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Sunday, January 17, 2021

जीवात्मा के कर्मो का फल नहीं भोगते भगवान: जगदगुरु

चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरि। भगवान कामदगिरी की तहलटी मे आयोजित श्रीराम कथा के छठवें दिवस जगदगुरु रामभद्राचार्य ने श्रोताओं को कथा रसपान कराते हुए कहा कि बाल ब्रम्हचारी हनुमानजी सभी कथाओं के साक्षी बनें हैं। हजारों, करोड़ों जीवों का तप होता हैं तब राम कथा मिलती हैं। जब शंकर जी को भगवान ने कामद बना दिया था तो कामद की सेवा में मत्तगजेंद्रनाथ हैं। वे कामदगिरी स्वंय हो गए हैं। हमेशा रक्षा करते थे। उन्हेोंने बताया कि भगवान बालक को बहुत मानते हैं। कहा कि आज के छात्रों से पठन पाठन मे  संतोष नहीं होता है। वह प्रतिदिन मानस की एक चैपाई भगवान को सुनाकर कर अन्न जल ग्रहण करते हैं। गुरू की भावनाओं से सेवा करना चाहिए। जगदगुरु ने परमात्मा और जीवात्मा की चर्चा करते हुए कहा कि भगवान परमात्मा है। सभी जीव जीवात्मा हैं। परमात्मा और जीवात्मा दोनों एक पक्षी के रूप है। यह शरीर एक वृक्ष के समान है। इस पर अनादिकाल से दोनों चिपके हुये हैं। एक

कथा पाण्डाल में मौजूद श्रोतागण।

पक्षी का आशय है कि परमात्मा और दुसरे पक्षी का आशय.है जीवात्मा। जीवात्मा इस संसार का संपूर्ण भोग करता है। मेरा तेरा इसी बीच में लगा रहता है, लेकिन परमात्मा ऐसा नहीं है। जीवात्मा के कर्मोँ का फल भगवान नहीं भोगते। इसी प्रकार जीवात्मा के परमात्मा मित्र हैं। कार्यक्रम मे मुख्य अतिथि पीठाधीश्वर खजुरीताल रामानंदाचार्य स्वामी श्रीरामललाचार्य महाराज ने जगदगुरु को माला पहनाकर स्वागत किया। इस मौके पर युवराज आचार्य रामचन्द्र दास, कथा के मुख्य  यजमान नीलेश मोहता, धर्मपत्नी प्रीति मोहता, प्रो योगेश चंद्र दुबे, आरपी मिश्रा, एनबी गोयल, मनोज पांडेय, एसपी मिश्रा, विधालय की प्राचार्या निर्मला वैष्णव, राजीव नयन लूथरा दिल्ली, वासुदेव अग्रवाल, नन्द किशोर पांडेय, प्रेम शंकर पांडेय, राजेंद्र त्रिपाठी, दिनेश दिवेदी, हरभूषण तिवारी, शिवदत्त मिश्रा, रामेश्वर मिश्रा आदि श्रोतागण मौजूद रहे।

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