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Tuesday, November 17, 2020

गधा मेला: खच्चर-गधों की हुई सौदेबाजी

फिल्मी हस्तियों के नाम के गधे, खच्चर रहे आकर्षण का केन्द्र

चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरि। देश क¢ गिने-चुने स्थान¨ं पर लगने वाला गध¨ं एवं खच्चर¨ं का मेला इस बार भी परम्परागत ढंग से चित्रकूट के नया गांव सतना क्ष्¨त्र में मन्दाकिनी तट पर लगा। जिसमें गध¨ं की खूब मांग रही। इस बार मादा गध¨ं व नर खच्चर¨ं की खासी मांग रही। नर खच्चर 5 से 25 हजार रूपये में बिक¢।

गधा मेला मंे इस वर्ष हजारों की तादाद में गध्¨ एवं खच्चर¨ं क¨ लेकर व्यापारी फतेहपुर, लखनऊ, ग्वालियर, सागर, पन्ना, मथुरा, ध©लपुर, पट्टी प्रतापगढ़, रायबरेली व ऊंचाहार से आये। इस मेले में सबसे खास बात ह¨ती है कि स©दागर अपने जानवर¨ं क¨ यहां द¨ दिन पहले त¨ बाजार में ले आते है, लेकिन स©देबाजी परीवा क¢ ही दिन करते है। इस दिन क¨ स©दागर व जानवर¨ं क¢ मालिक खासत©र पर शुभ मानते है। उल्लेखनीय

बाजार में खड़े खच्चर व गधे।

बात यह है कि गधांे का यह मेला देश में उज्जैन, ध©लपुर व चित्रकूट में ऐतिहासिक माना जाता है लेकिन बदलते समय तथा जरूरत क¢ चलते अब यह मेला अन्य स्थान¨ं पर भी लगने लगा है। मन्दाकिनी तट पर इन जानवर¨ं की स©देबाजी का अन्दाज भी खासा जुदा है। यह लोग परम्परागत ढंग से मन्दाकिनी का जल हाथ में लेकर व एक रूपये का सिक्का कपड़े में छुपाकर परीवा क¨ दिनभर स©दा पक्का करते रहते है। परीवा क¢ दिन जानवरों क¨ खूंटे से ख¨लकर नये स©दे क¢ मुताबिक खरीददार अपने गन्तव्य क¨ ले जाते देख्¨ गये। मेला में कुछ अवांछनीय तत्व भी नजर आये, ज¨ स©दागर¨ं क¨ गुमराह कर उनसे अपना उल्लू सीधा करते रह¢। नगर पंचायत नया गांव से मप्र से इस स©देबाजी क¢न्द्र का प्रतिवर्ष की भांति इस बार भी ठ¢का हुआ था। यहां ल¨ग निर्धारित शुल्क से अधिक धनराशि खरीददारों व स©दागर¨ं से वसूल करते देख्¨ गये। मेला में सोमवार को फतेहपुर क¢ व्यापारी ने 30 हजार में खच्चर का स©दा किया। मेले में फिल्म अभिनेताअ¨ं क¢ नाम क¢ खच्चर¨ं की खासी मांग रही। फिल्मी हस्तियों के नामों के गधे खासा आकर्षण का केन्द्र रहे। हालांकि मेला में इस बार राजस्थानी तथा पूर्वांचल क¢ मादा गध¨ं व नर खच्चर की खासी मांग देखी गयी। गध¨ं क¢ स्थानीय व्यापारी ने बताया कि मेले में गधा अ©र गधी की शादी का भी रिवाज है। यह मेला ऐतिहासिक है, ज¨ देश क¢ गिन्¨-चुने गधा मेल¨ं में शुमार है। इस मेला का गधा व खच्चर¨ं क¢ खरीददार सालभर इंतजार करते हैं।


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