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Sunday, November 22, 2020

दीन को नई जिन्दगी बक्शने वाले महान संत थे बड़े पीर साहब: कारी फरीद

गरीबों, बेवाओं व बेसहारा लोगांे की करें मदद 

27 नवम्बर को मनाई जायेगी ग्यारहवीं शरीफ

फतेहपुर, शमशाद खान । पांचवी सदी हिजरी के सबसे बड़े वली सरकार गौसे आजम अब्दुल कादिर जीलानी बड़े पीर साहब दीन इस्लाम के बहुत बड़े अलम्बरदार और दीन को नई जिन्दगी बक्शने वाले महान संत पुरूष थे। इसलिए आज पूरी दुनिया उन्हें मोहीउद्दीन जिसका अर्थ है दीन को जिन्दा करने वाला के नाम से याद करती है। 

यह बात काजी-ए-शहर कारी फरीद उद्दीन कादरी ने कही। उन्होने कहा कि ये महीना सरकार गौसे आजम से सम्बन्धित है। इसलिए गौस पाक क मानने वालों को चाहिए कि उनकी याद में गरीबों, बेवाओं व बेसहारा लोगों की मदद करें। उनकी शिक्षाओं पर अमल करंे। उन्होने अपने इल्मो फजल के माध्यम से भटकती हुयी इंसानियत को राहे रास्त पर लगाया। सूफी वली के साथ-साथ वह बहुत बड़े शिक्षाविद थे। उन्होने अपने जीवनकाल में अनेकांे

शहरकाजी कारी फरीद उद्दीन।

पुस्तकंे लिखकर लोगांे को जिहालत के अंधेरे से उजाले में लाकर खड़ा किया। कुरआन व हदीस को इस तरह आसान करके पेश किया कि आज पूरी दुनिया कुरआन व हदीस से मतलब निकालकर अपने मसाएल हल कर लेते हैं। सारी दुनिया के मुसलमानों पर ये एक बड़ा एहसान है। मौलाना कादरी ने कहा कि गौसे आजम अब्दुल कादिर जीलानी गरीबों को खाना खिलाने में बहुत खुशी महसूस करते। अगर दुनिया का सारा खाना उन्हें अता कर दिया जाता तो वह सब गरीबों को लुटा देते। आप हमेशा कहते मेरे हाथों में पैसा बिल्कुल नहीं ठहरता अगर सुबह मेरे पास हजार दिनार हों तो शाम तक मेरे पास एक न बचे। यानी सब गरीबों, मिस्कीनों, बेवाओं पर खर्च हो जाते। उन्होने कहा कि गौसे आजम ने नाजुक से नाजुक हालात में भी नमाज व रोजे की पाबंदी की है। लिहाजा उनके मानने वालों को चाहिए कि सच्ची पैरवी यही है कि नमाज की पाबंदी हर कीमत पर करें क्योंकि उनकी शिक्षा पर चलकर ही दुनिया व आखेरत में कामयाबी हासिल की जा सकती है। उन्होने बताया कि ग्यारहवीं शरीफ 27 नवम्बर को होगी। 


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