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Friday, December 18, 2020

किसान बिल पर प्रधानमंत्री ने कहा उसे समझे और हट छोडे.......................

देवेश प्रताप सिंह राठौर 

(वरिष्ठ पत्रकार)

...............    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने (किसान बिल) कृषि से जुड़े विधेयकों पर किसानों की चिंता दूर करने की कोशिश की, उन्होंने कहा कि इन विधेयकों ने हमारे अन्नदाता किसानों को अनेक बंधनों से छुटकारा दिलाया है। उन्हें आजाद किया है, मगर जिन्होंने दशकों तक देश पर राज किया है और सत्ता में रहे हैं, वे किसानों को दिग्भ्रमित कर रहे हैं. पीएम ने बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए 516 करोड़ की लागत से निर्मित कोसी महासेतु का उद्घाटन किया, इस दौरान पीएम मोदी ने कहा कि आज से 4 वर्ष पहले उत्तर और दक्षिण बिहार को जोड़ने वाले दो महासेतु एक पटना में और दूसरा मुंगेर में शुरू किए गए थे. इन दोनों रेल पुलों के चालू हो जाने से उत्तर बिहार और दक्षिण बिहार के बीच, लोगों का आना-जाना और आसान हुआ है। इस दौरान पीएम मोदी ने कई बातें कहीं आइए जानते हैं.पीएम मोदी ने कहा कि कल विश्वकर्मा जयंती के दिन, लोकसभा में ऐतिहासिक कृषि सुधार विधेयक पारित किए गए हैं, इन विधेयकों ने हमारे अन्नदाता किसानों को अनेक बंधनों से मुक्ति दिलाई है, उन्हें आजाद किया है,इन सुधारों से किसानों को अपनी उपज बेचने में और ज्यादा विकल्प मिलेंगे, और ज्यादा अवसर मिलेंगे, उन्होंने आगे कहा कि किसान और ग्राहक के बीच जो बिचौलिए होते हैं, जो किसानों की कमाई का बड़ा हिस्सा खुद ले लेते हैं, उनसे बचाने के लिए ये विधेयक लाए जाने बहुत आवश्यक थे, ये विधेयक किसानों के लिए रक्षा कवच बनकर आए हैं. लेकिन कुछ लोग जो दशकों तक सत्ता में रहे हैं, देश पर राज किया है, वो लोग किसानों को इस विषय पर भ्रमित करने की कोशिश कर रहे हैं, किसानों से झूठ बोल रहे हैं।प्रधानमंत्री ने कहा कि चुनाव के समय किसानों को लुभाने के लिए ये दल बड़ी-बड़ी बातें करते थे, लिखित में करते थे, अपने घोषणापत्र में डालते थे और चुनाव के बाद भूल जाते है. और आज जब वही चीजें एनडीए सरकार कर रही है, किसानों को समर्पित हमारी सरकार कर रही है, तो ये भांति-भांति के भ्रम फैला रहे हैं.उन्होंने कहा कि जिस एपीएमसी को लेकर अब ये लोग राजनीति कर रहे हैं, एग्रीकल्चर मार्केट के प्रावधानों में बदलाव का विरोध कर रहे हैं, उसी बदलाव की बात इन लोगों ने अपने घोषणापत्र में भी लिखी थी।लेकिन अब जब एनडीए सरकार ने ये बदलाव कर दिया है, तो ये लोग इसका विरोध करने पर उतर आए हैं. लेकिन ये लोग, ये भूल रहे हैं कि देश का किसान कितना जागृत है,वो ये देख रहा है कि कुछ लोगों को किसानों को मिल रहे नए अवसर पसंद नहीं आ रहे। देश का किसान ये देख रहा है कि वो कौन से लोग हैं, जो बिचौलियों के साथ खड़े हैं।


