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Wednesday, January 13, 2021

खुशी के इजहार का त्योहार है लोहड़ी

संत तुलसी पब्लिक स्कूल में मनाया गया लोहड़ी पर्व 

अतिथियों और बच्चों को भेंट किया एक-एक पौधा 

बांदा, के एस दुबे । बुधवार को इन्दिरा नगर स्थित संत तुलसी पब्लिक स्कूल में लोहड़ी पर्व धूम-धाम से मनाया गया। मुख्य अतिथि के रूप में सिंधी गुरूद्वारे के गुरू अमरलाल तथा मोहनलाल मौजूद रहे। उन्होने कहा कि लोहड़ी खुशी का त्योहार है जो पूरे देश में मनाया जाता है। यह सिर्फ पंजाबियों का त्यौहार नहीं है। लोहड़ी का यह पावन पर्व पंजाब में मनाते ही हैं। साथ ही इस त्यौहार में खुशियों का इजहार भी करते हैं। लोहड़ी पर्व को सनातन धर्म से जोड़ते हुए मोहनलाल ने बताया कि आज के दिन ही माता सती ने अपने पिता के यहां हवन कुंड में अपने प्राणों की आहुति दी थी।

लोहड़ी पर्व पर कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अतिथि 





कार्यक्रम की शुरूआत मां सरस्वती, संत तुलसी दास जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण के साथ हुयी। शिक्षिका हर्षिता गुप्ता, सपना त्रिपाठी व सोनिया मूलचन्दानी द्वारा लोहड़ी पर्व के बारे मंे बताते हुए कहा कि हमारे देश में लोहड़ी को पोंगल पर्व के नाम से भी जाना जाता है। यह त्यौहार सभी लोग साथ में मनाते हैं जिससे सामाजिक एकता का पर्व भी कहा जाता है। उन्होने लोहड़ी के साथ मकर संक्रान्ति की भी सभी बच्चों को बधाई दी। बच्चों ने इस पर्व को खुशियों से मनाते हुए छात्रा निशिका सोनी, प्रेरणा मिश्रा, दिव्यांश ने इस त्यौहार के बारे बताया तथा छात्रा वंशिका, अदिति, उन्नति व कशिश ने नृत्य प्रस्तुत किया। विद्यालय की उप प्रधानाचार्या निधि सिंह ने बताया कि पोंगल अर्थात लोहड़ी का पर्व पंजाब में ही नहीं अपितु पूरे देश में एक साथ मनाया जाता है। इस त्यौहार में आग जलाकर सभी लोग एक साथ नृत्य करते हैं तथा सभी एक-दूसरे को पर्व की शुभकामनाएं देते हैं। सरोज गुप्ता ने सभी धर्मो को एक साथ मिल जुलकर रहने व एक होने की बात कहते हुए कहा कि जब हम सब एक हैं तो हमारे त्यौहार अलग कैसे होंगे। मनाने का ढंग अलग हो सकता है, लेकिन सभी का उद्देश्य मिल जुलकर रहने का होता है।

विद्यालय की सलाहकार समिति के सदस्य व पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष राजकुमार राज ने मकर संक्रान्ति के एक दिन पूर्व मनाये जाने वाले उत्तर भारत के बडे़ पर्व लोहड़ी की सभी को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आज ही के दिन भगवान शिव की अर्धांगिनी माता सती ने अपने प्राण त्याग दिये थे। डा. जगदीश चंसौरिया ने कहा कि यह पर्व भाईचारे का पर्व है हमारा भारत सभी प्रांतो का एक संघ है, जो कोई भी त्यौहार पूरे देश का त्यौहार होता है। अंत मंे विद्यालय के प्रबन्धक संत कुमार गुप्ता ने सुन्दरी और मुन्दरी की कहानी सुनाते हुए कहा कि इन दोनो कन्याओं के पिता नहीं थे। इन दोनो को इनके चाचा जबरजस्ती किसी को देना चाहते थे। लेकिन तभी दुल्ला भट्टी इन दोनो को जंगल की ओर ले गये और उन दोनो की शादी करवा दी तथा जो कुछ भी उनके पास था, उन्हें दान देकर विदा कर दिया। कार्यक्रम में अंत में उन्होने सभी का आभार व्यक्त किया। आये हुए अतिथियों को स्मृति चिन्ह एवं पौधे भेंटकर उन्हें त्यौहार की शुभकामनाएं दीं। सभी बच्चों व शिक्षक-शिक्षिकाओं को भी एक-एक पौधा देकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।


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