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Wednesday, November 11, 2020

बुआई से पूर्व एवं बाद मे उचित प्रबंधन से मिल सकता है अधिक लाभ: कृषि वैज्ञानिक

बांदा, के एस दुबे । बुंदेलखंड की मृदाओं में फास्फोरस व सल्फर की कमी है तथा इसका उचित प्रबंधन तिलहन व दलहन फसलों के लिए आवश्यक है। इसके लिये आवश्यक है कि  गोबर की खाद 5 टन/ हेक्टेयर अथवा 2 टन/हेक्टेयर वर्मीकम्पोस्ट का प्रयोग बुआई से 10-20 दिन पहले करे। सरसों की बुआई हेतु सिंचित दशा में 80ः40ः40ः20 नत्रजन, फास्फोरस, पोटाश और सल्फर (की.ग्रा./ हे) की दर से प्रयोग करे। असिंचित क्षेत्र में 50ः25ः25ः20 (की.ग्रा./हे) की दर से नत्रजन, फास्फोरस, पोटाश व सल्फर का प्रयोग करें। बीज को ताकत (कैप्टान 70ः हेक्साकोनाजोल 5) अथवा थिरम 2 ग्राम प्रति किलो ग्राम बीज की दर से बीजोंउपचार करके बोयें। सिंचित क्षेत्रों में फास्फोरस, पोटाश व सल्फर की पूरी मात्रा तथा नत्रजन की आधी मात्रा बुआई के समय प्रयोग करें तथा नत्रजन की शेष आधी मात्रा प्रथम सिंचाई के समय प्रयोग करें. असिंचित क्षेत्रों में उर्वरकों की पूरी मात्रा बुआई के समय प्रयोग करें। चने की बुआई से पूर्व बीज को राइज़ोबियम कल्चर से उपचारित करने के पश्चात बुआई करें. 20ः60ः20ः20 (कि0ग्रा/हे) की दर से नत्रजन फास्फोरस पोटाश व सल्फर का प्रयोग बुआई के समय करे। वर्तमान मौसम रबी फसलों की बुआई के लिए उपयुक्त है। दलहनी फसलों जैसे चना, मटर, मसूर आदि में जैव उर्वरकों का प्रयोग लाभदायक होता है। दलहनी फसलों चना, मटर एवं मंसूर की फसल की सन्तुति किस्मों के प्रमाणित बीज, उपचार हेतु कवकनाशी अथवा जैव कवकनाशी व राइजोबियम कल्चर प्रबन्ध कर लें।

विवि में स्वच्छता अभियान के तहत सफाई करते विवि कर्मी

बुवाई से पूर्व बीज को वीटावैक्स पावर (थिरम 37.5 $ 37.5 कारवाक्सिन)  अथवा  ताकत (कैप्टान 70 हेक्साकोनाजोल 5) 2 ग्राम प्रति किलो ग्राम बीज की दर से बीजोंउपचार करके बोयें अथवा जैविक कवकनाशी ट्राइकोडरमा 5 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज की दर उपचारित करें तरल जैव उर्वरको की १०-२० मिलीलीटर प्रति किलोग्राम बीज के अनुसार प्रयोग करना श्रेयस्कर है. फसलों को प्रारंभिक अवस्था में खरपतवारों की प्रतिस्पर्धा से बचने के लिए दलहनी एवं तिलहनी फसलों की बुआई के दो-तीन दिन के भीतर पेंडीमिथलीन नामक दवा का ३.३ लीटर प्रति हेक्टेयर की दर से उचित नमी की दशा में छिड़काव करनी चाहिए। गेंहू की फसल को कंडुवा आदि रोग से बचाव हेतु बुआई से पूर्व बीज को वीटावैक्स पावर (कार्बाक्सिन 37.5 थीरम 37.5) से दो ग्राम प्रति किलोग्राम बीज की दर से उपचारित करके बोएं। पशुप्रबंधन हेतु सर्दी के मौसम मे पशुओ का विशेष ध्यान रखना चाहिये। सर्दियों के मौसम में अधिकतर भैंस गर्मी (हीट) पर आती हैं, पशुपालकों को भैंस में गर्मी के लक्षण दिखने पर 12-24 घंटे के बीच में दो बार उत्तम नस्ल के भैंसे से या नजदीक के कृत्रिम गर्भाधान केंद्र से ही ग्याभिन कराएं। यदि भैंस ब्याने के 60-70 दिनों तक पुनः हीट में न आये तोह नजदीक के पशु चिकित्सक से जांच कराएं। भैंस व गाय को उचित समय पर हीट में लाने के लिए उन्हें नियमित रूप से 50-60 ग्राम विटामिन युक्त खनिज लवण मिश्रण अवश्य खिलाना चाहिए। 


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