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Saturday, December 26, 2020

अपनों से जिद ठीक नहीं: आचार्य प्रमोद

बांदा, के एस दुबे । देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बेहद जिद्दी है लेकिन उन्हें अपनों से जिद नहीं करना चाहिए। उन्होंने सैकड़ों बार जनसभाओं में कहा है कि वह प्रधान सेवक हैं अगर सेवक हैं तो किसानों के मामले में उनकी जिद उचित नहीं है।यह बात कल्कि पीठ से पधारे आचार्य प्रमोद कृष्णम ने पूर्व सांसद स्व. रामनाथ दुबे के आवास पर पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहीं। 


उन्होंने पूछे गए सवाल के जवाब में कहा कि हलवाई हो या बजाज उन्हें अपनी मिठाई और कपड़े की कीमत तय करने का अधिकार है। होटल वाला खाने की थाली की कीमत भी निर्धारित करता है, लेकिन अपने खून पसीने से सींच कर जो किसान फसल उगाता है, उसके फसल की कीमत दूसरे लोग तय करते हैं। यह किसानों के साथ अन्याय है। 28 दिनों से दिल्ली के बार्डर पर ठंड में ठिठुरते हुए आंदोलन कर रहे किसान चाहते हैं कि उनकी फसल की लागत से न्यूनतम समर्थन मूल्य कम न हो। इसकी सरकार गारंटी दे और गारंटी का मतलब है इसके लिए कानून बनना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले दिनों में देश में रोजगार का संकट उत्पन्न होने वाला है। निजीकरण के कारण रोजगार समाप्त हो रहे हैं, लोगों की बुनियादी जरूरतें रोटी, कपड़ा, मकान और रोजगार नहीं होगा तो लोग कैसे जीवन यापन कर पाएंगे।

उन्होंने बांदा को ऐतिहासिक व धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण बताया। लेकिन अफसोस व्यक्त किया कि सत्ता पक्ष के विधायकों के बाद भी न तो यहां विकास दिखाई दे रहा है और न साफ सफाई नजर आ रहे हैं। आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कहा कि जो जनप्रतिनिधि अच्छा काम न करें उसे जनता को हटा देना चाहिए। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि भाजपा के नेता दिग्भ्रमित हो गए हैं। वह देश की जनता को मूर्ख समझ रहे हैं। विपक्ष में कोई विकल्प न होने से अहंकार में डूबे नजर आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि शनिवार सवेरे यहां के प्रसिद्ध बामदेवेश्वर मंदिर में पूजा अर्चना के दौरान भोले बाबा से प्रार्थना की है कि देश के प्रधानमंत्री को सद्बुद्धि दें, जिससे ठंड में ठिठुर रहे किसानों को न्याय मिल सके। प्रेस वार्ता में गीता संस्थान समिति के कार्यकारी अध्यक्ष अध्यक्ष प्रदुम्न कुमार लालू दुबे, राजेश दुबे एडवोकेट मौजूद थे। प्रेस कांफ्रेंस के बाद आचार्य प्रमोद कृष्णन विंध्यवासिनी देवी के दर्शन करने गिरवा क्षेत्र के शेरपुर ग्राम पहुंचे। वहां उन्होंने विंध्यवासिनी देवी के दर्शन किए और उसके बाद स्योढ़ा जाकर वरिष्ठ कांग्रेसी नेता स्वयंप्रकाश गोस्वामी से मुलाकात की। इसके बाद वह वापस दिल्ली के लिए प्रस्थान कर गए।


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