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Sunday, November 1, 2020

खून से खत लिखकर बुन्देलखण्ड राष्ट्र समिति ने मनाया काला दिवस

हम खून से खत लिखेंगे, प्रधानमंत्री आप बुन्देलखण्ड राज्य दो

बुंदेलखंड को राज्य बनाकर ऐतिहासिक भूल सुधारें प्रधानमंत्री- प्रवीण

फतेहपुर, शमशाद खान । बुन्देलखण्ड राष्ट्र समिति ने रविवार को काला दिवस के रूप में मनाया। पृथक बुंदेलखंड राज्य की मांग को लेकर सुभाष चन्द्र बोस स्मारक पत्थरकटा चैराहे पर केन्द्रीय अध्यक्ष प्रवीण पाण्डेय भारत के नेतृत्व में आज प्रधानमंत्री के नाम खून से खत लिखकर एक नवंबर को काला दिवस के रूप में मनाया गया और बुंदेलखंड राज्य बनाकर उस ऐतिहासिक भूल को सुधारने की अपील किया। जिसके तहत आज ही के दिन बुंदेलखंड के दो टुकड़े करके उसके वजूद को खत्म करने की कोशिश की गयी थी।

पत्थरकटा चौराहे पर खून से पत्र लिखकर प्रदर्शन करते समिति के कार्यकर्ता।

बुन्देलखण्ड राष्ट्र समिति के कार्यकर्ताओं ने काले कपड़े पहनकर धरना दिया और अपने खून से खत लिखा। बीआरएस के केन्द्रीय अध्यक्ष इं प्रवीण पांडेय भारत ने बताया कि 1947 में जब देश आजाद हुआ, तब बुंदेलखंड राज्य था और नौगांव इसकी राजधानी थी। चरखारी के कामता प्रसाद सक्सेना बुंदेलखंड राज्य के मुख्यमंत्री थे लेकिन 12 मार्च, 1948 को बुंदेलखंड का नाम बदलकर विन्ध्य प्रदेश कर दिया गया और इसमें बघेलखंड को जोड़ दिया गया। एक नवंबर, 1956 बुंदेलखंड के इतिहास का वो काला दिल है जब बुंदेलखंड के दो टुकड़े कर उसको भारत के मानचित्र से पूरी तरह मिटा दिया गया। आधा हिस्सा उत्तर प्रदेश और आधा हिस्सा मध्य प्रदेश में शामिल कर दिया गया था। तभी से बुंदेलखंड दो बड़े राज्यों के बीच पिस रहा है। तत्कालीन नेहरू सरकार ने प्रथम राज्य पुनर्गठन आयोग के सदस्य सरदार के एम पणिक्कर की बुंदेलखंड राज्य बनाए रखने की सिफारिश को दरकिनार करते हुए यह फैसला लिया था। आयोग ने 30 दिसंबर, 1955 को जो रिपोर्ट केन्द्र सरकार को सौंपी थी, उसमें 16 राज्य और 3 केन्द्र शासित प्रदेश बनाने की सिफारिश की थी। जिसमें थोड़ा बदलाव करके नेहरू सरकार ने 14 राज्य व 6 केन्द्र शासित प्रदेश बना दिए। अगर उस समय बुंदेलखंड के सांसद, विधायक सरकार के इस फैसले का विरोध कर देते तो आज हम लोग देश के सबसे पिछड़े इलाके में न गिने जाते। 

इं प्रवीण पाण्डेय भारत ने कहा कि आजादी के बाद बुंदेलखंड के साथ लगातार भेदभाव होता रहा। हम लोग एक नवंबर को खून से खत लिख कर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को 64 साल पहले बुंदेलखंड के साथ हुए अन्याय से अवगत कराना चाहते हैं और उनसे अपील करना चाहते हैं कि जिस तरह प्रधानमंत्री ने जम्मू कश्मीर राज्य से धारा 370 हटाकर एक ऐतिहासिक भूल सुधारी है। वैसे ही वे खंड खंड बुंदेलखंड को एक कर इस ऐतिहासिक भूल को भी सुधारें। धरने में जिलाध्यक्ष युवा मोर्चा अंशू सिंह, महिला मोर्चा विभा अग्निहोत्री, उपाध्यक्ष रिशु केसरवानी, मंत्री प्रसून तिवारी, शक्ति सामंत, ऋषि साहू, श्रेष्ठ रस्तोगी, दिलीप गुप्ता, श्यामा सिंह, हनुमान त्रिपाठी आदि मौजूद रहे। 


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