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Wednesday, November 18, 2020

अमौली ब्लॉक के मठ गांव में वर्षों से चली आ रही एक अनोखी परम्परा

अमौली-फतेहपुर, शमशाद खान । अमौली क्षेत्र के एक गांव में आज भी प्राचीन काल से चली आ रही प्रथा आज भी जीवन्त है। इस प्रथा को वर्तमान में गाँव के 19 सदस्य पूर्वजो से मिली विरासत को आगे बढ़ा रहे है।। अमौली कें बबइ गांव के मजरा मठ गाँव के 19 लोग नंगे पैर सभी अपने हाथ मे मोर पंख का मुठ्ठा लेकर पैदल 13 किमी दीवाली की सुबह से व्रत रखते हुए ढोल बाजो व परिजनों के साथ जमुना नदी स्नान के लिए जाते है। स्नान पश्चात वापस गाँव आकर वर्षों से निर्धारित स्थान में मोर पंख को रखते है। दीवाली की शाम को सभी मोर पंख को पूजने पहुँचते है। दूसरे दिन अर्थात् गोवर्धन पूजा के दिन कृष्ण भक्तों की टोली मोर पंख के साथ तालाब में स्नान करने

मोर पंख व गाय के बछले के साथ भ्रमण करते श्रद्धालु ग्रामीण।

पहुँचती है। स्नान के पश्चात गायों की पूँछ के बालों से बनी नोई को बछड़े के समान पहनकर सभी 19 भक्त एक साथ तालाब में एक सांस में एक बार ही पानी पीते है। इसके पश्चात् निर्धारित स्थान पीपल के पेड़ के नीचे बछिया पूजन करके गाँव मे चारे के खेत मे गौवें को चरने के लिए छोड़ा जाता है, उसके पीछे गाँव के सभी जानवर खेत मे चरने के लिए छोड़े जाते है। उसके बाद सभी भक्त उस खेत की 7 बार परिक्रमा लगाते हुए बछिया पूजन के संकल्प के साथ सभी का निर्जला व्रत ब्राम्हण द्वारा संकल्प कराकर शुरू हो जाता ह। इसके बाद यह सभी कृष्ण भक्त अपने गांव में देवारी (लाठियों के साथ ) का खेल में शामिल होकर 5 गांव की परिक्रमा करते रास्ते मे प्रसाद वितरित करते हुए आगे बढ़ते जाते है। इन पांच गाँव मे भी देवारी का खेल खेला जाता है।

सांयकालीन वापस गाँव 

अमौली-फतेहपुर। सभी भक्त वापस गांव में काली जी के मंदिर में ब्राम्हण द्वारा मौन व्रत को निर्ब्रत कराकर जयघोष के साथ समाप्त किया जाता है। इन सभी भक्तों की माता/बहने सभी को पानी पिलाकर व्रत तुड़वाती है। तत्पश्चात गाँव में समूह को भोज का आयोजन कर सभी को प्रसाद वितरित करता है।

विशेष महत्व 

अमौली-फतेहपुर। जमुना स्नान जाने में वाहनों का खर्च, चारे के खेत, प्रसाद का पैसा इन कृष्ण भक्तों द्वारा ही वहन किया जाता है। कुल 13 वर्ष में इस पूजा में 12 वर्ष अपने गांव में तथा 13वें वर्ष यह व्रत के लिये वृन्दावन में  जाना पड़ता है। वहाँ भी इसी प्रकिया के तहत पूजा कर संकल्प को पूर्ण किया जाता है। कृष्ण भक्तों को बछड़े की नोई, जिसको पहन कर तालाब में पानी पीते है, गाय के पूँछ के बाल से बनाई जाती है।।’

उद्देश्य/मान्यता 

अमौली-फतेहपुर। बुजुर्ग बताते हैं कि भगवान श्रीकृष्ण का ग्वालो के साथ गाय चारने की परम्परा को कृष्ण उपासना करते है जो 13 वर्षों तक इस अनुष्ठान को पूरा कर लेता है, उसकी मनोकामना पूर्ण होती है। गाँव मे सदियों से चली आ रही परंपरा को लोग अभी भी कायम कर रखा है। गाँव के यह 19 भक्त अमर सिंह (गुरु जी), सौरभ सिंह, त्रिलोकचंदी, राजबीर सिंह, कप्तान सिंह, संदीप सिंह, अंकित सिंह, रिंकू कश्यप, अनिल कश्यप, चंद्रबाबू यादव, देवीचरन कश्यप, अमित कुमार, अंकित कुमार, आशीष कुमार, श्यामू कुमार, रोहित कुमार, पुष्पेंद्र यादव, अवधेश कश्यप, फूल कुमार, विभू कुमार इस परम्परा को आगे बढ़ा रहे है।


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