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Sunday, January 17, 2021

भारत अमेरिका संबंध....................

देवेश प्रताप सिंह राठौर 

( वरिष्ठ पत्रकार )

........भारत और अमेरिका के संबंध में कुछ जानकारी आप के समक्ष रख रहा हूं,अमेरिका संबंध आर्टिकल के माध्यम से आप यह जानेंगे भारत और अमेरिका के संबंध शुरू से लेकर आज तक किस तरह उन में उतार-चढ़ाव आए कौन सी परिस्थितियां जिम्मेदार रही भारत और अमेरिका के बीच सहयोग और टकराव के क्या कारण रहे जैसे प्रश्नों के जवाब आप इस आर्टिकल के माध्यम से जान पाएंगे हो सकता है कुछ तथ्यात्मक जानकारी उपलब्ध ना हो परंतु यह आर्टिकल पढ़ने के बाद आपकी समझ उस स्तर पर पहुंच जाएगी कि आप भारत और अमेरिका के मध्य संबंधों बदलते परिपेक्ष्य तथा विश्व राजनीति में इनके असर को भलीभांति भारत और अमेरिका में समानता ओं की बात करें तो दोनों देश बड़े लोकतांत्रिक देश हैं दोनों ही देश पर निरपेक्षता पर बल देते हैं यहां व्यक्ति की स्वतंत्रता तथा प्रेस की स्वतंत्रता कानून का शासन इत्यादि वे कारक हैं जो दोनों देशों में लगभग समान है.भारतीय विदेश नीति के जनक प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू माने जाते हैं जब देश स्वतंत्र हुआ तब विश्व दो प्रतिस्पर्धी गुटों के द्वारा शीत युद्ध की आगोश में था।शीतयुद्ध प्रत्यक्ष संघर्ष ना होकर विचारों की लड़ाई थी जिसमें अमेरिका ने सोवियत संघ के प्रभाव को रोकने के लिए जहां सैनिक संगठन के रूप में नाटो की स्थापना की वही आर्थिक रूप से पश्चिमी यूरोप के देशों को अपने पक्ष में लाने के लिए मार्शल योजना की नीति का अनुसरण किया,इस प्रारंभिक दौर में भारत और अमेरिका के संबंध ट ज्यादा मजबूत नहीं रहे  इसके कई कारण थे जिनमें प्रमुख कारण भारत द्वारा गुटनिरपेक्ष आंदोलन का नेतृत्व करना भारत ने 1949 ईस्वी में साम्यवादी  चीन को मान्यता दी जो अमेरिका विरोधी रुक माना जाता है।


