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Wednesday, December 2, 2020

दुष्कर्म एवं हत्या के आरोपी को फांसी की सजा

पोस्को कोर्ट ने सुनाई सजा , 20 माह बाद आया फैसला  

आरोपी की चचेरी बहन थी मृतका बच्ची  

पोस्को केस में यह है पहली फांसी की सजा 

 फीरोजाबाद, ( विकास पालीवाल ) । आठ साल की बालिका से दुष्कर्म के बाद हत्या के जघन्य मामले में पोस्को कोर्ट ने आरोपित को सजा ए मौत की सजा सुनाई है। 20 माह  पुराने मामले में कठोर फैसला सुनाए जाने के बाद कोर्ट में सन्नाटा छा गया। जब से फिरोजाबाद जिला बना है, उसके बाद  पाक्सो एक्ट में पहली बार मौत की सजा सुनाई गई है, जबकि अन्य केसों में अब तक तीन फांसी की सजा होने की बात सामने आई है ।  घटना 17 मार्च 2019 को सिरसागंज क्षेत्र के गांव चंदपुरा की है। यहां पर पड़ोस के घर छठ का कार्यक्रम था, जिसमें डीजे बज रहा था। मुहल्ले के बच्चे डीजे पर नाच रहे थे। अन्य बच्चों को नाचता देख पड़ोस में रहने वाली आठ साल की बालिका भी वहां पहुंच गई। इसके बाद वहां से गायब हो गई।  सुबह गेहूं के खेत में बालिका की लाश बरामद हुई। उसके मुंह में कपड़ा ठुंसा हुआ था और गला घोंटे जाने के निशान भी थे।  पुलिस ने आरोपित के खिलाफ दुष्कर्म हत्या और पाक्सो एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस ने चार दिन बाद बंटू को


गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। इस मामले में मई में तत्कालीन थानाध्यक्ष एवं विवेचक सुनील कुमार तोमर ने आरोपित के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। विशेष न्यायाधीश पास्को एक्ट मृदुल दुबे ने घटना को जघन्य करार देते हुए आरोपित को फांसी की सजा सुनाई । 

        फ़िरोज़ाबाद जनपद के थाना सिरसागंज क्षेत्र के ग्राम चंद्रपुरा के रहने वाले दीपक चंद की 8 वर्षीय अबोध बच्ची के साथ उसके चचेरे भाई बंटू उर्फ शिव शंकर पुत्र अतर सिंह द्वारा पहले दुष्कर्म करना और उसके बाद हत्या करने का मामला सामने आया । 18 मार्च 2019  को बच्ची की मां कंचा देवी ने थाना सिरसागंज में मामला पंजीकृत कराया था, जिसमें बंटू पुत्र अतर सिंह को नामजद किया गया था । पुलिस ने तफ्तीश में बलात्कार एवं हत्या का मुकदमा  दर्ज किया । जिसके बाद मामले में विवेचना के दौरान अभियुक्त के विरुद्ध पास्को एक्ट की बढ़ोतरी की गई । कोर्ट में गवाहों के बयान अंकित किए गए । यह मामला विशेष न्यायधीश पोस्को / अपर सत्र न्यायधीश मृदुल दुबे की खंडपीठ में चला । गवाहों के बयान एवं अन्य साक्ष्यों के आधार पर  कोर्ट द्वारा अभियुक्त को फांसी की सजा दी गई है । अभियोजन पक्ष की ओर से सहायक शासकीय अधिवक्ता अजमोद सिंह चौहान तथा बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता मोहम्मद मसरूर ने मुकदमे में पैरवी की । इधर उस समय के तत्कालीन थानाध्यक्ष सुनील तोमर ने  क्षेत्राधिकारी  बलदेव सिंह खनेडा  के पर्यवेक्षण में  इस मामले की तफ्तीश की थी । 

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