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Monday, December 21, 2020

कोरोना वायरस की जांच में आरटीपीसीआर टेस्ट बना सहायक

तीन महीने में हुईं एक लाख से ज्यादा टेस्टिंग 

मंडल में सिर्फ मेडिकल कॉलेज में ही हो रही आरटीपीसीआर जांच 

प्राचार्य ने की माइक्रोबायोलाजी विभाग में कार्यरत टीम की सराहना 

बांदा, के एस दुबे । कोविड-19 से निपटने में सरकार व स्वास्थ्य महकमा नए तरीके अपनाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहा है। इसकी बानगी राजकीय एलोपैथिक मेडिकल कालेज के माइक्रोबायोलॉजी विभाग है। यहां बीएसएल-2 (बायो सेफ्टी लैब) आरटीपीसीआर (रियल टाइम पाली मरेज चैन रिएक्शन) के जरिए कोविड-19 के नमूनों की टेस्टिंग में मील का पत्थर साबित हुआ है। इससे अब तक एक लाख से ज्यादा टेस्ट किए जा चुके हैं। 

मेडिकल कालेज में बीएसएल-2 लैब में आरटीपीसीआर के जरिए कोरोना वायरस की टेस्टिंग की जा रही है। बढ़ रहे कोरोना संक्रमण को देखते हुए 31 अगस्त को यहां आरटीपीसीआर से टेस्टिंग शुरू की गई थी। इस मशीन से

मेडिकल कालेज में एक लाख लोगों की कोरोना जांच पूरी होने पर खुशी जताती टीम

एक बार में 90 सैंपलों की जांच होती है,  जिसमें करीब दो से तीन घंटे का समय लगता है। अब तक यहां 101138 लोगों की जांच की जा चुकी है। यहां कार्यरत टीम ने रोजाना एक हजार से ज्यादा लोगों की सैंपलिंग की है। इसका नतीजा है कि आरटीपीसीआर से कोरोना जांच मुफीद साबित हुई है। प्राचार्य डा.मुकेश यादव ने बताया कि हमारी पूरी टीम दिन रात अथक परिश्रम कर रही है और आगे भी गुणवत्तापूर्ण कार्य जारी रखने के लिए प्रेरित है। इसी का नतीजा है कि टीम द्वारा एक लाख से टेस्टिंग की जा चुकी है।  

आरटीपीसीआर मशीन से टेस्टिंग में आई तेजी 

बांदा। मेडिकल कालेज प्राचार्य डा. मुकेश यादव ने बताया कि शुरूआती दौर में कोरोना की आरटीपीसीआर से जांच के लिए सैंपल लखनऊ, झांसी सहित महानगरों में भेजा जाता था। जांच रिपोर्ट आने में तीन से सात दिन का समय लग रहा था, लेकिन मेडिकल कालेज में आरटीपीसीआर मशीन लगने के बाद कोरोना जांच में तेजी आई है। चित्रकूट धाम मंडल में सिर्फ मेडिकल कालेज में ही आरटी पीसीआर जांच की जा रही है।


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