परिवार नियोजन के क्षेत्र में रोज नई चुनौतियां - Amja Bharat

Amja Bharat

All Media and Journalist Association

Breaking

Post Top Ad

Responsive Ads Here

Advt.

Sunday, November 22, 2020

परिवार नियोजन के क्षेत्र में रोज नई चुनौतियां

जिला महिला अस्पताल सभागार में मना खुशहाल परिवार दिवस

छोटे परिवारों की महत्ता पर डाला गया प्रकाश, परिवार नियोजन के स्थाई/अस्थाई साधनों की जानकारी दी  

हमीरपुर, महेश अवस्थी - परिवार नियोजन के प्रति आम जन को जागरूक करने तथा मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के उद्देश्य से स्वास्थ्य विभाग ने शनिवार से अनूठी पहल की है। अब से प्रत्येक माह की 21 तारीख खुशहाल परिवार दिवस के रूप में मनाई जाएगी। इसी के मद्देनजर जिला महिला अस्पताल के सभागार में गोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें महिलाओं को गर्भावस्था के साथ-साथ प्रसव के बाद बरती जाने वाली सावधानियों के विषय में विस्तार से जानकारी दी गई।

गोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में अपने विचार रखते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ.आरके सचान ने कहा कि परिवार नियोजन कार्यक्रमों का उद्देश्य आम लोगों को परिवार के प्रति उनकी जिम्मेदारी का एहसास दिलाने का भी है। जब से यह कार्यक्रम शुरू हुए हैं, तब से इसके नतीजे अच्छे आए हैं। लोगों ने छोटा परिवार सुखी परिवार के नारे को अपनाया है। लेकिन चुनौतियां कम नहीं हुई है। मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को न्यूनतम स्तर पर लाना स्वास्थ्य विभाग का मकसद है। इसलिए प्रत्येक माह की 9 तारीख को प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व कार्यक्रम का आयोजन होता है। अब से प्रत्येक माह की 21 तारीख को खुशहाल परिवार दिवस के रूप में मनाई जाएगी। उन्होंने कहा कि गर्भधारण करने से लेकर प्रसव तक एक महिला को कई प्रकार की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है, लेकिन इन कार्यक्रमों का हिस्सा बनने से ऐसी समस्याओं से पार पाया जा सकता है।

जिला महिला अस्पताल की स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ.आशा सचान ने कहा कि प्रसव पूर्व होने वाली जांचें महत्वपूर्ण होती है। इससे प्रसव के समय होने वाले खतरों को टाला जा सकता है। उन्होंने छोटे परिवारों की महत्ता भी प्रकाश डाला। परिवार परामर्शदाता निकिता ने महिलाओं को गर्भनिरोधक साधनों के विषय में जानकारी दी। उन्होंने एक बच्चे के बाद दूसरे बच्चे के बीच में तीन साल का अंतर के फायदे बताए। लॉजिस्टिक मैनेजर अजय कुमार, परिवार नियोजन विशेषज्ञ रवि प्रजापति, डॉ.नाजिश आदि ने भी अपने विचार रखे।



उच्च जोखिम गर्भावस्था वाली महिलाओं पर फोकस

परिवार नियोजन कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ.रामअवतार ने बताया कि इस पहल के तहत लक्षित समूह के परिवार नियोजन के साधन अपनाने पर खास ध्यान दिया जाएगा। इन लक्षित समूह में इस साल की पहली जनवरी के बाद प्रसव वाली वह महिलाएं जो उच्च जोखिम गर्भावस्था (एचआरपी) के रूप में चिन्हित गई थीं, उन्हें शामिल किया गया है। इसके अलावा नवविवाहित दंपति (जिनका विवाह इस साल जनवरी के बाद हुआ है) और वह योग्य दंपति जिनके तीन या तीन से अधिक बच्चे हैं। उन्होंने कहा कि आशा कार्यकर्ता ग्रामीण और शहरी क्षेत्र की लक्षित समूह की महिलाओं की लाइन लिस्टिंग करेंगी। गृह भ्रमण के दौरान लक्षित समूह के उन दंपति को चिन्हित करेंगी जो परिवार नियोजन के किसी साधन को नहीं अपना रहे हैं, उनकी काउंसिलिंग से लेकर बास्केट ऑफ च्वाइस में मौजूद साधनों से अवगत कराएंगी। इच्छुक दंपति का प्री-रजिस्ट्रेशन भी करेंगी ।



सम्मानित होंगे लाभार्थी, प्रचार-प्रसार व संवेदीकरण पर जोर

  • जनपद एवं ब्लाक स्तर पर परिवार नियोजन के स्थाई/अस्थाई विधियों के संतुष्ट लाभार्थी/दंपति को स्थानीय जनप्रिनिधियों के द्वारा सम्मानित कराया जाएगा और इन्हीं संतुष्ट लाभार्थियों या दंपतियों के माध्यम से समुदाय में परिवार नियोजन के संदेश को प्रचारित कराया जाए।
  • प्राइवेट नर्सिंग होम, गैर सरकारी संस्था, आशा, एएनएम, प्रोग्राम मैनेजर आदि जो परिवार नियोजन के क्लाइंट को प्रोत्साहित या सेवाएं प्रदान किये जाने में उत्कृष्ट सेवा या योगदान दिए हैं, उन्हें भी प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया जाए।  
  • राज्य से लेकर गांव स्तर की सभी स्वास्थ्य इकाइयों पर परिवार नियोजन को बढ़ावा देना। मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाना।
  • ग्राम स्वास्थ्य एवं पोषण दिवस (वीएचएनडी) का दिन यदि 21 तारीख को पड़ता है तो वह उस दिवस को परिवार नियोजन के साधनों पर के्द्रिरत करते हुए खुशहाल परिवार दिवस को बड़े पैमाने पर मनाएंगी।
  • शहरी क्षेत्र में जहां आशा कार्यकत्र्ता नहीं हैं वहां पर शहरी एएनएम द्वारा यह गतिविधियां संपादित की जाएंगी।


No comments:

Post a Comment

Post Bottom Ad

Pages