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Friday, January 22, 2021

कवियों एवं शायरों की रचनाएं सुनकर आनंदित हुए श्रोता

वही होता है अपनी मां से रिश्ता, कि जैसे जिस्म का है जां रिश्ता

हथगाम-फतेहपुर, शमशाद खान  । ममतामयी रानी चंद्रप्रभा जी की पुण्यतिथि पर ठाकुर जय नारायण सिंह मेमोरियल पीजी कॉलेज स्थित लाल सिंह इंटरनेशनल स्कूल सभागार हथगाम में मां पर केंद्रित कवि सम्मेलन-मुशायरे में रचनाएं सुनकर श्रोता आनंदित हुए। कार्यक्रम का शुभारंभ अभय ग्रुप आफ इंस्टीट्यूशंस के चेयरमैन मुख्य अतिथि ठा. अभय प्रताप सिंह ने दीप जलाकर किया। कॉलेज की ओर से कवियों एवं शायरों को माला पहना कर सम्मानित किया गया। प्राचार्य रमेश चंद्र ने स्वागत कथन किया जबकि आभार संस्था के डायरेक्टर लाल सिंह ने व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन शिवशरण बंधु हथगामी एवं अध्यक्षता डॉ रतीभान सिंह की।

कवि सम्मेलन एवं मुशायरे में काव्य पाठ करतीं शायरा।

कवि सम्मेलन एवं मुशायरा की विधिवत शुरुआत युवा कवियत्री सानिया सिंह ने सरस्वती वंदना एवं मखदूम फूलपुरी ने मां पर कविता पाठ से किया ‘‘मां कितना ऊंचा है तेरा मकाम, तेरी ममता को मेरा सलाम।’’ वरिष्ठ कवि सौरभ प्रतापगढ़ी ने दोहों एवं गजलों से मन मोह लिया-वही होता है अपनी मां से रिश्ता, कि जैसे जिस्म का है जां रिश्ता। लखनऊ से आईं रंजना सिंह हया ने पढ़ा- मां के मानिंद कोई रोल नहीं हो सकता, उसकी लोरी सा कोई बोल नहीं हो सकता, ऊंचे अंबर से समंदर से भी गहरी है मां, मां की ममता का कोई मोल नहीं हो सकता। शायर डॉ वारिस अंसारी ने पढ़ा- अवतारों ने भी कहा, बोले यही रसूल, मां की गोदी से बड़ा नहीं कोई स्कूल। राष्ट्रीय भावना से ओत-प्रोत काव्य पाठ करते हुए आलम सुल्तानपुरी ने पढ़ा- वतन पर आंच जब आए मुझे आगे बढ़ा देना, यहीं पैदा हुआ हूं मैं, यहीं मुझको सुला देना। जाने-माने कवि एवं शायर शिवशरण बंधु हथगामी ने पढ़ा- उनसे पूछो कितनी मुश्किल यार उठानी पड़ती है, मझधारों के बीच जिन्हें पतवार उठानी पड़ती है, पहुंच नहीं जाता है कोई रातों-रात बुलंदी पर, छत पड़ने से पहले तो दीवार उठानी पड़ती है। हास्य रचनाएं सुनाकर मधुप श्रीवास्तव नरकंकाल एवं टिन्निक टिन्निक हर गंगा के मशहूर कवि समीर शुक्ल ने श्रोताओं को खूब आनंदित किया। नरकंकाल ने पढ़ा- इश्क में हम इस कदर मतिया मेट हो गए, माशूका की शादी हो गई दो दिन लेट हो गये। डॉ गोविंद गजब ने पढ़ा- तेरी नजरों में खोया कत्थई आंखों वाली, मैं कौन हूं तू मुझे नाम बता दे मेरा। शिवम हथगामी ने पढ़ा- दो घरों को सजाती हैं ये बेटियां, बेटियों से बड़ी कोई दौलत नहीं। राजेंद्र यादव ने पढ़ा-जर्रा जर्रा है ऋणी, जर्रे से पहचान, मां ममत्व की बूंद सी, जीवन का वरदान। सानिया सिंह ने भ्रूण हत्या पर पंक्तियां पढ़ीं तो लोगों की आंखें सजल हो गईं-हे माई यूं ना मार मुझे, दे जीने का अधिकार मुझे, इस प्यारी प्यारी दुनिया का कर लेने दे दीदार मुझे। शायर शैदा मुआरवी ने पढ़ा-अजीब रस्म है चारागरों की महफिल में, लगा के जख्म नमक से मसाज करते हैं। इस मौके पर डॉ रतीभान सिंह, अबूजर ने भी पढ़ा। शहंशाह आब्दी, शिव सिंह, जितेंद्र विश्वकर्मा, कृष्णपक्ष शर्मा, शफीक सभासद, शिव सिंह सागर, नीलेश मौर्य, शोएब खान, विजय यादव सहित समस्त शिक्षक मौजूद रहे।


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