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Friday, January 15, 2021

मकर संक्रांति: कड़ाके की ठंड पर भारी पड़ी आस्था

हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने केन नदी में लगाई डुबकी 

केन नदी में स्नान के बाद किया खिचड़ी का दान 

नटबली के मंदिर में लगाई परिक्रमा, केन तट पर रहा मेले जैसा नजारा

बांदा, के एस दुबे । मकर संक्रांति के अवसर पर केन नदी के तट पर मेले जैसा नजारा देखने को मिला। श्रद्धालुओं ने केन नदी में डुबकी लगा कर स्नान किया और हैसियत के अनुसार दान दिया। हालांकि गुरुवार को सुबह 8.15 से संक्रांति व स्नान दान का शुभ मुहूर्त शुरू हो गया था। लेकिन दिन चढ़ने के साथ केन नदी में स्नान करने वालों की संख्या में इजाफा होता रहा। वहीं शहर के विभिन्न मंदिरों के बाहर लोगों ने गरीबों में खिचड़ी वितरित की और भगवान से आशीर्वाद मांगा। 

नटबली की समाधि पर बैठा पुजारी

गुरुवार की सुबह से ही केन नदी के किनारे लोगों की भीड़ जुटने लगी। देखते ही देखते केन नदी के विभिन्न घाटों में श्रद्धालुओं का मेला लग गया। जैसे जैसे दिन चढ़ता गया, केन के तट पर श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ती गई। लोगों ने केन की गोद में श्रद्धा की डुबकी लगाकर पुण्य लाभ अर्जित किया। महिलाओं, पुरुषों, बच्चों और बुजुर्गों ने जमकर मेला का लुत्फ उठाया और स्नान-दान करके पुण्य लाभ हासिल किया। मकर संक्रांति पर स्नान के बाद दान का विशेष महत्व के चलते लोगों ने केन नदी में स्नान के बाद पुरोहितों को खिचड़ी आिद का दान दिया। जबकि शहर के
केन किनारे भूरागढ दुर्ग पर लगा मेला

विभिन्न मंदिरों में भगवान को खिचड़ी अर्पित कर गरीबों में खिचड़ी बांटी और उन्हें वस्त्र आदि दान किए। इसके बाद लोगों ने अपने घरों में खिचड़ी खाकर त्योहार मनाया गया। इसके पहले बुधवार को लोगों ने घरों में पकवान बनाए और ईष्टमित्रों के साथ पकवान का स्वाद लेकर लोहड़ी (तेलईंयां) का पर्व मनाया। इधर, मकर संक्रांति के अवसर पर गुरुवार को केन नदी के तट पर श्रद्धालुओं की खासी भीड़ उमड़ी। श्रद्धालुओं ने जहां नदी में डुबकी लगाई, खिचड़ी दान की। इसके बाद शुरू हुआ केन तट पर मौज मस्ती का सिलसिला। तमाम लोग तो स्नान और दान के बाद केन नदी के किनारे ही टिफिन खोलकर भेजन करने में जुट गए, वहीं तमाम लोगों ने नौका विहार का
केन नदी में नौका विहार करते लोग

भी लुत्फ उठाया। इस बार केन नदी के किनारे नगर पालिका अध्यक्ष मोहन साहू की पहल पर महिलाओं के वस्त्र बदलने के लिए खास इंतजाम किए गए थे। नदी के तट पर कई जगह टेंट लगाकर महिलाओं के सुरक्षित वस्त्र बदलने की व्यवस्था की सभी ने जमकर सराहना की। केन के तट पर पूरे दिन मेले जैसा माहौल रहा। वहीं तट से कुछ दूरी पर स्थित भूरागढ़ दुर्ग में लगे मेले में श्रद्धालुओं की भीड़ जुटी। केन नदी के छुलछुलिया घाट से पैदल ही नदी पार करके लोगों ने मेले में पहुंचकर मौज मस्ती की। मेले और श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के चलते नदी से लेकर रेलवे पटरी तक पुलिस ने सुरक्षा का ख्याल रखा।

नटबली की मजार में माथा टेक मांगी मोहब्बत की लंबी उम्र

बांदा। मकर संक्रांति का पर्व गुरुवार को श्रद्धा एवं भक्ति के साथ मनाया गया। ऐतिहासिक कालिंजर और भूरागढ़ स्थित नटबली मंदिर में मेले का आयोजन हुआ। भूरागढ़ दुर्ग के नीचे केन नदी किनारे स्थित नटबली मंदिर के इर्दगिर्द मेले की धूम रही। प्रेमी जोड़ों ने नटबली की मजार पर माथा टेक कर मोहब्बत की लंबी उम्र की कामना की। इसे आशिकों का मेला भी कहते हैं। मेला देखने के लिए शहर समेत दूर दराज से लोग जुटे। लोगों ने प्राचीन

सुरक्षा के लिहाज से मेले में तैनात पुलिस बल

भूरागढ़ किला घूमकर आनंद उठाया। उधर मेले में भीड़ को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था चाक चैबंद रही। मटौंध व भूरागढ़ समेत आसपास थानों की फोर्स तैनात रही। युवा नटबली प्रेमी की कहानी से जुड़े इस मेले में हर वर्ष बड़ी संख्या में आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से लोग शरीक होते हैं। यहां दो मंदिर हैं। किवदंती है कि एक प्रेमी नटबली की और दूसरा मंदिर उसकी प्रेमिका किलेदार नोने अर्जुन सिंह की पुत्री का है। प्रेमी जोड़ों ने भी यहां हाजिरी दी।


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