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Sunday, December 27, 2020

किसान बिल सरकार को वापस नहीं लेना चाहिये?..............

देवेश प्रताप सिंह राठौर 

(वरिष्ठ पत्रकार)

................ किसान बिल पर 29 तारीख को छठी बार सरकारों किसान नेताओं के बीच वार्ता होगी मुझे लगता है कि इस किसान बिल को सरकार को वापस लेने की जरूरत नहीं है क्योंकि यह बिल किसान के हित में है मैं पहले भी लिखा हूं आज भी लिख रहा हूं किसान अपनी फसल देश के किसी कोने में ले जाकर बेच सकता है ।और बिचौलिए जो हैं दलाल हैं जो गांव से लेकर तहसील शहर मोहल्ले में हर जगह व्याप्त हैं उनसे अच्छी कीमत में बाहर जाकर बेचने कोई सोच सकता है जो बाधाएं थी बाहर बेचने की वह लोगों के इस कानून के माध्यम से ले जाने में सरलता और सहयोग प्राप्त होगा यह बिल किसान के हित में हैं इस किसान  बिल में भारत के किसानों को बहुत ही हितकारी है। यह बिल 30 वर्ष पहले पूर्व सरकारों के द्वारा तैयार किया गया था इसे नरेंद्र मोदी की सरकार ने इस बिल को पास किया आज जिस तरह से किसान जो अपने क्षेत्र के व्यापारियों और बड़े-बड़े किसी व्यापारी एवं कृषक जो इस तरह का छोटे-छोटे किसानों का गल्ला या कृषि से संबंधित वस्तु को खुद खरीद कर औने पौने भाव में, तथा बाहर जाकर अच्छी कीमत में बेचते  हैं और वह अच्छे-अच्छे वाहनों से हर सुख सुविधाओं से संपन्न है ,वही छोटा किसान खेती करते करते पैर में छाले पड़ जाते हैं दो वक्त की रोटी उसे बड़ी मुश्किल से प्राप्त होती है। लेकिन व्यापारी वर्ग के लोग जो गांव में रहते हैं गांव में पैसा उधार देते हैं कृषि के लिए छोटे-छोटे किसानों को और फसल होने पर उनकी पूरी फसल ले लेते हैं फिर उनको उधार पैसे देते हैं ऐसे लोग आज किसान धरना पर बैठे हुए हैं उन्हीं किसानों को लेकर चीन को पूरे साल में उधारी देते हैं और फसल पूरी लेने के बाद फिर उधारी देते हैं इस तरह के लोग आज किसान के विरोध कर रहे हैं जब यह किसान भी अपनी खेती का हर सामान कहीं भी किसी राज में जाकर भेज सकते हैं और अच्छे दामों पर भेज सकते हैं जो दलाल हर गांव शहर में उधार दे दे कर छोटे किसानों को पूरा गल्ला हड़प कर लेते हैं वही लोग आज इस किसान यूनियन के व्यापारी तबके के लोग आज किसान का विरोध कर रहे हैं जबकि हकीकत में किसान के हित में है क्योंकि मैं भी जनपद कन्नौज का रहने वाला हूं छिबरामऊ में मेरे भी गांव में जमीन है मैं इस चीज को जानता हूं मैं भी यह किसान बिल कन्नौज में क्यों नहीं लोग इसका विरोध कर रहे हैं। हैप्पी वहां की एक पार्टी के मुखिया का क्षेत्रीय चुनाव क्षेत्र है कन्नौज वहां विरोध नहीं हो रहा है और नोएडा में जाकर विरोध करते हैं। यह विशेषकर प्रश्न बनता है लेकिन लोगों को समझने की जरूरत है किसान भील किसान के हित में है  आज पूरा देश जानता है भारत में जो आतंकवाद तथा विश्व में आतंकवाद ही घटनाएं ज्यादातर मुस्लिम लोग अधिकतर आतंकवादियों की श्रेणी में आते हैं, क्यों आज हम देख रहे हैं किसी विभाग