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Tuesday, January 19, 2021

जगदगुरु ने भरत के नाम का बताया महत्व

आज आएंगें गायक मनोज तिवारी

चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरि। भगवान कामदगिरी की तहलटी मे आयोजित श्रीराम कथा के सातवें दिवस उपस्थित जनसमूह को भरत चरित्र की कथा सुनाते हुए जगदगुरु रामभद्राचार्य महाराज ने बताया कि भरत जैसा इस संसार में कोई भाई नहीं है। नाभा गोस्वामी जी भरत चरित मे कहते हैं कि प्रणवऊ प्रथम भरत के चरना, जासु निम ब्रत जायहि बरना। यहां पर शकुंतला के भरत नहीं है। मैं भरत शब्द की विस्तृत वर्णन करता हूँ की भरत पहले भ का अर्थ भक्ति, दुसरे र का अर्थ रस और तीसरे त का अर्थ तत्व जहां पर भक्ति रूपी गंगा व प्रेम रस रूपी संगम स्थल है। उसी मूर्तिमान को प्रयाग कहते हैं। इसलिए भरत को प्रयाग कहा गया है। रामचरितमानस के अयोध्या कांड में 222 वे दोहे की पंक्ति मे ’भरत दरस देखत खुलेऊ, मग लोगन कर भाग। जिमि सिंघल बासनि भयऊ, विधि बसु सुलभ प्रयास

कथा रसपान कराते जगदगुरु।

आज भरत चरित्र की बहुत ही गंभीर चर्चा जगदगुरु ने की। कथा के दौरान भक्तों ने अश्रुपूरित नयनो से भरत महिमा को सुना। मंच संचालन करते हुए युवराज आचार्य रामचंद्र दास ने अतिथियों का स्वागत किया। आज के कार्यक्रम में प्रसिद्ध भोजपुरी सिनेमा के अभिनेता व गायक मनोज तिवारी सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति दोपहर 12 बजे से देगे’। इस मौके पर कथा के मुख्य यजमान नीलेश मोहता, धर्मपत्नी प्रीति मोहता सपरिवार, कुलपति प्रो योगेश चंद्र दुबे, आरपी मिश्रा, डा महेंद्र कुमार उपाध्याय, डा सचिन उपाध्याय, डा मनोज पांडेय, हिमांशु त्रिपाठी, विधालय की प्राचार्या निर्मला वैष्णव, पीआरओ एसपी मिश्रा आदि श्रोतागण मौजूद रहे।


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