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Tuesday, January 5, 2021

कोरोना वैक्सीन पर सियासत क्यों ......................

देवेश प्रताप सिंह राठौर 

(वरिष्ठ पत्रकार). 

भारत में कोरोना वैक्सीन पर सियासत शुरू हो गई है समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव जी नेके कोरोना  वैक्सीन नहीं लगवाने की बात कही है,। उन्हीं की एक समाजवादी पार्टी के नेता ने भी कोरोना वैक्सीन से नपुंसक होने की बात कही है इस तरह की सियासत करने वाले हैं जो मानव के जीवन के साथ खिलवाड़ करना चाहते हैं ऐसे लोगों को इंगित करके देश को चुनाव के समय सबक सिखाने की जरूरत है, क्योंकि राष्ट्र में सबसे महत्वपूर्ण कार्य ही है कि आज मानव को बचाने की जरूरत है कोरोना वायरस संक्रमित होने के कारण और वहां पर इस तरह की राजनीति कर रहे हैं इसे स्पष्ट तौर पर दिखाई दे रहा है कि राजनीत हो रही है लोगों को मौत के मुंह में डालने का काम हो रहा है, माइंड को डाइवर्ट किया जा रहा है यह नहीं होना चाहिए, क्योंकि इसमें हमारे वैज्ञानिकों का भी अपमान है, उनकी योग्यता अनुभव पर प्रश्न चिन्ह मत लगाइए  कोवैक्सीन. कोविशील्ड जहां असल में ऑक्सफ़ोर्ड-एस्ट्राज़ेनेका का भारतीय संस्करण है वहीं कोवैक्सीन पूरी तरह भारत की अपनी वैक्सीन है जिसे 'स्वदेशी वैक्सीन' भी कहा जा रहा है.कोविशील्ड को भारत में सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ़ इंडिया कंपनी बना रही है. वहीं, कोवैक्सीन को भारत बायोटेक कंपनी इंडियन काउंसिल ऑफ़ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) के साथ मिलकर बना रही है.ऑक्सफ़ोर्ड-एस्ट्राज़ेनेका की वैक्सीन के आपातकालीन इस्तेमाल की मंज़ूरी ब्रिटेन में मिलने के बाद ऐसी पूरी संभावना थी कि कोविशील्ड को भारत में मंज़ूरी मिल जाएगी और आख़िर में यह अनुमति मिल गई,लेकिन इसके साथ ही और इतनी जल्दी कोवैक्सीन को भी भारत में अनुमति मिल जाएगी इसकी उम्मीद किसी को नहीं थी,तीसरे चरण के ट्रायल में बड़ी संख्या में लोगों पर उस दवा को टेस्ट किया जाता है और फिर उससे आए परिणामों के आधार पर पता लगाया जाता है कि वो दवा कितने प्रतिशत लोगों पर असर कर रही है.पूरी दुनिया में जिन तीन वैक्सीन फ़ाइज़र बायोएनटेक, ऑक्सफ़ोर्ड-एस्ट्राजे़नेका और मोडेर्ना की चर्चा है, उनके फ़ेस-3 ट्रायल के आँकड़े अलग-अलग हैं. ऑक्सफ़ोर्ड की वैक्सीन को 70 फ़ीसदी तक कारगर बताया गया है.भारत में कोवैक्सीन के अलावा कोविशील्ड कितने लोगों पर कारगर है इस पर भी सवाल उठे हैं लेकिन ऑक्सफ़ोर्ड की वैक्सीन होने के कारण इसको उस शक की नज़र से नहीं दे खा जा रहा है जितना कोवैक्सीन को देखा जा रहा है.कोविशील्ड के


भारत में 1,600 वॉलंटियर्स पर हुए फ़ेस-3 के ट्रायल के आँकड़ों को भी जारी नहीं किया गया है. वहीं, कोवैक्सीन के फ़ेस एक और दो के ट्रायल में 800 वॉलंटियर्स पर इसका ट्रायल हुआ था जबकि तीसरे चरण के ट्रायल में 22,500 लोगों पर इसको आज़माने की बात कही गई है. लेकिन इनके आँकड़े सार्वजनिक नहीं किए गए हैं.कोवैक्सीन के आपातकालीन इस्तेमाल की अनुमति दिए जाने के बाद कांग्रेस नेता शशि थरूर ने ट्वीट करते हुए कहा कि कोवैक्सीन का अभी तक तीसरे चरण का ट्रायल नहीं हुआ है, बिना सोच-समझे अनुमति दी गई है जो कि ख़तरनाक हो सकती है. हैउन्होंने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री को टैग करते हुए लिखा, "डॉक्टर हर्षवर्धन कृपया इस बात को साफ़ कीजिए. सभी परीक्षण होने तक इसके इस्तेमाल से बचा जाना चाहिए. तब तक भारत एस्ट्राज़ेनेका की वैक्सीन के साथ शुरुआत कर सकता है। मानव के हित में कोरोना वैक्सीन लगाना अति आवश्यक है।इसमें राजनीतिक पार्टियां विरोध स्वरूप ना देखें क्योंकि यह जनहित में राष्ट्रीय में विश्व के हित में महत्वपूर्ण पूर्णा बैक्सीन जो भारत ने बनाकर तैयार की है कि वास्तव में एक बहुत बड़ी उपलब्धि है।

 कोरोना वैक्सीन पर सबसे पहले सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बयान दिया और वैक्सीन लगवाने से इनकार किया तो बीजेपी नेता भी पलटवार कर रहे हैं. सपा और बीजेपी के सियासी घमासान के बीच बसपा अध्यक्ष मायावती ने कोरोना वैक्सीन के भारत में आगमन को सराहा है. बता दें कि अखिलेश यादव ने कहा था कि ये वैक्सीन बीजेपी की है और इसे मैं नहीं लगवाऊंगा, क्योंकि मुझे बीजेपी पर भरोसा नहीं है. अखिलेश ने बीजेपी पर तंज कसते हुए कहा कि जो सरकार ताली और थाली बजवा रही थी, वो वैक्सीनेशन के लिए इतनी बड़ी चेन क्यों बनवा रही है. ताली और थाली से ही कोरोना को भगवा दें. उन्होंने कहा, 'मैं अभी कोरोना वायरस की वैक्सीन नहीं लगवाऊंगा. मैं बीजेपी की वैक्सीन पर कैसे भरोसा कर सकता हूं. जब हमारी सरकार बनेगी तो सभी को मुफ्त वैक्सीन मिलेगी. हम बीजेपी की वैक्सीन नहीं लगवा सकते हैं।

अखिलेश के बयान पर पलटवार करते हुए प्रदेश के उप-मुख्यमंत्री और बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्‍यक्ष केशव प्रसाद मौर्य ने कहा था अखिलेश यादव को टीके पर भरोसा नहीं है और उत्तर प्रदेशवासियों को उन (अखिलेश यादव) पर भरोसा नहीं है, यह देश के चिकित्सकों और वैज्ञानिकों का अपमान है. यही नहीं कन्नौज सांसद सुब्रत पाठक से लेकर तमाम बीजेपी नेताओं ने अखिलेश यादव परतबडतोड़ जुबानी हमले शुरू कर दिएहै। इस समय चारों तरफ कोरो ना वैक्सीन पर विपक्ष का जो रूख है, उस पर वैक्सीन बनाने वाले वैज्ञानिक ने कहां है हमारे प्रति संदेह व्यक्त करने की जरूरत नहीं है ,इस तरह की राजनीति नहीं होनी चाहिए, राजनीति के तहत वैज्ञानिकों पर संदेह करना गलत है ।

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