में अगर अल्पसंख्यक है वह बहुत ही कट्टरवादी है उनकी सोच देश में कौन सी पार्टी देश हित में अच्छा कर रही है उससे उनको कोई मतलब नहीं उनका सिर्फ एक उद्देश होता है नरेंद्र मोदी और प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी जी को अब शब्दों से बोलना और वहां पर बैठे बहुत सारे अन्य जातियों के बड़े प्यार से सुनते हैं। और वह वहां पर राम राम कहने में उनको संकोच होता है ऐसे हिंदुस्तान के हिंदुओं का और हिंदुओं से जुड़ी बहुत सारी जातियों का हाल है। मेरा कहना यह है जब हिंदुस्तान में रहने वाला हिंदुस्तान का आदमी राम राम राधे राधे सीताराम नहीं कहेगा तो का सीरिया और पाकिस्तान इराक अफगानिस्तान ईरान बांग्लादेश और बहुत से मुस्लिम देशों में जाकर क्या ह


यह शब्द कह सकता है। इसका एक ही प्रश्न बनता है नहीं क्योंकि इस देश में मैं समझता हूं देश के मुखिया हमारे और प्रदेश के मुखिया जरूर एहसास करते होंगे यहां का अल्पसंख्यक बहुत ही देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी जी को बिल्कुल पसंद नहीं करता और यह स्पष्ट तौर पर मैं जहां पर हूं वहां पर मैं देखता हूं। बड़े अफसोस की बात है इस देश के जनता का बहुमत प्राप्त होने के बाद जो केंद्र की सरकार बनी है उस केंद्र की सरकार को हमारे सामने बैठे हुए लोग कहते हैं ईवीएम मशीन के कारण जीते हैं। वह अपनी हार को स्वीकार नहीं करते क्या यह ईबीएम कोलकाता में हुए नगर निगम के चुनाव में ईवीएम नहीं थी बैलट था। कश्मीर में क्षेत्रीय चुनाव में एबीएम नहीं थी बैलट था। और भारतीय जनता पार्टी अच्छे रूप में अपना स्वरूप को दिखाया और कश्मीर में एक सबसे बड़ी पार्टी बनकर तैयार हुई, जबकि गुपकार गैंग साथ(7) पार्टी या थी और बीजेपी के पीछे मैं यह इसलिए लिख रहा हूं मैं किसी पार्टी या किसी दल का नहीं हूं, पर मैं सत्यता लिखने का प्रयास करता हूं और जो लोग आंख में पट्टी बांधे हुए हैं देश के रहने वाले गद्दारों को समझ नहीं रहे हैं उन्हें बताना चाहता हूं आतंकवाद बाहर से तो उतना अधिक नहीं है इसके घर के अंदर बहुत बड़े आतंकवादी हर मोहल्ले हर शहर गली कूचे में गंदी मानसिकता के लोग बहुत सारे हैं। मैं स्पष्ट तौर पर मैं देखता हूं कितनी नफरत है सिर्फ एक उनका मकसद है नरेंद्र मोदी और योगी जी का विरोध करना अच्छा हो या बुरा कार्य हो सिर्फ एक दृष्टि से देखते हैं, बीजेपी अल्पसंख्यक को चाहे जितना अच्छा कर दे लेकिन यह बीजेपी के सपोर्टर ना कभी हुए हैं और ना ही होंगे यह मैं पूर्ण विश्वास के साथ देख रहा हूं इसलिए मुझे लिखने में कतई संकोच नहीं है। जिस संस्था में जो व्यक्ति रह कर उस संस्था के मुखिया को अभद्र भाषा का प्रयोग करें जिसका वहां से परिवार का पालन पोषण होता है जब वह व्यक्ति उस संस्थान में अपने अभिभावक को आप शब्दों से प्रयोग करता है तो उसको स्पष्ट तौर पर समझ लेना चाहिए, वह वक्त किसी देश का या हो संस्थान का कैसा भला सोच सकता है। मैं टंके की चोट पर लिखकर यह स्पष्ट तौर पर केंद्र सरकार और राज्य सरकार