अमेरिका दक्षिण एशिया में एक ऐसे मित्र की तलाश में था जो उसके लिए सैनिक अड्डे बनाने के लिए भूभाग प्रदान करें तथा सभी पक्षों पर उसके साथ खड़ा रहे उसी तलाश में अमेरिका ने 1954 में पाकिस्तान को  सेंटो और सीटो जैसी संधियों में शामिल किया और पाकिस्तान को हथियार आर्थिक सहायता प्रदान की जिनका प्रयोग पाकिस्तान भारत के विरुद्ध करता रहा जिसके कारण भारत और अमेरिका के संबंधों में कड़वाहट आई,भारत और अमेरिका के बीच संबंध मजबूत  होने का दौर चीन के युद्ध 1962 से हुआ चीन सोवियत संघ का सदस्य था और उसने जब भारत पर आक्रमण किया तो अमेरिका ने इस युद्ध में भारत का साथ दिया लेकिन यह संबंध ज्यादा दिनों तक स्थाई नहीं रह सके क्योंकि 1965 तथा 1971 में पाकिस्तान के साथ लड़े गए युद्ध में अमेरिका ने पाकिस्तान का खुलकर साथ दिया जिसके कारण भारत को मजबूर होकर रूस के साथ 20 वर्षीय मैत्री संधि करनी पड़ी जिसके कारण भारत और अमेरिका की दूरियां और अधिक बढ़ गई इसके तुरंत ही बाद भारत ने 1974 में अपना पहला परमाणु परीक्षण किया जिसके बाद अमेरिका ने भारत पर कई तरह के प्रतिबंध लगा दिए,अमेरिका की नाराजगी का एक और कारण भारत अफगानिस्तान के मुद्दे पर सोवियत संघ का विरोध ना करना भी था दरअसल  1979 में जब अफगानिस्तान में सोवियत संघ ने हस्तक्षेप किया तब भारत ने सोवियत संघ के विरुद्ध आवाज नहीं उठाई अमेरिका का आरोप था कि जब अमेरिका इस तरह किसी देश में हस्तक्षेप करता है तो भारत विश्व के मंचों पर इसका विरोध करता है लेकिन आज वही भारत ने चुप्पी साध रखी है,शीत युद्ध के अंतिम दौर में भारत ने अपनी विदेश नीति में परिवर्तन करने की ओर कदम बढ़ाएं क्योंकि भारतीय अर्थव्यवस्था चरमरा गई थी  इसी दौर में भारत ने अपनी विदेश रक्षा स्वास्थ्य आर्थिक शिक्षा इत्यादि की नवीन नीतियां लागू करने पर बल दिया भारत ने अपने बाजार को विश्व के लिए खोलने की ओर कदम बढ़ाएं जिसको 1990 तक आते-आते पूर्ण कर लिया इसे वैश्वीकरण उदारीकरण के नाम से जाना जाता है.वैश्वीकरण की प्रक्रिया के बाद भारत एक बड़े बाजार के रूप में उभरा लेकिन उस समय अमेरिका भी विश्व की एकमात्र विश्व शक्ति के रूप में स्थापित हो चुका था और वह भारत विरोधी गतिविधियां अपनाए हुए था जिसका कारण भारत का परमाणु मिसाइल कार्यक्रम तथा भारत द्वारा परमाणु नियंत्रण संधि पर हस्ताक्षर नहीं करना बताएं जाते हैं इसी दौर में अमेरिका ने पाकिस्तान के साथ संबंधों को मजबूती दी चाहे वह  सैन्य क्षेत्र में हो या आर्थिक क्षेत्र में.वैश्वीकरण के बाद भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में मजबूती से अर्थव्यवस्था ने अपने पैर जमाने शुरू किए 2001 में  आतंकवादी घटना के बाद अमेरिका बोखला गया तथा उसे पाकिस्तान के साथ मजबूत संबंध रखने  उसे आर्थिक सहायता देने के मायने समझ में आए तथा अब अमेरिका को एशिया में ऐसे देश की तलाश थी जो आतंकवाद का विरोध करता हो आर्थिक रूप से चीन को टक्कर दे सकने में समर्थ हो तथा एक बड़ा बाजार जो अमेरिकी उत्पादों के निर्यात में सहायक हो और इन सब अमेरिकी आवश्यकताएं  भारत पूरी कर सकता था जिसके कारण अमेरिका ने रिश्तो का नया दौर शुरू करने की ओर कदम बढ़ाएं जिसका भारत ने स्वागत किया वही 1990 से 2000 तक भारत अपनी आंतरिक समस्याओं से  अस्थिरता से आंतरिक मुद्दों  तक ही सीमित रहा वैश्विक हस्तक्षेप कम ही रहा.इस प्रकार भारत अमेरिका संबंधों का नेहरू युग इंदिरा युग तथा उसके बाद वैश्वीकरण का दौर मे संबंध ज्यादा स्थाई या मधुर नहीं रहे.भारत अमेरिका संबंधों का नया दौर 2000 के बाद से शुरू हुआ जहां भारत एक बड़े बाजार के रूप में उभर कर सामने आया तो दूसरी तरफ भारत अपने राजनीतिक आर्थिक और कूटनीतिक स्तर पर व्यापक सुधार करके एक बड़ी महाशक्ति की ओर अग्रसर हुआ इस दौर में अमेरिका का सबसे बड़ा प्रतिस्पर्धी चीन बना जिसको भारत न केवल कड़ी टक्कर दे सकता था बल्कि अमेरिका अपने हितों को भारत के माध्यम से संपूर्ण विश्व में पूरा कर सकता था जिसके कारण अमेरिका ने भारत की ओर अपने कदम तेजी के साथ बढ़ाएं इसी दौर में आतंकवाद एक बड़ा मुद्दा बना जिसके चलते भारत और अमेरिका के बीच 2008 में रक्षा समझौते हुए इसी वर्ष भारत और अमेरिका के मध्य व्यापारिक समझौते भी संपन्न हुए और भारत अमेरिका के संबंध अब तक के सबसे सर्वोच्च स्तर पर थे 2008 नहीं अमेरिका ने भारत पर लगाए हुए प्रतिबंध हटा दिए जिसके बाद भारत परमाणु ईंधन अमेरिका से खरीद सकता था 2010 में ऊर्जा संसाधन के क्षेत्र में भी समझौते हुए 2013 में आतंकवाद की रोकथाम और अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में दोनों देशों के मध्य कई समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए,2014 में भारत में प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में सरकार बनी जो पूर्ण रूप से राष्ट्रवाद पर बल देते हैं  तथा बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत और अमेरिका के मध्य कई टकराव के बिंदु भी उभर कर सामने आए,वर्तमान में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने चुनावी प्रचार में यह घोषणा की कि यदि राष्ट्रपति निर्वाचित होकर आते हैं तो वीजा को समाप्त कर देंगे यह एक खास प्रकार का वीजा है जिसमें वीजा धारक को  6 साल के लिए अमेरिका में ऐसे काम करने की अनुमति मिल जाती है जिसकी योग्यता अमेरिकी कंपनियों के पास लगभग नहीं होती एक रिपोर्ट के अनुसार इस वीजा के तहत तीन लाख भारतीय अमेरिका में वर्तमान में कार्यरत है।डोनाल्ड ट्रम एवं अमरीका के राष्ट्रपति हैं भारत के संबंध सभी से बेहतर रहे हैं भारत विश्व में हर किसी से अपने संबंध को बेहतर रखने का प्रयास करता है और आज की सरकार द्वारा संबंध अच्छे विश्लेषण से बहुत ही दृढ़ संकल्प के साथ बने हैं।

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