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Friday, November 20, 2020

सोनीपत से कृषि विवि पहुंचा बाइसाइकिल मैन

जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए सोनीपत से शुरू की थी साइकिल यात्रा 

बांदा, के एस दुबे । जैविक खेती को बढावा देने के लिए सोनीपत, हरियाणा निवासी नीरज प्रजापति ने साइकिल के द्वारा 1,11,111 किमी (एक लाख ग्यारह हजार एक सौ गयाहर किमी) यात्रा का संकल्प लिया है। भारतीय कृषि में बाइसाइकिल मैन के नाम से प्रसिद्ध युवा नीरज हरियाणा से अपनी यात्रा प्रारम्भ कर राजस्थान एवं उप्र के विभिन्न कृषि विश्वविद्यालयों, अनुसंधान केन्द्रो एवं कृषकों से मिलते हुए शुक्रवार को 21000 किमी की यात्रा पूर्ण कर बांदा

कृषि विवि में मौजूद साइकिल यात्री नीरज

कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, बांदा पहुंचे। कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डा. यूएस गौतम ने बाइसाइकिल मैन को पुष्प गुच्छ एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर स्वागत एवं अभिनंदन किया। नीरज द्वारा अपने मिशन आर्गनिक बाइसाइकिल 1,11,111 किमी के बारे मे बताते हुए कहा कि किसानों, वैज्ञानिकोेें एवं अधिकारियों को मिलकर जैविक खेती को बृहद स्तर पर बढ़ावा देने के लिए कार्य करने की आवश्यकता है। नीरज ने मृदा एवं पानी की जांच के आधार पर ही जैविक खेती को अपनाने की सलाह कृषकों को अपनी यात्रा के दौरान दी। 

साइकिल यात्री को सम्मानित करते कुलपति

कुलपति ने विश्वविद्यालय के सभी वैज्ञानिकों को युवा नीरज के मिशन का हिस्सा बनने एवं जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिये आहवान किया। डा. गौतम ने बताया कि किसी भी देश को शसक्त व आगे बढ़ाने में युवा शक्ति का अहम योगदान है। उन्होने कहा कि बुन्देलखण्ड में जैविक खेती की अपार संभावनायें हैं। जैविक खेती से न सिर्फ मनुष्य स्वास्थ्य को ही फायदा है। आपुति मृदा एवं अन्य जीव भी लाभान्वित होते है। विश्वविद्यालय इस महत्व को समझते हुये विगत वर्ष से बुन्देलखण्ड के सभी सात जिलों मे जैविक कारीडोर कार्यक्रम चला रहा है। इस अवसर पर उद्यान महाविद्यालय के अधिष्ठाता डा. एसवी द्विवेदी, डा. जगन्नाथ पाठक, डा. अभिषेक कुमार यादव ने जैविक खेती व इसके लाभ पर अपने विचार व्यक्त किये। विश्वविद्यालय के अन्य वैज्ञानिकों ने नीरज कुमार के साथ जैविक खेती को बढ़ावा देने व किसानों के बीच येाजनाबद्ध तरीके से कार्य करने के लिए प्रेरित किया तथा विश्वविद्यालय में संचालित इकाइयों एवं परियोजनाओं का भ्रमण किया। इस कार्यक्रम का संचालन डा. अभिषेक कालिया द्वारा तथा धन्यवाद ज्ञापन डा. आरके सिंह द्वारा दिया गया। 


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