को अवगत करके विश्वास दिलाना चाहता हूं आप इन अल्पसंख्यकों की क्रूरता और आसभ्यता पर 90% अल्पसंख्यक से बहुसंख्यक में हैलोग इस देश के रहने वाले मोदी जी के विरोधी है। आज केंद्र में मोदी और उत्तर प्रदेश में योगी जी के होने के कारण यह लोग अंदर ही अंदर चुप बैठे हुए हैं परंतु घात में हैं मौका मिला तो यह देश की बर्बादी में विशेषकर अपना संपूर्ण योगदान देने के लिए तैयार बैठे हैं। क्योंकि आज से 6 साल पहले जब अन्य सरकारें थी  प्रदेश की हो चाहे केंद्र की हो मैंने यह देखा है किस तरह से अल्पसंख्यक हिंदुओं पर हावी थे, रिपोर्ट थाने चौकी मे नहीं होती थी। मैंने वह समय देखा है बहुत बदलाव हुआ है जिनके दिल में आग सुलगती रही और सुलगते सुलगते जो धारा 370 आर्टिकल 35a में चुपचाप देखा पर तो अंदर से उन्हें खराब सोचने की स्थित रहती थी परंतु उसके बाद तीन तलाक पर निर्णय हुआ उस समय चुप बैठे लेकिन अंदर ही अंदर वह मौके की तलाश में बने रहे और जब नागरिकता संशोधन बिल आया तो इनका धैर्य टूट गया और यह शाहीन बाग दिल्ली में जिस तरह का आतंक फैलाया वह पूरे विश्व में देश ने देखा है। यह सब जब धारा 370 आर्टिकल 35a में चुप रहे तीन तलाक में चुप रहे और इस चुप्पी को इन्होंने नागरिकता संशोधन बिल में तोड़कर यह स्पष्ट दिखा दिया यह भारत के समर्थन बहुत कम है यह यह पाकिस्तान के और अन्य मुस्लिम कंट्री यों के गुण गाते हैं। इन लोगों को यह नहीं मालूम मेरे एक मित्र उनका कोई मिलने वाला अल्पसंख्यक उसका रिश्तेदार कोई पाकिस्तान में रहता है जब वह परिवार भारत में उस घर में जो रिश्तेदार थे वह मिलने आए और उन्होंने हमें जो बताया कहा कि भाई हिंदुस्तान बहुत अच्छा है पाकिस्तान तो नर्क है नर्क यहां के मुसलमान पाकिस्तान से बेहतर तरीके से रह रहे हैं और अपनी आवाज बुलंद करके हर तरह के कृत्य करते हैं पाकिस्तान में हम लोग इस तरह नहीं रह पाते जिस तरह हिंदुस्तान में अल्पसंख्यक रहते हैं। इंडिया का मुसलमान बहुत ही पाकिस्तान का समर्थक है। इस पर सरकार को विचार करना चाहिए मैं स्पष्ट तौर पर बताना चाहता हूं अगर देश में लोगों पर अंकुश नहीं लगा अब यह पाकिस्तान तो बनी गया है वह दिन आएगा जब यह लोग और एक पाकिस्तान इस देश में बना कर खड़े हो जाएंगे वह  स्थित बहुत ही विकराल होगी इसलिए हमें सोचने की जरूरत है हम किसी के विरोधी नहीं है लेकिन जहां देश की बाद आती है वहां पर हम निडर होकर लिखने में कतई संकोच नहीं करते हैं चाहे उसके परिणाम कुछ भी हो जनता को बताना और देश के मुखिया और प्रदेश के मुखिया तक हमारी आवाज पहुंचे और उन्हें यह पता चले जिसके लिए आप इतनी सुख सुविधाएं दे रहे हैं वह भारत के ना आपके हैं सिर्फ स्वार्थ में वह कुछ भी करने को तैयार रहते हैं। जिस कारण देश में आतंकवाद को बढ़ावा मिलता है वह कोई बाहर ही नहीं है इस देश के अंदर बैठे हुए अल्पसंख्यक जो बहुसंख्यक हैं 90% गद्दार हैं। देश का खाते हैं और सोच पाकिस्तान बांग्लादेश की रखते हैं। आज हम आपको एक विशेष तौर पर जब भारत आजाद हुआ था