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Wednesday, December 9, 2020

गर्भवती को मिल रही प्रसव पूर्व जांच सुविधा व परामर्श: जिलाधिकारी

73 गर्भवती की प्रसव पूर्व जांच व एचआरपी की हुई पहचान

आयरन, कैल्शियम व परिवार नियोजन सामग्री का हुआ वितरण 

गर्भवती के बेहतर स्वास्थ्य के लिए हुआ आयोजन 

प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान

बांदा, के एस दुबे । कोरोना संकट के बीच मातृ मृत्यु दर को कम करने व गर्भवती को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने के उद्देश्य से बुधवार को प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान दिवस मनाया गया। इसके तहत गर्भवती की प्रसव पूर्व जांच, उच्च जोखिम गर्भावस्था (हाई रिस्क प्रेगनेंसी) की पहचान, पोषण, परिवार नियोजन तथा प्रसव स्थान के चयन के बारे में काउंसलिंग की गई। जिलाधिकारी आनंद कुमार सिंह ने जिला महिला अस्पताल में इस दिवस पर परिवार नियोजन को बढ़ावा देने के लिए लगाए गए स्टाल का निरीक्षण किया। काउंसलर से एचआरपी महिलाओं की जानकारी ली। 

महिला अस्पताल का जायजा लेते डीएम आनंद कुमार सिंह, साथ में सीएमओ एनडी शर्मा

प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत बुधवार को जिला महिला अस्पताल में 73 गर्भवती की जांच की गई। आयरन, कैल्शियम की गोलियों सहित आवश्यक दवाएं भी वितरित की गईं। कोविड-19 से बचाव के बारे में भी जानकारी दी गई। जिलाधिकारी ने कहा कि इसका उद्देश्य गर्भवती को गुणवत्तापूर्ण प्रसव पूर्व जांच की सुविधा उपलब्ध कराने के साथ उन्हें बेहतर परामर्श देना है। कोरोना संकट के चलते लोग स्वास्थ्य इकाइयों पर आने से कतरा रहे हैं, लेकिन कोरोना का डर कर नहीं, बल्कि डट कर मुकाबला करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि बेहतर पोषण गर्भवती में खून की कमी होने से बचाता है। इसलिए सभी गर्भवती  को जांच के बाद पोषण के बारे में भी जानकारी दी जाती है। 

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. एनडी शर्मा ने कहा कि प्रसव के पहले ही संभावित जटिलता का पता चलने से प्रसव के दौरान होने वाली जटिलता में काफी कमी भी आती है और मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में भी कमी आती है। उन्होंने बताया प्रसवोत्तर अत्यधिक रक्त स्त्राव से महिला की जान जाने का खतरा सबसे अधिक होता है। प्रसव पूर्व जांच में यदि हिमोग्लोबिन सात ग्राम से कम पाया जाता है तब ऐसी महिलाओं को आयरन की गोली के साथ पोषक पदार्थों के सेवन के विषय में सलाह भी दी जाती है। गर्भावस्था के दौरान उच्च रक्तचाप, मधुमेह, अत्यधिक या कम वजन एवं अत्यधिक खून की कमी प्रसव संबंधित जटिलता को बढ़ा सकता है। इसलिए यह अभियान महिलाओं के लिए वरदान साबित हो रहा है। इस मौके पर मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डा. ऊषा सिंह, यूनीसेफ जिला समन्वयक फुजैल सिद्दीकी, क्वालिटी मैनेजर डा. प्रदीप सिंह, डा. चारू गौतम, जनपदीय मातृ स्वास्थ्य सलाहकार अमन गुप्ता सहित स्टाफ मौजूद रहा। 


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