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Saturday, December 12, 2020

अपने ही देश में श्री राम कहने में झिझक क्यों.............

देवेश प्रताप सिंह राठौर 

(वरिष्ठ पत्रकार)

............ इस भारत देश में जब भारत देश आजाद हुआ तो पाकिस्तान के तौर पर मुसलमानों के लिए दिया गया जिन्ना द्वारा मांगा गया और उन्हें पाकिस्तान दिया गया हिंदुस्तान में जो हिंदू थे उनके लिए हिंदुस्तान बनाया गया और जो लोग पहले से यहां मुसलमान रह रहे थे वह पाकिस्तान नहीं गए उनको भी सम्मान के साथ भारत की नागरिकता प्रदान करते हुए रखा गया वहीं पर पाकिस्तान ने आजादी के बाद 26 परसेंट अल्पसंख्यक हिंदू थे जिन्हें पाकिस्तान ने वहां के लोगों को मार काट कर महिलाओं की इज्जत लूटी गई बेटियों की इज्जत लूटी गई हत्या कर दी गई धर्म बदलने के लिए उकसाया गया और जिसने धर्म नहीं बदला उसे मौत के घाट उतार दिया गया जबरदस्ती हिंदू लड़कियों के साथ पाकिस्तान द्वारा जबरदस्ती शादियां करा दी जाती थी। यह हाल है पाकिस्तान का आज पाकिस्तान में मात्र डेढ़ परसेंट हिंदू बचा है तो 1:30 पर्सेंट हिंदू बचा है वह बक्से में भगवान की फोटो रखकर पूजा करता है और बक्सा बंद कर देता है पाकिस्तान के लोगों को पता ना चले कि मैं आजादी के बाद इस देश में पाकिस्तान में आया था अब मैं अगर हिंदू बनकर रहता हूं पूजा पाठ करता हूं तो मेरा वही हस्रा वही होगा जो पाकिस्तानियों ने हिंदुओं को किया। हम भारत में हर जात का सम्मान किया जाता है और हम हर धर्म का सम्मान करते हैं परंतु जब देखने को मिलता है ।किसी विभाग में किसी कार्यालय में 1 या2 दो या 4 अल्पसंख्यक हैं, अन्य जातियां ज्यादा है वहां पर हम उनका सम्मान करते हुए बहुत से लोग राम राम श्री राम जय राम नहीं कह सकते क्योंकि उनको भारतीय जनता पार्टी का नुमाइंदा नजर आएगा और उनकी हर करतूत को उस ऑफिस का पूरा विभाग खूब आराम से उनकी अभद्र भाषा अभद्रता देश के प्रधानमंत्री पर प्रदेश के मुख्यमंत्री पर कटाक्ष अपशब्द कहते हैं कोई नहीं बोलता ना ही कोई राम राम करता है इतना डर जब हिंदुस्तान में हिंदू को एवं अन्य जातियों को