आजादी के बाद जब पाकिस्तान में जो हिंदू थे उन्हें काटकर हत्या कर कर ट्रेनों पर लाशें भारत को भेजी गई थी, बाद एक पंजाब राज्य सा है जिसने पाकिस्तान के कृत को उसी के रूप में करके दिखाया था और पाकिस्तान में पंजाब के द्वारा उसी की भाषा में जवाब दिया था आज पंजाब में अल्पसंख्यक बहुत कम है ना के बराबर है और अन्य राज्यों में बहुत सारे हैं पाकिस्तान में 22 करोड़ जनसंख्या है। भारत में लगभग 22 करोड़ मुसलमान है हम उन्हें अल्पसंख्यक नहीं कह सकते हैं। वह दिन दूर नहीं अगर विपक्ष को सरकारों ने अपने कार्यों पर ध्यान नहीं दिया तो वह दिन दूर नहीं जब भारत में भी एक और पाकिस्तान के लिए यह अल्पसंख्यक मांग करेंगे, क्योंकि मैं किसी का विरोधी नहीं हूं लेकिन मैंने अपनी आंखों से देखता हूं जो विभागों में बैठे अल्पसंख्यक है और किस तरह आग उगलते हैं भारत विरोधी गतिविधियों से उन्हें पूरी आजादी है कुछ भी पूछ सकते हैं और हम लोग सोच समझकर बोलते हैं उनकी भावनाओं को देखते हुए ने उन्हें कष्ट न पहुंचे, परंतु यह लोग किसी बात का ध्यान नहीं रखते है। स्पष्ट तौर पर कह सकते कानूनी इन चीजों पर ध्यान नहीं दिया तुम्हें विश्वास के साथ कह सकता हूं बाहर के आतंकवादियों को तो आप लड़ सकते हैं लेकिन एक घर में बैठे आतंकवादी जो लगभग करोड़ों की संख्या में व्याप्त है उनसे सरकार किन हालातों में उन्हें समझाने की और उन्हें राष्ट्रभक्त के लिए प्रेरित कैसे करेंगे, क्योंकि उनकी भाषा और दिल उनका सिर्फ पाकिस्तान के लिए धड़कता है।मैंने वह दिन देखे जब भारत और पाकिस्तान का मैच होता है जिसमें पाकिस्तान जी जाता है और उस मोहल्ले में पाकिस्तान जीत के गोले दागे जाते हैं और लगभग 1000 मीटर पर पुलिस अधीक्षक का निवास है कोई भी ऐसे लोगों को इस तरह के कार्य करने पर उन्हें दंडित नहीं किया जाता है जिसके फलस्वरूप उन्हें बढ़ावा मिलता है और वह आज देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी जी के कट्टर विरोधी है। संदर्भ में मैंने एक दो बार उनसे कहा आप विरोध करिए लेकिन कहीं अच्छाइयों पर भी प्रकाश डालने की जरूरत होती है जब एक वक्त खराब होता है कहीं ना कहीं उसमें कहीं ना कहीं अच्छाइयों को भी ध्यान दिया जाता है मैं यह नहीं कह सकता कि सभी अल्पसंख्यक ऐसे हैं लेकिन मैं दावे के साथ कह सकता हूं करोड़ों करोड़ों लाल संख्या देश विरोधी है यह आने वाले समय में बहुत घातक बनेंगे । सरकार को देश में ऐसा कानून बनाना चाहिए जो राष्ट्र विरोधी देश विरोधी गतिविधियों से लिप्त हो उसके साथ कठोर दंड का प्रावधान होने की जरूरत है। तथा जो देश के प्रधानमंत्री एवं प्रदेश के मुख्यमंत्री जो जनता द्वारा चयनित हुए हैं उनको अभद्र भाषा से बोलने पर एवं देश विरोधी गतिविधियों की बातें करने पर उन पर उस संस्था उस विभाग उस राज्य उस देश के मुखिया को सोचने की जरूरत है जब यह बात संज्ञान में आती है अगर बताया जाता है तो ऐसे लोगों को कानून के दायरे में रहकर दंड देने की जरूरत है। यहां का मुसलमान पाकिस्तान