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Wednesday, December 9, 2020

अफसरों की मिलीभगत से बड़े पैमाने पर हो रहा अवैध खनन

नियम विरुद्ध बियावल घाट में बीच जलधारा से निकल रही बालू

सुखेन्द्र अग्रहरि, चित्रकूट। जिले में विभागीय अधिकारियों की सह पर इन दिनों बड़े पैमाने पर अवैध खनन किया जा रहा है। जहां खनन पट्टेधारक नियमों को तक पर रखकर नदियों की जल धारा से बालू निकाल रहे हैं, वहीं ओवरलोड ट्रक सड़कों को ध्वस्त कर रहे हैं। 

कोरोना के लाकडाउन के बाद जिले में एक बार फिर खनन माफिया सक्रिय हो गये हैं। मऊ तहसील क्षेत्र के अन्तर्गत यमुना नदी के बियावल घाट में खनन पट्टेधारक द्वारा नियम विरूद्ध तरीके से नदी की जल धारा के बीच से बालू निकाली जा रही है। भारी भरकम मषीनों को रात्रि में जलधारा में उतारकर नदियों का सीना छलनी करते हुए

मशीनों से टक में भरते बालू

विभागीय नियमों को ताक पर रखकर लाल सोना निकालकर पट्टेधारक मालामाल हो रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि खनन करने के अंदाज से ऐसा प्रतीत होता है कि विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों की सह पर ही पर्यावरणीय संतुलन को बिगाड़ा जा रहा है, जो जलीय जीव-जन्तुओं के जीवन के लिए भी खतरा बन रहा है। खनन माफिया तो मानक के विरूद्ध बालू निकालकर अरबो कमाने के बाद यहां से खिसक जायेंगे, किन्तु शायद इसकी भरपाई आने वाले समय में क्षेत्रीय जनता को भीषण पेयजल समस्या के रूप में करनी पड़ेगी। क्षेत्रवासियों ने उच्चाधिकारियों से बियावल घाट संचालकों द्वारा कराये जा रहे बालू खनन की गोपनीय जांच कराकर कार्यवाही करने की मांग की है। 

निष्कासित पत्रकार व ट्रेनिंग सेंटर संचालक कर रहे दलाली

चित्रकूट। बियावल घाट में मानक के विपरीत हो रहे खनन को जहां कुछ राजनीतिक नेताओं का संरक्षण प्राप्त बताया जा रहा है, वहीं बड़े संस्थान द्वारा निष्कासित किया जा चुका एक पत्रकार भी शामिल है। मन्दाकिनी पुल से बेडी पुलिया के मध्य रहने वाला यह पत्रकार निष्कासित होने के बावजूद अब तक स्वयं को एक बड़े ब्राण्ड का रिपोर्टर बताता है और इसने बियावल बालू घाट को हर प्रकार से संरक्षण देने की जिम्मेदारी ले रखी है। इसी प्रकार एक ट्रेनिंग संेटर संचालक ने भी बियावल घाट में खबर करने गये कुछ पत्रकारों को विगत दिनों फोन करके वहां जाने से रोका था। हालांकि यह दोनांे जिले के बदनामषुदा दलाल हैं और समाज में इनकी कोई पूछ नहीं है। इसके बावजूद घाट शुरू होने के साथ यह लोग सक्रिय हो गये हैं। 


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