मोदी ने कहा कि अब ये दुष्प्रचार किया जा रहा है कि सरकार के द्वारा किसानों को एमएसपी का लाभ नहीं दिया जाएगा, ये भी मनगढ़ंत बातें कहीं जा रही हैं कि किसानों से धान-गेहूं इत्यादि की खरीद सरकार द्वारा नहीं की जाएगी,ये सरासर झूठ है, गलत है, किसानों को धोखा है, हमारी सरकार किसानों को एमएसपी एमएसपी के माध्यम से उचित मूल्य दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है, सरकारी खरीद भी पहले की तरह जारी रहेगी।......किसान बिल क्या है ........ बिल क्या है इसे जानने का प्रयास करें, क्योंकि कुछ देश विरोधी ताकते हैं और गुपकार गैंग और देश विरोधी ताकते हैं कृषि बिल के माध्यम से देश को नरेंद्र मोदी जी की सरकार को झुकाने के लिए इस तरह पंजाब और हरियाणा के लोग किसान बिल का विरोध कर रहे हैं क्योंकि यह किसान नहीं है यह बहुत बड़े बड़े व्यापारी हैं जिस तरह से दिल्ली के चारों तरफ गिरे हुए किसान बिल के रूप में देशद्रोही ताकते लगी है उससे वहां के जो माहौल में जिस तरह से सुविधाएं हैं मुझे लगता है ओसियन पार्टी के लोग भी वहां जाकर पिकनिक के लिए एक जगह सर्वजन सुख सुविधाओं से लैस किसान विल के रूप में मुझे लगता है यह बिल विरोधियों का लंबे समय तक चलेगा क्योंकि फंड की व्यवस्था देश विदेशों से भरपूर मात्रा में प्राप्त हो रही है। किसान बिल के खिलाफ किसानों का प्रदर्शन हो रहा है और इससे संबंधित तीनों कानूनों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जा चुकी है जिस पर अभी सुनवाई होनी है। लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा उस कानूनी प्रावधान को लेकर है जिसमें प्रावधान किया गया है कि मामले में सिविल कोर्ट जाने का प्रावधान नहीं है। इस मामले में हालांकि सरकार ने आश्वासन दिया है कि वह कोर्ट जाने का प्रावधान करने पर विचार कर रही है लेकिन फिलहाल जो कानून है उसमें कोर्ट का जूरिडिक्शन नहीं है और ये विवाद का बहुत बड़ा कारण बना है कानूनी जानकारों के मुताबिक कोर्ट जाने का अधिकार संवैधानिक अधिकार है।

