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Tuesday, January 12, 2021

भगवान का सबसे उत्तम स्थल है चित्रकूट: जगदगुरुजगदगुरु से आर्शीवाद लेते प्रभारी मंत्री।

नौ दिवसीय श्रीराम कथा का हुआ शुभारंभ

कैबिनेट मंत्री समेत प्रसिद्ध हास्य कवि ने लिया आर्शीवाद

चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरि। भगवान कामतानाथ जी के तलहटी में आयोजित श्रीराम कथा के कथा ब्यास पद्म विभूषण जगदगुरु रामभद्राचार्य महाराज व उत्तराधिकारी आचार्य रामचंद्र दास, मुख्य अतिथि प्रसिद्ध हास्य कवि पदमश्री सुनील जोगी, विशिष्ट अतिथि कैबिनेट मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी, यजमान नीलेश मोहता, धर्मपत्नी प्रीति मोहता, कुलपति प्रो योगेश चन्द्र दुबे, कुलसचिव डा महेंद्र कुमार उपाध्याय, वित्त अधिकारी आरपी मिश्रा, चित्रकूट एसडीओपी अभिनव, विधालय की प्राचार्या निर्मला वैष्णव ने मां सरस्वती प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्जवलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। तुलसीपीठ मंदिर से निर्मला वैष्णव के संयोजन मे 108 महिलाओं ने सिर पर कलश रख कथा स्थल पहुंची। इस अवसर पर हास्य कवि सुनील जोगी ने अपना हास्य कविता पाठ मे भगवान कामतानाथ व भगवान श्रीराम के साथ माता सीता के वनवास काल का रोचक वणन किया। विशिष्ट अतिथि कबीना मंत्री नन्द गोपाल गुप्ता ने कहा कि जगदगुरु के दर्शन करना सौभाग्य की बात है। एशिया का एकमात्र दिव्यांग विश्वविद्यालय खोलकर देश.भर के दिव्यांग के लिए शिक्षा की मिशाल कायम की है। 216 ग्रंथों की रचना की है जो सामान्य आदमी के वश की बात नहीं है। 

जगदगुरु से आर्शीवाद लेते प्रभारी मंत्री।

जगदगुरु रामभद्राचार्य ने बताया कि 72वे जन्मदिन के उपलक्ष्य में आयोजित श्रीराम कथा के ऋंखला मे 1289वी रामकथा के पहले दिवस पर भगवान कामतानाथ की तलहटी मे कथा विषय में कामदगिरि भे राम प्रसादा, अवलोकत अपहरत विषादा पर नौ दिन तक श्रीराम कथा का अवगाहन कराएंगे। कहा कि कामतानाथ जी एक पहाड़ हैं। मतलब एक पर्वत हैं। सभी एक पहाड पर भगवान की पुजा करते हैं। चित्रकूट में किसी न किसी आदमी को भगवान के दर्शन अवश्य होते है। भारत में चित्रकूट एक ऐसा रमणीय सथल हैं जो विश्व में ऐसा नहीं है। यहां भजन भी करते हैं और भगवान की परिक्रमा भी करते हैं। सबसे उत्तम स्थल भगवान की है। यहां पर भगवान शिव मंदिर जो भत्तगजेद्रनाथ के नाम से प्रसिद्ध है जो चित्रकूट के राजा हैं। बताया कि सबके जीवन में तीन दशाए होती हैं। पहला प्रसाद, दुसरा विषाद तथा तीसरा अवसाद होती हैं। मन मे जब प्रसन्नता होती हैं तो समाधान है, जब कोई समस्याओ का समाधान नहीं मिलता है तब आदमी अवसाद मे चला जाता है। असफल होने पर विषाद होता है। इस दौरान कथा पंाण्डाल श्रोताओं से भरा रहा। इस आशय की जानकारी विश्व विद्यालय के  पीआरओ एसपी मिश्रा ने दी है।


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