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Monday, December 21, 2020

गुमराह न हों किसान, कृषि बिल हैं फायदेमंद: मंत्री

चौपाल लगा कृषकों को किया संतुष्ट

चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरि। किसान बिल के फायदे किसानों तक पहुंचाने के उद्देश्य से पीडब्ल्यूडी राज्य मंत्री ने तिरहार क्षेत्र के तीरधुमाई गंगू गांव में किसान चैपाल लगाई। किसानों को तीनों बिल से सन्तुष्ट किया।

राज्य मंत्री चन्द्रिका प्रसाद उपाध्याय ने किसानों के बीच चैपाल में बताया कि पंजाब, हरियाणा की राजनीति में तुष्टीकरण होने के चलते विपक्ष केन्द्र सरकार के तीनों बिलों को लेकर अफवाह फैलाकर देश के किसानों को गुमराह किया जा रहा है। जबकि कृषि तीनों बिलों में किसान अपने मन मुताबिक बाजार का चयन कर अपने उत्पाद को अच्छी कीमत में बेंच सकता है। इसी प्रकार लगभग एक वर्ष पहले सीएए जैसे कानून को लेकर लोगों को गुमराह कर शाहीनबाग में आन्दोलन कराया था। जब लोगों को सीएए के संदर्भ में जानकारी हुई तब लोगों ने

चौपाल में जानकारी देते राज्य मंत्री।

स्वतः केंद्र सरकार का समर्थन कर सीएए को अच्छा बताया। राज्य मंत्री ने बताया कि देश में किसान हितैषी सरकार लगभग 10 करोड़ किसानों को पीएम किसान सम्मान निधि जैसी योजना से सम्मानित किया गया है। प्रथम किसान बिल के विषय में बताते हुए कहा कि बिल में एक देश, एक बाजार को सम्मिलित किया गया है। किसान अपने उत्पाद को देश के किसी भी बाजार में बेंचने की छूट दी गई है और मण्डी शुल्कों से किसान को निजात देने का प्रावधान है। जिससे किसान अपने अनाज को अच्छे दामों में बेंचकर अपनी आय को दुगना कर सकते हैं। द्वितीय किसान बिल के संदर्भ में बताया कि जिस प्रकार से गाँवों में किसान अपने खेतों को बंटाई के तौर पर देते हैं। इस बिल में देश की बड़ी कम्पनियाँ किसानों के बीच आकर फसल, अनुबन्ध, खेती एक वर्ष के लिए अच्छे दामों पर लेंगी और फसल का अनुबंध होते ही कृषक के बैंक खाते में अनुबन्ध रुपए तुरन्त डाला जाएगा। तृतीय किसान बिल में बताया कि किसान को भंडारण की सीमा से मुक्त किया गया है और अनाज को आवश्यक वस्तु अधिनियम से भी मुक्त कर दिया गया है। इन तीनों बिलों में किसानों की आय दुगनी करने का प्रावधान रखा गया है तथा 6 हजार ऐसे कानून केंद्र सरकार द्वारा समाप्त किए गए हैं। जो 1860 में लागू किए गए थे। जो समाज के लिए अनुपयोगी थे। 

राज्य मंत्री उपाध्याय ने किसानों के बीच चैपाल में कहा कि किसान संगठनों को गुमराह कर 2006 में स्वामी नाथन रिपोर्ट की बात करते हैं। तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने स्वामी नाथन रिपोर्ट मंगवाया था, लेकिन कांग्रेस सरकार ने 2014 तक उस स्वामी नाथन रिपोर्ट को न तो लागू किया और न ही तत्कालीन सरकार उस रिपोर्ट को अमल में लाया। उस रिपोर्ट में किसान को डेढ़ गुना फायदे की बात कही गई थी लेकिन वर्तमान सरकार किसानों को स्वतंत्र करते हुए दो गुना लाभ देने का प्रयास किया है। बताया कि किसानों को भ्रम पैदा कर बताया जा रहा है कि एमएसपी (समर्थन मूल्य) को खत्म किया जा रहा है, लेकिन तीनों कृषि कानूनों में एमएसपी को खत्म करने का कोई प्रावधान नहीं रखा गया है। विपक्ष के द्वारा कोई मुद्दा न होने के कारण राजनीति की तुष्टिकरण कर विपक्ष द्वारा किसानों को बरगलाया जाता है। बताया कि 2014 से पहले केंद्र में कांग्रेस की सरकार ने देश के किसानों के हित में कोई काम नहीं किया था। 2014 से पहले केंद्र सरकार के द्वारा अनाजों के समर्थन मूल्य बहुत कम थे, लेकिन 2014 के बाद देश के किसानों की बदहाली को देखते हुए दो गुना समर्थन मूल्य बढ़ाया गया है। चैपाल में शिवशंकर सिंह, हेमन्त प्रताप सिंह, प्रकाश पाण्डेय, लालबहादुर सिंह, सत्यदेव मिश्रा, जय नारायण द्विवेदी, रमेशदत्त, विजय कुमार, ओम नारायण, मनोज द्विवेदी, शिवदत्त मिश्रा, तेजबली निषाद, छोटे पिढिया, प्रभुदयाल निषाद, संजय उपाध्याय, गोरेलाल त्रिपाठी आदि किसानों ने तीनों कृषि बिल का समर्थन किया।


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