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Sunday, January 3, 2021

इंदिरा गांधी के बाद देश को मजबूत प्रधानमंत्री मोदी के रूप में................

देवेश प्रताप सिंह राठौर.. 

(वरिष्ठ पत्रकार) 

हम भारत देश अल आजादी के बाद मजबूत प्रधानमंत्री की बात करें तो उसमें सर्वप्रथम इंदिरा गांधी का नाम उसके बाद देश के वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का आता है, देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी जिस तरह हर क्षेत्र में विकास के पथ पर देश को ले जा रहे हैं देश आज विश्व का पटल में अटल के रूप में मजबूती के नाम को नरेंद्र मोदी कहा जाता है।भारत का ध्रुवीकरण करने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस चुनाव को अपने इर्द-गिर्द समेट दिया था. हालांकि उनके सामने चुनौतियां भी थीं. एंटी इनकंबैंसी काफैक्टरथाबेरोजगारी रिकॉर्ड स्तर तक बढ़ चुकी थी, किसानों की आमदनी नहीं बढ़ी थी और औद्योगिक उत्पादन में गिरावट दर्ज की गई थी,कई भारतीयों को नोटबंदी से काफ़ी नुकसान उठाना पड़ा था. हालांकि नोटबंदी के बारे में सरकार का दावा कर रही थी इससे घोषित संपत्ति को बाहर निकलवाने में कामयाबी मिलेगी. इसके अलावा जीएसटी को लेकर भी कई शिकायतें थी,कई लोग मोदी को अपनी समस्याओं को हल करने वाला मसीहा भी मानते हैं. दिल्ली के थिंक टैंक सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ


डेवलपिंग सोसायटीज (सीएसडीएस) के एक सर्वे के मुताबिक बीजेपी के हर तीसरे मतदाता का कहना है कि अगर मोदी प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नहीं होते तो वे अपना वोट किसी दूसरी पार्टी को देते.दरअसल, इंदिरा गांधी के बाद मोदी भारत के सबसे लोकप्रिय नेता साबित हुए हैं. वाशिंगटन के कारनेजी इंडोमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस के सीनियर फेलो मिलन वैष्णव कहते हैं, "इससे आप अंदाजा लगा सकते हैं कि यह वोट बीजेपी से ज़्यादा मोदी के लिए है, यह चुनाव सबकुछ छोड़कर मोदी के नेतृत्व के बारे में था।एक तरह से, लगातार दूसरी बार शानदार जीत हासिल करने वाले मोदी की तुलना 1980 के दशक लोकप्रिय अमरीकी राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन से की जा सकती है, जिन्हें उस वक़्त के आर्थिक मु्श्किलों के लिए जनता ने ज़िम्मेदार नहीं ठहराया था।

रीगन को हमेशा ग्रेट कम्यूनिकेटर माना जाता था और इस ख़ासियत के चलते ही उनकी ग़लतियां कभी भी उनसे चिपकी नहीं. मोदी भी उसी राह पर नजर आते हैं,कईयों का मानना है कि मोदी ने भारतीय चुनाव को अमरीका के प्रेसीडेंशियल इलेक्शन जैसा बना दिया है. लेकिन मजबूत प्रधानमंत्री भी अपनी पार्टियों से ऊपर नजर आते रहे हैं- मार्गेट थैचर, टोनी ब्लेयर और इंदिरा गांधी का उदाहरण सामने है।

