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Sunday, January 24, 2021

कानपुर:- शहर के प्राचीन मंदिर महाराज प्रयाग नारायण मंदिर शिवाला में,बैकुंठ उत्सव धूमधाम से मनाया गया

दक्षिण भारतीय शैली का शहर में प्राचीन मंदिर महाराज प्रयाग नारायण मंदिर शिवाला में रविवार को बैकुंठ उत्सव धूमधाम से मनाया गया। वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच स्वर्ण सिंहासन पर विराजमान भगवान लक्ष्मी नारायण को कंधे पर उठाकर परिक्रमा यात्रा निकाली गई। परिक्रमा यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं के जयकारों से आसमान गूंजता रहा और उन्होंने सुख-समृद्धि की कामना की।
कानपुर कार्यालय संवाददाता:- शिवाला स्थित महाराज श्री प्रयाग नारायण मंदिर में प्रातः काल बैकुंठ उत्सव में भगवान लक्ष्मी नारायण भगवान को भक्तों ने स्वर्ण सिंहासन पर विराजमान कराया। इसके बाद बैकुंठ द्वार से बाहर निकालकर मंदिर की परिक्रमा कराई। श्री बैकुंठ नाथ भगवान के साथ दक्षिण भारत के चार आचार्य अलवार भी रजत सिंहासन पर विराजमान रहे। भगवान लक्ष्मी नारायण की परिक्रमा के दौरान भक्तों ने पुष्प वर्षा कर प्रभु के जयकारे लगाए। वैदिक मंत्रोच्चारण की गूंज के बीच भक्तों ने श्री बैकुंठ नाथ भगवान से सुख समृद्धि की कामना की।

मंदिर के युवा प्रबंधक ने बताया कि श्री बैकुंठ उत्सव आम जनमानस में बड़े पेड़े वाले उत्सव के नाम से प्रचलित है। उन्होंने बताया कि संस्कृत एवं तमिल भाषा के वैदिक मंत्रोच्चारण के प्रथम दिन इस महोत्सव को उत्साह पूर्वक मनाया जाता है। उत्तर भारत में वृंदावन धाम के बाद प्रयाग नारायण मंदिर में मनाया जाने वाला बैकुंठ उत्सव भक्तों के बीच आस्था का प्रमुख केंद्र रहता है। मंदिर के अध्यक्ष ने बताया कि बैकुंठ द्वार द्वारा आगामी 5 दिनों तक यह प्रवेश द्वार खुला रहेगा। जिसमें भक्त दर्शन कर प्रभु से सुख-समृद्धि की कामना करेंगे।

रविवार को हुए उत्सव में वृंदावन गोरखपुर अयोध्या सहित अनेक शहरों के आचार्यों ने हिस्सा लिया। परिक्रमा यात्रा पूरी होने के बाद विधि-विधान से भगवान की आरती उतारी गई और सामूहिक रूप से अंग वस्त्र और पेड़े का वितरण भक्तों में किया गया। दोपहर में हुए भंडारा और भोज में दही पेड़ा और फल कुट्टू के आटे की पूरी और सब्जी का सामूहिक वितरण किया गया। बद्री नारायण तिवारी, राजेंद्र प्रसाद पांडे, विनोद कुमार दीक्षित, संजय सिंह, गोविंद शुक्ला, अविनाश चंद्र बाजपेई, राकेश तिवारी, कनिष्क पांडे, महेश मिश्र, मंदिर व्यास करुणा शंकर, रामानुज दास, प्रधान अर्चक आचार्य सूरजदीन पंडित अश्वनी व पंडित अनुराग उपस्थित रहे।

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