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Thursday, December 17, 2020

सिमौनीधाम भंडारे में आखिरी दिन श्रद्धालुओं का उमड़ा रेला

साधु-संतों को भोजन कराने के बाद किया गया कंबलों का वितरण 

हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने पंगत में बैठकर छका प्रसाद 

बबेरू, के एस दुबे । मेला प्रदर्शनी के आखिरी दिन श्रद्वालुओं की भारी भीड उमड़ पड़ी। साधु संतों को पहली पंगत में भोजन प्रसाद ग्रहण कराया गया, उसके बाद श्रद्धालुओं को प्रसाद ग्रहण कराने का सिलसिला शुरू हुआ। मौनी बाबा धाम बजरंग बली एवं अवधूत महाराज के जयकारों से गूंजता रहा। साधुओं को दोपहर में कंबल अचला भेंट देकर विदा किया गया है।

साधु संतों की कंबल वितरण श्रमदानी सेवक

बबेरू क्षेत्र के ग्राम सिमौनी पर मौनी बाबा धाम में तीन दिवसीय राष्ट्रीय मेला प्रदर्शनी के आखिरी दिन सोमवार को स्वामी अवधूत महाराज ने हनुमान जी की पूजा अर्चना करने के बाद साधु संतों को पहली पंगत में भोजन प्रसाद ग्रहण कराया गया। इसके बाद श्रद्धालुओं को पंगत में बैठाकर प्रसाद ग्रहण कराने का सिलसिला शुरू हुआ। जिस तरह से श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा है, लोगो की श्रद्धा देखने लायक थी। आसपास गांवों सहित सुदूर क्षेत्र
प्रसाद पाने के लिए लगी भीड

के आस्थावान श्रद्धालु दोपहिया, चैपहिया वाहनों व ट्रैक्टरों से सिमौनी धाम की ओर बढ़ रहे थे। सुबह से ही रामलीला मैदान से लेकर मेला प्रदर्शनी, भोजन पंडालों में इस कदर भीड बढ़ी कि लोगो के सिर ही सिर दिखाई दे रहे थे। सुरक्षा व्यवस्था के लिए पर्याप्त पुलिस बल होते हुए भी स्वयंसेवी एनसीसी, स्काउट के छात्रों ने व्यवस्था को कहीं डगमगाने नही दिया है। महिलाओ एवं पुरूषो के लिए अलग अलग बने भोजन प्रसाद पंडालों में सुबह से लेकर देर रात तक खाली पन नही दिखा है। श्रमदानी सेवको का उत्साह भी देखने लायक था, प्रसाद की आपूर्ति करने वाले स्वयंसेवक रेल की तरह सरपट दौड लगाते हुए काउण्टरों में पहुंचाते रहे। इधर प्रसाद ग्रहण कर चुके श्रद्धालुओं की पंगत उठी नही कि सफाई कर्मी तुरंत सफाइ करते थे और पंडाल साफ होते ही श्रद्धालुओं से
प्रसाद पाने के लिए उमड़ी श्रऋालुओं की भीड़

खचाखच भर जाते थे। दोपहर बाद फिर से साधु सन्यासियो को पंगत में बैठाकर प्रसाद ग्रहण कराया गया और उन्हे विदाई के रूप में कंबल एवं अचला देकर विदा किया गया। भोजन प्रसाद किसी को मिल पाता था किसी तक प्रसाद नही पहुंच पाता था। इस कदर भीड को प्रसाद परोसने में श्रमदानी सेवक भी थक जाते थे। महिलाएं पूडी बेलने का श्रमदान करने के बाद प्रसाद ग्रहण करती रही। भंडारें के आखिरी दिन पूडी सब्जी, मालपुआ, नमकीन, पेठा का प्रसाद अनुमान से अधिक श्रद्धालुओं ने पंगत में बैठकर प्रसाद ग्रहण किया है।  


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