 इंदिरा गांधी के बाद नरेंद्र मोदी देश के सबसे लोकप्रिय नेता हैं, इस पर कोई सवाल नहीं है. मौजूदा समय में राष्ट्रीय स्तर पर उन्हें कोई चुनौती देने की स्थिति में भी नहीं है,2014 में उनकी जीत की एक वजह भ्रष्टाचार के आरोपों स घिरी कांग्रेस पार्टी के प्रति लोगों की नाराजगी भी थी. लेकिन गुरुवार को जो जीत मिली है वह मोदी को स्वीकार किए जाने की जीत है. वे 1971 के बाद ऐसे पहले नेता बन गए हैं जिन्होंने लगातार दो बार अकेली पार्टी को बहुमत दिलाया है. अशोका यूनिवर्सिटी में इतिहास के प्रोफेसर महेश रंगराजन कहते हैं, "यह मोदी और नए भारत को लेकर उनके विचार की जीत है।मोदी है तो मुमकिन है यह बात मैं नहीं कह रहा हूं पूरा विश्व कह रहा है आज, क्योंकि मोदी के नेतृत्व में ही कोरोना वैक्सीन इतनी जल्दी उपलब्ध हो सकी है, सीरम इंस्टीट्यूट और भारत बायोटेक को वैक्सीन भारत में लगाने हेतु मंजूरी प्राप्त हो गई है। जबकि तीसरी कंपनी फाइजर कंपनी की भी बहुत जल्दी अच्छा समाचार प्राप्त होगा, आज भारत देश की दो कंपनियों को कोरोना वैक्सीन की मंजूरी प्राप्त हो गई है यह देश के लिए 9 वर्ष में बहुत ही अच्छी एक शुभ सूचना 1 जनवरी को प्राप्त हुई दूसरी सूचना 2 जनवरी को प्राप्त हुई यह वर्ष भारत के लिए सुखद और अच्छा वर्ष रहेगा क्योंकि यहां शुरुआत में ही अच्छी खबर जो कोरोना संक्रमित लोगों के लिए और पूरे देश के हर व्यक्ति को शिर्डी भाई श्रेणी कोरोना वैक्सीन प्राप्त होगी, करीब एक डेढ़ महीने पहले जब देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी हैदराबाद और अन्य कई जगह जहां कोरोना वैक्सीन बन रही थी जिन कंपनियों को लोगों के सीईओ से मिले और उन लोगों से मिलने के बाद उन्होंने एक बात कही थी 9 वर्ष में भारत को अच्छा समाचार प्राप्त होगा और नव वर्ष के प्रथम दिन ही बहुत ही अच्छा समाचार मिला कोरोना वैक्सीन को सिरम इंस्टीट्यूट और भारत बायोटेक को मंजूरी प्राप्त हो गई है।और यह संभव जभी हुआ जब देश के प्रधानमंत्री से लेकर हर व्यक्ति इस क्षेत्र में बहुत ही जागरूक था और सबसे बड़ा श्रेय जाता है देश के प्रधानमंत्री जो हर क्षेत्र में हर स्थित को निपटने के लिए देश को मजबूती प्रदान करते हैं।पत्रकारिता के नाते हम किसी की बुराई या  अछाई लिखते हैं तो हमारे ऊपर आरोप लग जाता है कि हम मोदी जी के समर्थक हैं परंतु ऐसा नहीं है हम सत्य बात लिखने की बात करते हैं, सत्यता को लिखते हैं देश के समक्ष लाने का प्रयास करते हैं जो भी अच्छा करता है जो भी देश के लिए अच्छाइयां देता है उसके बारे में अच्छा लिखना अगर लोगों के मन में यह विचार आता है कि हम मोदी के समर्थक हैं तो इसको हम तहे दिल से स्वीकार करने को तैयार है ,लेकिन सत्य को उजागर करने का हमारा पूरा हक है क्योंकि सच्चाई को लिखने के लिए कोई व्यक्ति अच्छा कार्य कर रहा है अगर उसको अच्छा लिखा जाए उसको लोग गलत दृष्टि से देखें तो यह उनकी सोच की कमी की जा सकती है। कुछ लोग सिर्फ मोदी योगी जी के नाम से विरोध की राजनीति करते हैं देश हित की बात हो उसमें भी विरोध ऐसे लोग राजनीति में अंधे हो चुके हैं जिनको देश सर्वोपरि नहीं लगता है सिर्फ किसी एक विशेष के ऊपर छींटाकशी करते हैं ऐसे लोग देश के लिए अच्छे नहीं हैं और ना देश के हित में कभी ऐसा हुआ है, क्योंकि अगर देश हित में हुआ होता तो 70 वर्ष की आजादी के बाद जो पूर्व सरकारें रही उन्होंने कोई चीज सफलतापूर्वक उसको मजबूती प्रदान नहीं की सिर्फ मजबूती एक परिवारवाद तक ही सीमित रही, एक समय वह था जब यह पूर्व की सबसे बड़ी पार्टियां देश में राज्य करती थी उस पार्टी के अध्यक्ष एवं उस परिवार के मुखिया के खिलाफ पक्ष हो या विपक्ष हो कोई भी उंगली उठाने को तैयार नहीं होता था आज मोदी जी ने उन लोगों के काले कारनामों को उजागर किया है और उनके खिलाफ f.i.r. की है तथा वह जमानत पर बाहर घूम रहे हैं ।यह सिर्फ मोदी है तो मुमकिन हैयह बात आज पूरा विश्व कह रहा है देश तो कह ही रहा है, इस बात को कहने में हमें कतई संकोच नहीं होता है वह आज कोरोना वैक्सीन जो हमारे देश में निर्मित होकर जो शुभ समाचार 1 जनवरी से 2 जनवरी को दो कंपनियों को जो टीकाकरण लगाने की अनुमति प्रदान की गई है यह बहुत बड़ी कामयाबी श्री नरेंद्र मोदी जी को देनी चाहिए तथा उन वैज्ञानिकों को देना चाहिए जिन्होंने नरेंद्र मोदी जी के निर्देशों का पालन करते हुए इतनी जल्दी वैक्सिंग का निर्माण किया वह वास्तव में बहुत बड़े धन्यवाद के पात्र हैं।आज पूरा विश्व गर्म कर रहा है भारत के ऊपर वहीं पाकिस्तान पड़ोसी मुल्क जला भुजा जा रहा है क्योंकि उसकी औकात है नहीं कुछ कर पाने की अगर भारत से वैक्सिंग की भीख में मांग करेगा तो भारत सरकार उसको अवश्य विचार करेगी क्योंकि सिर्फ वह भीख मांग सकता है उसकी हैसियत नहीं है सब कुछ कर सके यह मैं नहीं कह रहा हूं यह पाकिस्तान की मीडिया बोल रही है।

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