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Friday, November 6, 2020

महाराष्ट्र सरकार के खिलाफ अधिवक्ता परिषद ने राष्ट्रपति को भेजा ज्ञापन

सरकार को बर्खास्त कर राष्ट्रपति शासन लगाये जाने की मांग 

फतेहपुर, शमशाद खान । महाराष्ट्र सरकार पर दमनकारी नीतियों से लोकतांत्रिक व्यवस्था को ध्वस्त किये जाने का आरोप लगाते हुए अधिवक्ता परिषद के पदाधिकारियों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर राष्ट्रपति कोे सम्बोधित एक ज्ञापन अपर उपजिलाधिकारी को सौंपकर महाराष्ट्र सरकार को बर्खास्त कर राष्ट्रपति शासन लगाये जाने की मांग की। 

अधिवक्ता परिषद के जिलाध्यक्ष रवीन्द्र परमार एवं महासचिव संतोष कुमार त्रिपाठी की अगुवई में पदाधिकारी कलेक्ट्रेट पहुंचे और अपर उपजिलाधिकारी को एक ज्ञापन सौंपकर कहा कि महाराष्ट्र राज्य सरकार की दमनकारी नीतियों से लोकतांत्रिक व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। शासन तंत्र निरंकुश होकर सत्ता पक्ष के साथ विद्वेषकारी नीतियों द्वारा जनता की आवाज का कुचलने पर अमादा है। निर्दोष व्यक्तियों का बिना वैधानिक प्रक्रिया

अपर उपजिलाधिकारी को ज्ञापन देने जाते परिषद के पदाधिकारी।

के जेल में बंद किया जा रहा है। धार्मिक आधार पर व्यक्तियों की भीड़ तंत्र द्वारा हत्या की जा रही है। जिसमें पुलिस कर्मी तक संलिप्त हैं। लोकतंत्र के चैथे स्तंभ को भी कुचला जा रहा है। जनता की आवाज उठाने पर वरिष्ठ पत्रकार अर्णब गोस्वामी को गैर कानूनी तरीका अपनाकर बल प्रयोग करके गिरफ्तार कर पुलिस हिरासत में मारापीटा गया। महाराष्ट्र सरकार पूर्णतः निरंकुश होकर संवैधानिक व्यवस्था के विपरीत कार्य कर रही है। राज्य में न्याय तंत्र विफल हो चुका है तथा संवैधानिक ढांचा चरमरा गया है। राज्य सरकार शासन का संवैधानिक नैतिक व विधिक अधिकार खो चुकी है। जिसेे बर्खास्त कर राष्ट्रपति शासन लागू किया जाना राज्य एवं राष्ट्र के हित में होगा। राष्ट्रपति से मांग की गयी कि महाराष्ट्र सरकार को बर्खास्त कर राष्ट्रपति शासन लागू कर संवैधानिक व्यवस्था स्थापित की जाये। इस मोके पर हंसराज सिंह, धर्मेन्द्र मिश्रा, लक्ष्मीकांत, शैलेन्द्र सिंह, आशुतोष शुक्ला, नागेन्द्र सिंह, संदीप पाण्डेय, कमलेश मिश्रा, अशोक शुक्ला, शैलेन्द्र सिंह, आदि मौजूद रहे। 


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