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Wednesday, December 16, 2020

श्रीकृष्ण जन्मोत्सव, कंस वध की सुनाई कथा

चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरि। परमात्मा श्रीकृष्ण आनंद के सागर हैं। भगवान अवतरित होते हैं तो सारे बंधन टूट जाते हैं। भगवान श्रीकृष्ण जिस समय अवतरित हुए उस समय कारागार के सभी पहरेदार सो गए। मां देवकी और वासुदेव जी की बेडियां और हथकड़ी टूट गईं। हर तरफ उत्साह का अपूर्व वातावरण था। भगवान श्रीकृष्ण ने धर्म रक्षा के लिए इस संसार में अवतार लिया। 

श्रीमद्भागवत कथा के चैथे दिन कथा व्यास आचार्य नवलेश दीक्षित ने बताया कि कथा में श्रीकृष्ण जन्म होते ही भक्त खुशी से झूम उठे। श्रीकृष्ण जन्म प्रसंग का सजीव मंचन किया गया। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने संसार के सभी प्राणियों को असुरों के अत्याचार से मुक्त कराने के लिए अवतार लिया। श्रीकृष्ण आनंद के सागर हैं। वे भक्त वत्सल हैं। कथा में श्रीकृष्ण जन्म प्रसंग के पूर्व उन्होंने भरत प्रसंग का भी वर्णन किया। उन्होंने कहा कि इस संसार में जो भी अंहकार करते हैं, उनका पतन निश्चित होता है। अहंकारी प्राणियों को प्रभु की भक्ति भी नहीं मिलती। कंस को बहुत ही अहंकार था और भगवान के जन्म के बाद से ही वह बहुत भयभीत हो गया। भागवत रत्न आचार्य नवलेश दीक्षित के अनुसार कथा में बुधवार को को भगवान श्रीकृष्ण की बाललीलाओं का वर्णन किया गया।

कथा प्रवक्ता आचार्य नवलेश दीक्षित।

बिहारा में आयोजित श्रीमद्भागवत ज्ञान यज्ञ सप्ताह के चैथे दिन श्रीकृष्ण जन्मोत्सव हुआ। श्रीकृष्ण जन्म का अर्थ होता है जीवन में अच्छाइयों का आगमन। कंस का अर्थ है पूर्ण रूप से ताप को नष्ट करना। भगवान श्रीकृष्ण जगतपिता होने के बाद भी पुत्र बनकर आए और उन्होंने कंस रूपी ताप का अंत किया। उन्होंने कहा कि आध्यत्म से मनुष्ण सत्यता के निकट जाता है। इस अवसर पर मुख्य यजमान श्याम लाल मिश्रा उर्फ लक्ष्मण और  उनके भाई रमाकांत मिश्रा राम नरेश मिश्र नंदकिशोर मिश्रा बंसी बिहारी चैबे ने व्यास पीठ का पूजन किया। कथा व्यास ने कहा कि सुदामा प्रभु भक्तथे। प्रारब्धवश उन्हें दरिद्रता का दुख प्राप्त हुआ। भगवान श्रीकृष्ण से मिलने जब सुदामा गए, तो वे वहां का वैभव देखकर अपने साथ पोटली में लाए चावल छिपाने लगे। भगवान ने उनसे तांदुल मांग कर खाए। श्रीकृष्ण के महल से वापस जब सुदामा अपने गांव आए तो प्रभु ने उन्हें अपार संपदा दे दी। भागवत के साथ-साथ रात्रि में रामलीला का भी आयोजन किया जाता है इस रामलीला में हजारों की संख्या में भक्त रात्रि में भी उपस्थित होते हैं। दिन में श्री कृष्ण जन्म और रात्रि में राम जन्म का मंचन हुआ। इस अवसर पर बंसीबिहारी चैबे, अशोक मिश्रा, उदय भान द्विवेदी, रमाकांत मिश्रा, संतोश मिश्रा, हरदेव प्रसाद शुक्ला आदि मौजूद रहे।


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