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Friday, January 8, 2021

पोलियो की तर्ज पर अब टीबी से देश को मिलेगी मुक्ति

तीन चरण में चलाया जा रहा टीबी मुक्ति अभियान 

अभियान के दौरान जनपद में मिले 117 मरीज

स्वास्थ्य टीमें रोगी खोजने के साथ लोगों को कर रहीं जागरूक 

बांदा, के एस दुबे । पोलियो की तर्ज पर अब देश को टीबी रोग से मुक्त कराने के लिए केंद्र व राज्य सरकार लगातार कोशिशें कर रही है। टीबी हारेगा, देश जीतेगा अभियान चलाकर टीबी रोगियों की खोज और लोगों में जागरूकता लाने का काम चल रहा है। इसे तीन फेज में शुरू किया गया है। पहला चरण पूरा होने के बाद अब दूसरे चरण में एसीएफ चलाया जा रहा है। टीबी रोगियों की खोज के साथ घर-घर जाकर लोगों को टीबी के प्रति जागरूक भी किया जा रहा है। 

एसीएफ के दौरान लोगों को टीबी के बारे मे जागरूक करते डीटीओ डा.एमसी पाल व उनकी टीम।

अभियान के दौरान गांवों में जिला क्षय रोग अधिकारी डा.एमसी पाल व उनकी टीमें लोगों के प्रति जागरूक करने में जुटी हैं। डा.पाल बताते हैं कि टीबी का बैक्टीरिया सांस से फैलता है। यह छींकने या खांसने पर मुंह से निकले कणों से भी फैलता है। एक समय था जब अपने देश में टीबी लाइलाज बीमारी थी लेकिन अब इसका इलाज संभव है। सही समय पर पूरा इलाज कराने से टीबी पूरी तरह से ठीक हो जाती है। उनका कहना है कि अक्सर टीबी का समय पर पता नहीं चल पाता है। इसकी वजह है कि लोग इसके बारे में जागरूक नहीं हैं और इसके लक्षणों को लंबे समय तक नजरअंदाज करते रहते हैं। ऐसे में आपको टीबी के बारे में जानकारी होना बेहद जरूरी है।

योजना के जिला कार्यक्रम समन्वयक प्रदीप वर्मा का कहना है कि टीबी हारेगा भारत जीतेगा अभियान 26 दिसंबर से शुरू हुआ था। पहले चरण में पहली जनवरी तक अनाथालय, वृद्धाश्रम, मदरसे, कारागार इत्यादि में मरीजों की पहचान और जागरूकता अभियान चला। दूसरे चरण में 2 जनवरी एसीएफ (एक्टिव केस फाइंडिंग) शुरू किया गया। इसमें अभी तक जनपद में 117 मरीज मिले हैं। जनपद की कुल आबादी के 20 प्रतिशत यानी दो लाख आबादी पर यह अभियान चलाया जा रहा है। यह 12 जनवरी तक चलेगा। तीसरे और अंतिम चरण में प्राइवेट डाक्टर, क्लीनिक, नर्सिंग होम, लैब, पैथालाजी में जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। 

इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज

बांदा। टीबी का एक प्रमुख लक्षण है खांसी। अगर आपको तीन हफ्ते से ज्यादा समय से खांसी हो तो इसे नजरअंदाज न करें। खांसी में खून आना, सीने में दर्द या सांस लेने और खांसने में दर्द होना, लगातार वजन कम होना, चक्कर आना, रात में पसीना आना, ठंड लगना, भूख न लगना भी टीबी के लक्षण हो सकते हैं। 

टीबी रोग का यह भी है कारण 

बांदा। टीबी एक संक्रामक रोग है जो हवा और सांस से फैलता है। जब कोई टीबी का मरीज खांसता या छींकता है तो उससे निकलने वाले कणों के संपर्क में आने से टीबी हो सकता है। इसके अलावा कुछ और रिस्क फैक्टर्स भी हैं जो आपमें टीबी के खतरे को और बढ़ा देती हैं। 


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