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Sunday, January 3, 2021

अस्तित्व खो रहा बांके बिहारी मन्दिर

 मौदहा (हमीरपुर) हरीशंकर गुप्ता - देश को आजादी दिलाने के लिये स्वतन्त्रता संग्राम सेनानी जिस विशाल ‘‘बांके बिहारी मन्दिर’’ से योजना बनाकर पेपर छापते थे आज वह विशाल मन्दिर धीरे धीरे कर अपना अस्तित्व खोता जा रहा है । सबसे बडा गाॅव माना जाने वाला गाॅव गहरौली स्वतन्त्रता संग्राम सेनानियों के छिपने का मुख्य अडडा था ।

अंग्रेजों के खिलाफ ‘‘बुन्देलखण्ड केसरी’’ नामक समाचार पत्र को इसी बांके बिहारी मन्दिर के तहखाने से छापकर पूरे बुन्देलखण्ड में अंगे्रजों के खिलाफ विगुल बजाते थे । इस मन्दिर का भव्य निर्माण कराने वाले धनीराम गुरूदेव ने अपने नाती प्राग दत्त के जन्म उत्सव पर सन् 1872 में यह मन्दिर का निर्माण कराया था । जिसमें राधा कृष्ण की मूर्ति स्थापित करायी गई थी। उक्त मन्दिर मुगल स्थापत्य कला का उत्कर्ष नमूना है, गांधी कालीन आन्दोलन के संचालन के लिये जब कोई सुरक्षित स्थान नहीं था तब इसी बांके बिहारी मन्दिर के तहखाने में नीचे शरण पाते थे । उस समय वहाॅ से बुन्देलखण्ड केसरी समाचार पत्र के माध्यम से अंग्रेजों के खिलाफ खबरें छाप छापकर जन जन तक पहुॅचाते थे । जिसमें अंग्रेजों के बेजा करतूतों का उजागर कर आगे की रणनीति के बारे में भी समाचार पत्र में दर्शाते थे । इस समाचार पत्र की छपने की खबर अंग्रेजों को लग गई थी । मगर उस समय यह एक


जुटता की ही मिशाल थी कि इसकी जानकारी के लिये कुछ स्वाधीनता सेनानियों को पकड कर पिटाई भी हुई । मगर स्वतन्त्रता संग्राम सेनानियों ने कुछ भी नहीं बताया । इस मन्दिर की सुरही में पूरी महाभारत की लडाई का नक्कासी द्वारा सचित्र वर्णन किया गया है आज इस भव्य मन्दिर के तहखाने में लकडी कण्डे डाल डाल कर बन्द हो गया जिससे यह तहखाना अब लोगों को देखने लायक तक नहीं बचा जिससे अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ छपने वाला समाचार पत्र का पे्रस तथा स्वाधीनता सेनानियों को छिपने का मुख्य अडडा रहा है । अब इस मन्दिर में कोई अन्दर जा तक नहीं सकता यह मन्दिर रखरखाव तथा मरम्मती करण के अभाव में आज यह मन्दिर उपेक्षित है । ग्राम गहरौली में पण्डित जवाहर लाल नेहरू, इन्दिरा गाॅधी तक यहाॅ पर आये और जनसभा की । इस मन्दिर के खास तौर पर मन्नी लाल गुरूदेव, राम गोपाल गुप्ता, समेत बहुत से स्वाधीनता सेनानी अंग्रेजों को मात देने के लिये संघर्ष करते रहे हैं । हफ्तों हफ्तों तक अंग्रेजों की तलाश से बचने के लिये वह स्वतन्त्रता संग्राम सेनानी इसी तलघर में छिपे रहे है । गहरौली स्वतन्त्रता संग्राम सेनानी का सबसे बडा एवं महत्वपूर्ण गाॅव माना जाता है ।

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