बांग्लादेश इराक ईरान सीरिया के गुण गाता है, और जो वहां से मुसलमान जो भारत में आते हैं वह लोग कहते हैं भारत बहुत अच्छा है यहां पर सब को बोलने का सब कुछ कहने का अधिकार है हम मुस्लिम कंट्री में रहते हैं वहां के रहने वाले हैं लेकिन वहां पर हम इतने स्वतंत्र रूप से बोलने में सक्षम नहीं है वहां के नियम कानून के तहत जितने भारतवर्ष में जो छूट और जो बोलने की आजादी है विश्व के किसी देश में मुस्लिम कंट्री ओं में उन मुसलमानों को नहीं है यह वहां से आए अपने रिश्तेदार से मिलने हैं एक मुसलमान के वक्तव्य के शब्द है। छोटी-छोटी चीजें जो बहुत ही घातक होती हैं जैसे क्रिकेट मैच होता था उस समय पाकिस्तान जीतने पर जो लोग कॉलेज लगाते थे उन्हें जानने और पहचाने की जरूरत है क्योंकि हर जिले में एलआईयू एक जिला पुलिस अधीक्षक के तहत यह एक जांच प्रक्रिया होती है उनके नुमाइंदे को पिता के तौर पर जांच करते हैं उन्हें इस तरह के लोगों को इंगित करके क्यों नहीं दंडित करने का काम करते हैं या आज बहुत पहले परसों की बात है जब पूर्व सरकारें हुआ करती थी तब यह मैंने अपनी आंखों से देखा है। तो कई वर्षों से पाकिस्तान के क्रिकेट मैच सारे संबंध विच्छेद है परंतु पूर्व में इन छोटी-छोटी चीजों को ध्यान दिया जाए सरकारें ध्यान दें मुझे लगता है इन लोगों के मंसूबे को जो बड़े तादात में आगे चलकर विकराल रूप धारण करें इनको उसी समय लगाम लगाने की जरूरत रहती है। इस देश के जो नेता है जो अल्पसंख्यकों की राजनीति करते हैं जो आज की तिथि में अल्पसंख्यक नहीं है उन लोगों को भी सोचने की जरूरत है जब यह पावर में आ जाता जिनका आप समर्थन करते हो वह आपको भी नहीं बचेंगे यह वह लोग हैं जो तैमूर से भी घातक है। बाबर हिमायू से भी घातक है सिर्फ मौके की तलाश में है अगर इनको कहीं से भी बड़ा संरक्षण प्राप्त हो जाएगा मुझे लगता है यह एक दशक में या उससे थोड़ा अधिक यह लोग अपना पूरा जाल हिंदुस्तान में फैला देंगे उस समय भारत की सरकारों को कंट्रोल करना बड़ा मुश्किल हो जाएगा, जब भारत आजाद हुआ मुसलमानों के लिए पाकिस्तान मना हिंदुओं के लिए हिंदू राष्ट्र बना उस समय इस चीज को क्यों नहीं ध्यान दिया गया जब पाकिस्तान में आजादी के बाद 27 परसेंट हिंदू थे आज की तिथि मात्र डेढ़ या दो प्रतिशत रह गए हैं, आप किसी से तुलना लगा सकते हैं कि वहां पर हिंदू हिंदू बनकर रहने में उसे बड़ी दिक्कतें आती हैं उसकी बेटी उसकी औरत उसके परिवार के सदस्यों की इज्जत बचाना पाकिस्तान में बड़ा मुश्किल का काम है। आए दिन समाचारों में देखते हैं किस तरह वहां पर रह रहे अल्पसंख्यक अपना जीवन नर्क बना रखा है क्योंकि वहां उन्ही के रूप में रहने की इजाजत है। कोई मंदिर नहीं है ना पूजा पाठ करने का कोई स्थान है सिर्फ अक्षय में भगवान रखे रहो पूजा करके बंद कर दो उन्हें एहसास ना हो कि हम हिंदू हैं इस तरह की धारणा वहां पर पन चुकी है और जो हिंदू बन के रह रहे हैं उनकी बहन बेटियों की इज्जत वही लोग लूट रहे हैं इसका प्रणाम प्रत्यक्ष रूप से आप