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Tuesday, January 12, 2021

किसान आंदोलन में मोदी विरोधी संगठन.................

देवेश प्रताप सिंह राठौर 

(वरिष्ठ पत्रकार)

.................. आपको बताना चाहते हैं जो किसान आंदोलन चल रहा है इस पर आंदोलन में मुख्य रूप से वह लोग हैं और वह सारी पार्टी एकजुट हो गई हैं जो नरेंद्र मोदी के घोर विरोधी हैं। क्योंकि किसान आंदोलन के नाम पर जिस तरह से जो नेता लोग जो अलगाववादी नेता और जिस तरह से जम्मू कश्मीर में धारा 370 को हटाने की बात किसान आंदोलन में हो रही थी तथा तख्ती पर कन्हैया कुमार उमर खालिद और जम्मू कश्मीर के अलगाववादी नेताओं की तख्ती लिए बैठे किसान को यह नहीं मालूम यह तख्ती किसकी हैं। इस तरह देश विरोधी ताकते हैं। साथ में विपक्ष का बहुत बड़ा दल पूर्ण रूप से किसानों को भड़काने में लगा है क्योंकि सबको पता है कि मोदी है तो सब मुमकिन है। मोदी को नीचा दिखाने के लिए किसान आंदोलन जो चल रहा है जो उस बिल में कमियां हो उसे सरकार को बताएं और उसे सरकार समझे और सुधारें यह बात तो समझ में आती है परंतु यह कहा जाए कि किसान बिल वापस से ही हम वापस होंगे यह महेंद्र सिंह के पुत्र राकेश सिंह टिकैत कहते हैं बिल वापस तो हम वापस राकेश टिकैत को अभी पूर्ण रुप से किसान बिल के बारे में नहीं समझ सके सिर्फ उन्हें एक पहलू दिखाई दे रहा है दूसरे पहलू पर नजर नहीं डाल रहे हैं मुझे लगता है किसान बिल पर इस तरह की अर्चना फैलाने वाले और सुप्रीम कोर्ट में जिस तरह से जाकर अपना वर्चस्व दिखा रहे हैं इससे स्पष्ट होता है इस बिल में कोई देश का विपक्ष एवं टुकड़े टुकड़े गैंग पूर्ण रूप से इस किसान आंदोलन में मिक्स हो गए हैं क्या आपको लगता है जिस तरह किसान आंदोलन कर रहे हैं किसान जिस तरह से लोग बैठे हैं जिस तरह से ऐसो आराम सुख-सुविधाओं से सुसजित है, मुझे


नहीं लगता यह लोग की शान है यह सारे व्यापारी है और आ डतिया है।क्योंकि जिस तरह के वहां के हालात है और जिस तरह से इन लोगों ने अपना टाइमिंग सेट करके लोग बैठे हुए हैं मुझे लगता है यह लंबा  खींचने के चक्कर में है किसान लोग जो नहीं है आर्डर दिया है क्योंकि हर गांव में छोटे छोटे किसान होते हैं तो गांव में रतिया सस्ते मध्य दामों में खरीदकर बाजार में अच्छे दामों में उस किसान की सामग्री को भेजते हैं आपको बताना चाहते हैं जो आलू खेत से चलता है ₹3 किलो वह हम बाजार में लेते हैं 20 या ₹25 किलो इससे अनुमान लगा लीजिए मंडी में जाइए किसान का सामान कितना सस्ता भेजते हैं और शहर वाले ऑर्डर दिया और दुकानदार उसी सब्जियों को तिग्ने चौक ने दामों पर बेचते हैं। यह मैं देखता हूं और मैंने देखा है इसलिए मैं स्पष्ट तौर पर कह सकता हूं किसान इतना हाल दोनों नहीं कर सकता है क्योंकि उसे अपनी रोजी-रोटी और खेती का भी ध्यान रखना है इस समय गेहूं की फसल है और भी बहुत सारी फसलें हैं मुख्य गेहूं की फसल इस समय तैयार खड़ी है इसमें पानी लगाना है समय-समय पर इसका ध्यान रखना है तब क्यों पैदा होगा किसान 40या 45 दिन तक धरना प्रदर्शन देगा तो उसकी फसल जिससे उसको  इस्तेमाल करना है वह किसके हाथ फैला आएगा इन्हीं व्यापारियों आ डतियां से वह पैसा लेता है, इन्हीं आरोपियों को सस्ते दामों में अपनी फसल बेच देता है क्योंकि उसके ऊपर इन व्यापारियों इन अ डतिया का दबाव बना रहता है , जब किसान के पास पैसा कम हो जाता है तो इनसे अपना लेनदेन रखते हैं जिसके कारण वह उनके द्वारा कराए गए हर कार्य को मजबूर होकर उनके साथ चल देते हैं वही हाल आज किसान आंदोलन के रूप में  आडतियां व्यापारी बैठे हुए हैं।

लेखक के अपने विचार है

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