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Saturday, January 2, 2021

एक अदद ट्राइकिल के लिये दस वर्षों से चक्कर लगा रहा दिव्यांग प्रदीप

हाथों के बल चलने वाले की स्थिति से भी नहीं पसीजा विभाग

मांग पूरी करने में असर्मथ रहा दिव्यांग तो कर्मचारी आवदेन कर देते खारिज

फतेहपुर, शमशाद खान । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व प्रदेश की योगी सरकार दिव्यांगों के लिये बेहद चिंतित और उनके विकास के लिये अनेक योजनाओं को संचालित कर लाभान्वित कराने के कार्य में लगी हुई हैं। वहीं दिव्यांगों के लिये कार्य करने वाला दिव्यांग कल्याण विभाग ही उनके लिये उदासीन व महत्वहीन होता जा रहा है। जहां के कर्मियों को दिव्यांगों की समस्या से कोई सरोकार नहीं रह गया है। विभाग को एक गरीब लाचार दिव्यांग की स्थिति को देखकर न तो दया भाव नजर आता है न ही उसकी समस्या को हल करने में किसी तरह की सहानुभूति दिखाई देती है। नतीजा यह है कि एक अदद ट्राइसाइकिल के लिये हाथों के बल चलने वाला दिव्यांग सत्तर किलोमीटर की दूरी तय कर विकलांग कल्याण कार्यालय का चक्कर लगाने को मजबूर है। 

दिव्यांग प्रदीप यादव।

धाता ब्लाक के सैदपुर दमपुर निवासी प्रदीप यादव 90 फीसदी दिव्यांग है। जन्म के समय से ही दोनों पैरों से दिव्यांग हाथों के सहारे ही चप्पल के बल पर जमीन पर किसी तरह घिसटता हुआ विकास भवन स्थित विकलांग कल्याण कार्यालय के पिछले दस वर्ष से एक ट्राई साइकिल के लिये चक्कर काट रहा है। प्रदीप यादव का दिव्यांग प्रमाण पत्र तो 90 फीसद का बना हुआ है लेकिन सरकार द्वारा दी का रही सुविधाएं उससे इतनी ही दूर है। बार बार विकास भवन स्थित जिला दिव्यांग कल्याण कार्यालय के चक्कर लगाने के बाद भी अब तक किसी कर्मचारी या किसी अफसर की नजरे इनायत नहीं हुई। प्रदीप की माने तो उसका दिव्यांग प्रमाण पत्र 90 प्रतिशत का बना होने के बाद भी आज तक उसे किसी भी तरह की सरकारी सहायता नही मिल सकी। तीन भाइयों के होते हुए भी उसे अकेले ही ननिहाल में जीवन बसर करना पड़ रहा है। बार-बार आवदेन के बाद भी प्रधानमंत्री आवास योजना में उसका नाम शामिल नहीं हो सका। मामूली छप्पर डालकर किसी तरह गुजर बसर करने और गांव मे ही पंचर की दुकान खोलकर किसी तरह गुजारा करने को विवश है। बताया कि दस बारह वर्ष से लागतार बार-बार आवदेन करने के बाद भी उसे विभाग द्वारा ट्राई साइकिल नहीं मिल सकी। कई बार अफसरों के दरवाजे पर भी दस्तक देने के बाद भी उसकी कहीं सुनवाई नहीं की गयी। ट्राई साइकिल की आस में गांव से सत्तर किलोमीटर हाथों के बल चलकर आ रहा है। बार-बार विकलांग कल्याण कार्यालय के चक्कर लगाने के बाद कर्मचारियों के पैसों की मांग पूरी न कर सकने में असमर्थ रहने पर बार-बार उससे नये सिरे से आवेदन करने को कहा जाता है। बताया कि बारह दिसम्बर को भी उसने नये सिरे से आवेदन किया था। जिसके बाद दिव्यांग कार्यालय के लगातार चक्कर काट रहा है। दिव्यांग प्रदीप ने बताया कि वह जिलाधिकारी से मिलकर दिव्यांग कार्यालय में उसके साथ किये जा रहे भेदभाव व प्रताड़ित करने की शिकायत कर न्याय की गुहार लगाएगा।


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