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Tuesday, November 24, 2020

तुलसी विवाह

कार्तिक शुक्ल एकादशी के दिन ही लोग तुलसी विवाह का आयोजन करते है। कुछ स्थानांे पर कार्तिक शुक्ल पूर्णिमा को भी तुलसी विवाह का आयोजन करते है।  तुलसी वैष्णवों के लिये पूजनीय पौधा है। भगवान के श्रीविग्रह शालीग्राम के साथ तुलसी जी का विवाह धूम-धाम से करते है। इन दिन लोग तुलसी के गमले को गेरू  आदि से रंग कर गन्ने का मण्डप बनाकर तुलसी के ऊपर चुनरी चढ़ाते है। गमले को साड़ी के लपेट कर तुलसी जी को चूड़ी


पहनाकर उनका सिंगार करते है। गणपति, शालीग्राम जी का पूजन कर ‘तुलस्यै नमः’ का जाप करते है। नारियल दक्षिणा के साथ टीका के रूप में रखते है तथा भगवान शालीग्राम के विग्रह का सिंहासन हाथ में लेकर तुलसीजी के सात परिक्रमा कराकर आरती के पश्चात् विवाह उत्सव पूर्ण करते है। विवाह के समान मंगल गीत भी गाये जाते है यदि लड़के या लड़कियों के विवाह, दामपत्य सुख में विध्न हो तो माता तुलसी का पूजन करने से कष्ट दूर होता है एवं घर में सुख-शन्ति की वृद्वि होती है

 - ज्योतिषाचार्य-एस.एस.नागपाल, स्वास्तिक ज्योतिष केन्द्र, अलीगंज, लखनऊ

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