट अलकनंदा नदी पर है। इस प्रोजेक्ट के लिए डायवर्जन डैम बनाए जा रहे थे, जिसकी ऊंचाई 65-70 मीटर तक होती है।बांध की मदद से जो रिजवाइर तैयार किए जा रहे थे, उनमें पानी की स्टोरेज क्षमता 3.63 मिलियन क्यूबिक मीटर है। इस प्रोजेक्ट के दिसंबर 2023 तक शुरू होने की उम्मीद थी। यह प्रोजेक्ट 400 मेगावाट का है। ऋषिगंगा पावर प्रोजेक्ट को भी काफी नुकसान पहुंचा है। ऋषिगंगा नदी अलकनंदा नदी की सहायक है। यह अपने भीतर 236 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी समेटता है। इस प्रोजेक्ट की क्षमता 35 मेगावाट है।चमोली जिले के जिस रैणी गांव में रविवार को ग्लेशियर फटा, वहां पावर प्रोजेक्ट बनाने के विरोध में दो साल पहले कुछ ग्रामीणों ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका भी दायर की थी, जो विचाराधीन है। जानकारी के मुताबिक रैणी गांव के कुंदन सिंह और अन्य ने वर्ष 2019 में हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी। ग्रामीणों का आरोप था कि ऋषिगंगा पावर प्रोजेक्ट के बहाने गांव व आसपास के क्षेत्रों में अवैध खनन हो रहा है और अवैध खनन से निकले  मलबे का नियमानुसार निस्तारण नहीं हो रहा है। इससे समूचे क्षेत्र में पर्यावरणीय नुकसान से बड़ा खतरा पैदा हो गया है। ग्रामीणों ने याचिका के साथ कुछ फोटो और वीडियो भी हाईकोर्ट में दाखिल किए ,डीजीपी अशोक कुमार ने जोशीमठ में पत्रकारों से वार्ता में कहा कि रैणी में 2 पुलिस कर्मी सहित 27 लोग मिसिंग हैं। जबकि तपोवन परियोजना में 150 लोग काम कर रहे थे, जिनमें से 7 लोगों की बॉडी बरामद कर ली गई है। कितने लोग प्रभावित क्षेत्र से मिसिंग हैं, इसका अभी डाटा उपलब्ध नहीं है। तपोवन परियोजना की 900 मीटर लंबी टनल में मलबा घुसा है, उसे खोलने का काम चल रहा है। 150 मीटर तक टनल खोल दी गई है। रातभर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जाएगा। सोमवार तक पूरी स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।रैणी गांव में ग्लेशियर टूटने की सूचना पर तत्काल एसडीआरएफ अलर्ट हो गई। ऋषिकेश से लेकर जोशीमठ तक एसडीआरएफ की सभी टीमों को अलर्ट कर दिया गया। एसडीआरएफ के मुताबिक सुबह करीब 10.55 मिनट पर जोशीमठ पोस्ट में तैनात हेड कांस्टेबल मंगल सिंह को जोशीमठ थाने से रैणी गांव में ग्लेशियर टूटने की सूचना मिली थी।जिसके बाद तत्काल एसडीआरएफ की सभी टीमों को अलर्ट कर दिया था। इसके बाद तत्काल दो टीमों को 11 बजे रैणी गांव के लिए रवाना कर दिया गया साथ ही सेनानायक नवनीत भुल्लर ने गौचर, श्रीनगर, रतूडा में तैनात एसडीआरएफ की टीम को अलर्ट पर रहने के आदेश दिए। साढ़े ग्यारह बजे रैणी गांव में रेस्क्यू अभियान शुरू कर दिया गया।जैसे-जैसे ग्लेशियर का पानी आगे बढ़ता गया सभी टीमें सक्रिय हो गई और लोगों को सतर्क रहने के लिए कहा गया। करीब साढ़े बारह बजे श्रीगनगर की टीम को भी अलर्ट कर दिया गया। साथ ही दो टीमों को तपोवन, दो को जोशीमठ, एक टीम को श्रीनगर, एक कीर्तिनगर, एक टीम ऋषिकेश में तैनात किया गया। करीब चार बजे सेनानायक नवनीत भुल्लर भी रैणी गांव पहच गए हैं।

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