कभी ना कभी मीडिया के माध्यम से देखते और सुनते हैं जो समाचार लिखो कर आ जाते हैं उन्हें हम आप देख लेते हैं परंतु हर रोज इस तरह के किरत हुआ करते हैं जिन्हें मीडिया तक जानकारी नहीं प्राप्त हो पाती है यह पाकिस्तान के हाल हैं पाकिस्तान में अल्पसंख्यक घुट घुट कर जी रहा है। भारत की तरफ निगाह लगाए बैठा हुआ है भारत सरकार को इन लोगों को नागरिकता संशोधन के माध्यम से है भारत में लाने की जरूरत है क्योंकि इस देश को अगर बचाना है भविष्य में अच्छा करना है तो इन लोगों पर लगाम लगाने की बहुत आवश्यकता है मैं यह कटु वचन इसलिए बोल रहा हूं कि यह देश में हमारे से भी अधिक बुद्धिमान लोग जो बैठे हुए हैं और सब इस चीज को जानते हैं परंतु वर्तमान देखकर भविष्य की चिंता नहीं कर रहे हैं। आज मैं इसलिए लिख रहा हूं कि मैं अपने पत्रकारिता जीवन में बहुत सारे लोगों को गया हर तरह के लोगों से मिलता हूं तब उनकी स्पष्ट आवाज जिस तरह से दिखाई देती है उससे हमें महसूस होता है यह भारत के हितेषी नहीं है। नरेंद्र मोदी जी देश के प्रधानमंत्री योगी जी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री जी के तो कट्टर विरोधी है अब शब्दों से बोलना इनकी आदत बन गई है। मैंने जो आप शब्द बोलते हैं उनसे मैंने कहा आप जो बोल रहे हैं यह जनता के चुने हुए लोग हैं जनता ने इन्हें देश का प्रधानमंत्री बनाया है और देश का मुख्यमंत्री बनाया है तो उनका जवाब होता है ईवीएम मशीन तो उन्हीं की है इसलिए नरेंद्र मोदी और योगी जी चुनाव जीते हैं। मैंने कहा सुप्रीम कोर्ट ने उनको विपक्ष के लोगों को चैलेंज दिया था की आईए ईवीएम मशीन अगर खराब हो हां करीबियों में मशीन में छेड़खानी की जा सकती है आकर आप बताइए यह पूर्ण रूप से ईश्वर कोई भी लोग इसी तरह के इंजीनियर इसको छेड़छाड़ नहीं कर सकते हैं यह सुप्रीम कोर्ट ने और भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ने खुले तौर पर उन विपक्षी दलों को चैलेंज दिया था कि इस मशीन में कोई छेड़छाड़ या कोई भी कमी निकाल कर दिखाओ आप सभी को मेरा निमंत्रण है, उस समय विपक्ष के लोग जो ईवीएम मशीन को खराब बताते थे कोई नहीं गया, लेकिन आज वह लोग जिस तरह से मशीन को बताकर अपनी हार स्वीकार नहीं कर रहे हैं ऐसे लोग हर जगह हर ऑफिस में हर मोहल्ले हर चौराहे पर हर जिले में हर प्रदेश में है पूरे देश में सब जगह व्याप्त है। सरकार को गंभीरता से सोचने की जरूरत है अगर भारत देश को बचाना है भारत देश के अंदर अमन-चैन और तरक्की की सोचने में और तरक्की होने में भारत अल्पसंख्यक जो बहुसंख्यक के रूप में हो गए हैं या आने वाले समय में विकास के पथ पर बहुत बड़े बाधक हैं। मैं बिना वोटरों फेंके लिखना इसलिए मुनासिब समझा क्योंकि मैं यह अपने पत्रकारिता जीवन में जा जाकर लोगों के भाव सुने और देखे हैं। आज देश में जिस तरह की आजादी मिली है अच्छा हो या बुरा भला हो या बुरा हो सब पर विरोध करने की जरूरत भी पक्ष ने बना रखी है ।

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