कृषि बिल से संबंधित तीन कानून हैं। इनमें कृषक उपज ट्रेड और कॉमर्स (प्रोमोशन और सरलीकरण) क़ानून, 2020, कृषक (सशक्‍तिकरण व संरक्षण) कीमत आश्‍वासन और कृषि सेवा पर करार कानून 2020 और आवश्यक वस्तु (अमेंडमेंट) कानून 2020 है। इनमें कृषक उपज ट्रेड और कॉमर्स (प्रोमोशन और सरलीकरण) कानून, 2020 की धारा-13 को सबसे पहले देखना जरूरी है। इस धारा के तहत प्रावधान किया गया है कि केंद्र सरकार या उनके अधिकारी या फिर राज्य सरकार या फिर उनके किसी अधिकारी या किसी और के खिलाफ इस कानून के तहत बेहतर मंशा से की गई कार्रवाई के मामले में कोई भी शूट, मुकदमा और अन्य कानूनी कार्रवाई नहीं हो पाएगी। वहीं धारा-15 में प्रावधान किया गया है कि किसी भी सिविल कोर्ट का इस कानून के तहत जूडिरिडिक्शन नहीं होगा और इस कएक्ट के तहत जिस अथॉरिटी को अधिकृत किया जाएगा वही मामले में संज्ञान ले सकेगा। कानूनी जानकार बताते हैं कि इस मामले में एसडीएम और अडिशनल डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट के यहां अर्जी दाखिल किया जा सकेगा ,बार काउंसिल ऑफ दिल्ली के चेयरमैन रमेश गुप्ता ने बताया कि कानून में सिविल कोर्ट के जूरिडिक्शन को खत्म करना मुख्य परेशानी का सबब है और इसके लिए पीएम को बार काउंसिल ऑफ दिल्ली ने लेटर भी लिखा है कृषि कानून के तहत सिविल कोर्ट के जूरिडिक्शन को एसडीएम और एडीएम को सौंपा जा रहा है। कैसे सिविल कोर्ट के कार्यवाही के जूरिडिक्शन को एडमिनिस्ट्रेटिव एजेंसी को सौंपा जा सकता है। क्योंकि एडमिनिस्ट्रेटिव एजेंसी तो कार्यपालिका के कंट्रोल में होता है। संविधान का जो प्रावधान है उसके तहत जूडिशियरी को कार्यपालिका से अलग किया गया है। लेकिन इस कानून के तहत जो प्रावधान किया गया है वह संविधान के तहत मान्य नहीं है। इससे आम लोगों के हितों के साथ समझौता हो जाएा और ब्यूरोक्रेसी के सामने न्याय मिलना दूर की कौड़ी होगी।इस कानून पर सवाल उठाते हुए कहा गया कि ये नहीं भूलना चाहिए कि जूडिशियरी आम लोगों के अधिकार का रक्षक है। कार्यों के बंटवारे के साथ समझौता नहीं किया जा सकता है। वैसे सरकार ने इस मामले में प्रस्ताव दिया है कि सिविल कोर्ट जाने का विकल्प दिया जा सकता है। किसानों के विरोध के बीच जो बातचीत चल रही है उसी के तहत केंद्र सरकार ने प्रस्ताव दिया है कि विवाद के संदर्भ में जो माजूदा व्यवस्था की गई है उसके अतिरिक्त सिविल कोर्ट जाने का विकल्प दिया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट में कृषि कानून को चुनौती देने वाले एपी सिंह बताते हैं कि इस कानून ने सीपीसी के प्रावधान को ही इस कानून में निष्प्रभावी कर दिया गया। दरअसल जब जमीन विवाद या संपत्ति विवाद होता है तो सिविल प्रक्रिया की धारा यानी सीपीसी अप्लाई होता है और सिविल कोर्ट का जूरिडिक्शन बनता है लेकिन इस कानून में सिविल कोर्ट का दरवाजा ही बंद कर दिया गया है जो गैर संवैधानिक है।कोई भी कानून संविधान के प्रावधान से ऊपर नहीं हो सकता। कानून बनाकर कोर्ट का जूरिडिक्शन या विकल्प को खत्म नहीं किया जा सकता। इस मामले में कोर्ट का जूरिडिक्शन खत्म किया गया है। संविधान के तहत हर नागरिक को न्याय पाने का अधिकार है उससे कैसे वंचित किया जा सकता है। कोर्ट का अधिकार एसडीएम को नहीं दिया जा सकता क्योंकि एसडीएम न्यायिक अधिकारी नहीं बल्कि प्रशासनिक अधिकारी है। इस तरह से देखा जाए तो हर व्यक्ति को न्याय पाने का जो मौलिक अधिकार है उससे वंचित किया जा रहा है और ये संविधान के बेसिक स्ट्रक्चर के खिलाफ है।सुप्रीम कोर्ट के सीनियर एडवोकेट केटीएस तुलसी बताते हैं कि इस मामले में केंद्र सरकार ने जो कानून बनाया है उसमें कई ऐसे मुद्दे हैं जो संवैधानिक है। संविधान के तहत कृषि राज्य का विषय है और राज्य सरकार इस पर कानून बना सकती है। लेकिन इस मामले में केंद्र सरकार ने संसद के जरिये कानून बनाया जो सुप्रीम कोर्ट के सामने चुनौती का विषय हो सकता है क्योंकि ये संविधान के प्रावधान के खिलाफ है। कृषक उपज ट्रेड और कॉमर्स (प्रोमोशन और सरलीकरण) क़ानून, 2020 की धारा-13 व 15 आदि को देखने से साफ है कि न्यायिक जूरिडिक्शन को ही खत्म कर दिया गया है। कानून में सिविल कोर्ट का रास्ता बंद किया गया है लेकिन उसके विकल्प के तौर पर न तो ट्रिब्यूनल बनाया गया और न ही रिवेन्यू कोर्ट आदि का जूरिडिक्शन दिया गया। बल्कि कहा गया है कि एसडीएम या ए़़डीएम का जूरिडिक्शन होगा।

संविधान के बेसिक स्ट्रक्चर का पार्ट है कि हर व्यक्ति को न्याय पाने का अधिकार है उससे किसी को वंचित नहीं किया जा सकता। यहां जो कानून बनाया गया है उसमें सिविल कोर्ट का जूरिडिक्शन खत्म कर कोई वैकल्पिक ट्रिब्यूनल का ऑप्शन नहीं है और ये देखा जाए तो संविधान के तहत हर नागरिक को न्याय पाने का जो अधिकार है उससे वंचित करने जैसा है। वैसे ही कोई भी प्रावधान हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के रिट के अधिकार में दखल नहीं दे सकता। ये तमाम ऐसे मद्दे हैं जो संवैधानिक व्यवस्था में दखल जैसा है और सुप्रीम कोर्ट के सामने ये मसला उठना चाहिए और उठेगा क्योंकि सुप्रीम कोर्ट संविधान का गार्जियन होता है। आज किसानों को इस समय समझनेे की जरूरत है । किसान बिल अच्छा भिलाई देश में लगभग 28 राज्य उनमें सिर्फ 2 राज्यों के लोगोंं को परेशानी है। 26 राज्यों के किसानों को कोई परेशानी नहीं हैैै वहां कोई धरना प्रदर्शशन किसानों का नहीं चल रहा है। यह सब भी प्लानिंग सेेे किया जा रह है। इसमें देश के विपक्षी दल और विदेशीी ताकतों अवधेश के अंदर देश विरोधी ताकतों कााा बहुत बड़ा हाथ है।

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