लगता है तो पाकिस्तान में क्या हाल होगा इससे आप तो ना कर सकते हैं । आप जब कोई व्यक्ति मृत्यु हो जाती है तब उसे श्मशान घाट ले जाया जाता है श्मशान घाट ले जाते समय एक ही आवाज निकलती है पूरे लोगों की राम नाम सत्य है फिर सब बोलते हैं राम नाम सत्य है जब मृत्यु के समय आप बोलते हुए गली से पूरा श्मशान घाट तक ले जाते हो तो राम नाम सत्य कहते हो जब राम का नाम सत्य है तो फिर हमें झिझक किस बात की राम राम कहने में क्यों कष्ट होता है क्यों दूसरे का मुंह देखते हो कि उसको बुरा लग जाएगा उन्होंने कभी सोचा कि हमारे विषय में कि हमको बुरा लगेगा कि नहीं लगेगा जो भी आते हैं बोल देते हो हम लोग से लेते हैं क्यों क्या कारण है इस विषय पर चिंतन करने की जरूरत है क्योंकि हम भारत देश हिंदुस्तान में राम-राम नहीं कहेंगे तो पाकिस्तान सऊदी अरब में राम-राम कहेंगे इराक दुबई में कहेंगे तुर्की में कहेंगे मिस्र में कहेंगे कहां जाएंगे आप और बताइए किसी के पास जवाब नहीं है यह जवाब जो अल्पसंख्यक नहीं है 100 करोड़ लोगों से पूछना चाहता तो क्या आप बहुत सारे अपने अपने धर्म को मानते हैं।हम सब के धर्म की इज्जत करते हैं हम रास्ते में मस्जिद मिल जाती वहां भी सर झुकाते हैं गुरुद्वारा मिल जाता है वहां भी सर झुकाते हैं गिरजाघर मिल जाता वहां भी सर झुकाते हैं और हमारा मंदिर मिल जाता है भाभी सर झुकाते हैं आप पर इंकार क्यों है आप भी तानाशाही इतिहास गवाह है मुगल शासकों ने जितने देश के मंदिर तोड़े हैं उतने किसी शासक ने अंग्रेज ने विराज किया है लेकिन धर्म का दुरुपयोग किसी जात का नहीं किया है मुगलों ने सबसे पहले मंदिर तोड़ जाते थे आज कश्मीर आजाद है। भारत के पास है धारा 370 हटाने के पहले वही काश्मीर नर्क बना हुआ था 15 सो मंदिर टुडे जा चुके हैं जिन्हें सर्वे कर रही है सरकार मंदिर को सुधारा जाएगा परंतु मेरा कहना यह है धर्म किसी का भी हो क्या उसको इस तरह तोड़कर उस जगह अपने धर्म की चीज को बनाना कहना उचित है मैं इसलिए बोल रहा हूं कि सत्य कड़वा होता है, लेकिन सत्य सत्य होता है आप जब मरते हैं तो राम नाम सत्य कहे जाते हैं तब राम नाम सत्य आपको दिखाई देता है और जिंदा में राम नाम का नाम लेने आपके लिए कठिनाई होती है। वक्त है हम आप सब इस विषय पर चिंतन करें और नहीं करेंगे तो वह दिन दूर नहीं 2035 तक भारत अल्पसंख्यक हम सब आप हो जाओगे इसलिए जागरूकता जरूरी है अपने धर्म को अपने सम्मान को अपने भगवान को नाम लेने में शक नहीं होनी चाहिए हम जय श्री राम करें राम राम करें जय सीता राम करें आप लोग उसका जवाब नहीं देते हैं रोड पर जवाब नहीं देते हैं क्यों इतना जीजा का है क्या इस पर बीजेपी का ही ठप्पा लगा है जय राम श्री रामपाल राम तो सबके हैं बीजेपी है तो नहीं कहती है किराम हमारे हैं उत्सव के राम है आप पूजा करिए आप राम-राम करिए तो इसका मर्थ होगी मतलब यह थोड़ी कि भारतीय जनता पार्टी के हम समर्थक है भगवान का नाम लेने से किसी कोई पार्टी का समर्थन नहीं हो जाता है इस तरह की धारणा रखना देश हित में अपने हित में तो बिल्कुल नहीं है समय पर जागने की जरूरत है ।नहीं जो पाकिस्तान में डेढ़ परसेंट हिंदू बचे हैं जय हिंद बौद्ध और जातियां सब मिलाकर इतनी बची है वही हाल हिंदुस्तान में हो जाएगा वह दिन दूर नहीं मुगल शासकों से हम लोगों को छुटकारा मिला है फिर कहीं मुगल शासक ना हो जाए और मुगल शासक हो गया दोस्तों तो आप सोच लो हमारा आपका क्या हाल करेंगे लोग इसका चिंतन करिए अपने इष्ट अपने भगवान को दबंगई के साथ बोलिए संकोच करने की जरूरत नहीं है हम राम भगवान को नहीं बोलेंगे तो क्या किसको हम बोल पाएंगे ईश्वर उसी का साथ देता है जो सत्य पर चलते हुए सत्य वचन बोले और अपनी बात सत्य के रूप में रख सके समाज को आईना दिखाने का काम करें यही एक धारणा होनी चाहिए सर्वजन हिताय सर्वजन सुखाय की भावना से कार्य करना चाहिए परंतु हम लोग तो इसका इस्तेमाल सही करते हैं पर अन्य जगह इस्तेमाल नहीं हो रहा है सिर्फ आज को रोना काल में लोगों के मुंह से निकलता करो ना और ना कुछ नहीं है जब वे पढ़े लिखे लोग को रोना को कहते हैं नरेंद्र मोदी और योगी जी की चाल है को रोना रोना कुछ है नहीं उन लोगों को हम क्या कह सकते हैं इतने दुश्मन है नरेंद्र मोदी जी के योगी जी के यह स्पष्ट तौर पर दिखाई देता है अच्छा कार्य करें या खराब कार्य करें सिर्फ उनका कार्य है विरोध करना और हमारे जो समाज के लोग हैं वह उनका सहयोग दे रहे हैं जब तख्तापलट ता है तो गेहूं के साथ घुन भी पिसता है यह कहावत कही गई है जुने संरक्षण दे रहे हैं वह भी नहीं बच पाएंगे जब पासा पलट जाता है ।

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