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Monday, January 4, 2021

शासन प्रशासन की नाक के नीचे बागै नदी में हो रहा अवैध खनन

अवैध खनन से प्रदेश सरकार को राजस्व का लग रहा लंबा चूना

कमासिन(बांदा), के एस दुबे । नदिया सभी जीवो के लिए जीवनदायिनी है। दिनों दिन नदियों के बदलते स्वरूप से पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है। लगातार  हो रहे बालू खनन से नदियों का अस्तित्व ही खतरे में है। शासन की ओर से अवैध बालू खनन को रोकने के लिए की जा रही कवायदें नाकाफी साबित होती है। फर्श से अर्श तक पहुंच चुके बालू माफियायों की राजनीति से लेकर प्रशासनिक अमले में काफी मजबूत है। माफिया बालू खनन मे अपनी पकड़ मजबूत करने में सफल रहे है।

कमासिन क्षेत्र की बागै नदी जो कि लाल सोना के नाम से जानी जाती है जिस पर वर्षों से बालू खनन करने वाले माफियाओ का कब्जा है। नदी की तलहटी में भूमिधरी होने के साथ अबैध बालू खनन के काम में माफिया मशगूल है। यही माफिया पुलिस से सांठगांठ कर चोरी-छिपे हर वर्ष करोड़ों की बालू निकालकर राजस्व को लाखों की चपत लगाते आए हैं। बालू माफियाओं का विरोध करने वालों पर माफियाओं के इशारों पर पुलिस की फर्जी मुकदमों की कार्यवाही उनकी जुबाने बंद करने के लिए कई तरह की शामते खड़ी करती है। हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी बालू माफियाओं ने बागै नदी का सीना चीरना शुरू कर दिये है। रात दिन नदी का सीना छलनी हो रहा है।सफेदपोश धारियों के साथ खाकी वर्दी मिलकर अपने काली कमाई के मंसूबे पूरे करने में जुटी है। रात दिन बालू लदे ट्रैक्टरों की धमाचौकड़ी थाने की चौखट से दस्तक देकर गुजरती है। कानून के रखवाले के आंख में बधीं काली पट्टी से खाकी वर्दी के जिम्मेदार भी बेपरवाह है। नदियों में हो रहे अवैध बालू खनन से दिनों दिन नदियों का स्वरूप बिगड़ता जा रहा है। जाहिर है कि बालू खनन क्रिया की प्रतिक्रिया पर्यावरण के लिए एक चुनौती है।

बागै नदी में हमेशा से बालू खनन को लेकर माफियाओं के बीच एक होड़ सी रही है। वर्चस्व को लेकर बालू माफियाओं के बीच गोलीबारी की अक्सर घटनाएं होती रहती है। बालू घाटों से कितने ही क्षेत्रीय बालू माफिया अर्श से फर्श पर पहुंचकर अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करके आज प्रशासन को अपनी धनबल की उंगली में नचाने को मजबूर कर अब भी अवैध बालू कारोबार में फल फूल रहे हैं। इन लोगों का नेटवर्क सूचना तंत्र इतना मजबूत है कि जिला प्रशासन की रवानगी पूर्व सारी सूचनाएं माफियाओं को सतर्क करने के लिए काफी होती है। सूत्रों की माने तो खनिज विभाग में पर्याप्त लोग हैं जो माफियाओं से जुड़कर सूचनाओं का आदान प्रदान करते हैं। हालांकि प्रशासन द्वारा धर-पकड़ की कार्यवाही होती है। लेकिन अबैध बालू कारोबारियों पर इसका कोई असर नहीं पड़ता है। नदियों के बदलते स्वरूप पर पर्यावरण विभाग भी मौन साधना में है।

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