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Monday, November 30, 2020

आखिर किसान बिल पर बवाल क्यों.......

देवेश प्रताप सिंह राठौर 

(वरिष्ठ पत्रकार )

...........सड़क पर किसान  और संसद में नेता तीन विधेयकों को लेकर हाय-तौबा कर रहे हैं. दरअसल सोमवार को लोक सभा  में तीन बिल पेश किए गए. मंगलवार को उनमें से एक बिल पास हो गया और बाकी दो विधेयक कल यानी गुरुवार को पारित हुए। 

पहला बिल है = कृषि उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) बिल

दूसरा बिल है = मूल्य आश्वासन और कृषि सेवाओं पर किसान, संरक्षण एवं सशक्तिकरण बिल

तीसरा बिल है = आवश्यक वस्तु संशोधन 

विरोध इन तीनों ही विधेयकों पर है, किसान और विपक्ष तो विरोध कर ही रहे थे, NDA सरकार के घटक अकाली दल शिरोमणि से मंत्री हरसिमरत कौर बादल सिफा दे दिया गया सड़क से संसद तक किसान बिल पर संग्राम है कुछ किसानों को सरकार का कृषि विधेयक नापसंद है. वो कहते हैं कि सरकार का कृषि विधेयक किसानों के हित में नहीं है. विपक्षी दलों की राय भी यही है और वो सरकार का जबरदस्त विरोध भी कर रहे हैं बावजूद इसके दो कृषि विधेयक गुरुवार यानी कल लोकसभा में पारित हो गए और एक लोकसभा में मंगलवार को पारित हुआ था. विधेयक के विरोध में चिंगारी सरकार के अंदर भी सुलग रही थी. किसान बिल के विरोध की ये चिंगारी थी शिरोमणि अकाली दल से मंत्री हरसिमरत कौर बादल. विरोध इतना कि हरसिमरत कौर ने मंत्री पद से इस्तीफा ही दे दिया. उन्होंने ट्वीट किया है, 'मैंने केंद्रीय मंत्री पद से किसान विरोधी अध्यादेशों और बिल के खिलाफ इस्तीफा दे दिया है. किसानों की बेटी और बहन के रूप में उनके साथ खड़े होने पर गर्व है.।अबसवाल ये उठता है कि क्या हरसिमरत


कौर का इस्तीफा किसान बिल के मुद्दे पर एनडीए में फूट के तौर पर देखा जा रहा है । जबकि हरसिमरत कौर ने इस्तीफा देना उनकी मजबूरी रहा है क्योंकि वह उस जगह से आती है पंजाब जहां पर इस बिल का विरोध बहुत तेजी से हो रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने किसान विधेयक पर ट्वीट किया और कहा, 'लोकसभा में ऐतिहासिक कृषि सुधार विधेयकों का पारित होना देश के किसानों और कृषि क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण क्षण है. ये विधेयक सही मायने में किसानों को बिचौलियों और तमाम अवरोधों से मुक्त करेंगे।प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि बिल किसानों को सशक्त बनाएगा. उन्होंने कहा, 'इस कृषि सुधार से किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए नए-नए अवसर मिलेंगे, जिससे उनका मुनाफा बढ़ेगा. इससे हमारे कृषि क्षेत्र को जहां आधुनिक टेक्नोलॉजी का लाभ मिलेगा, वहीं अन्नदाता सशक्त होंगे।प्रधानमंत्री मोदी ने नाम तो किसी का नहीं लिया लेकिन इतना तो कहा कि किसानों को भ्रमित किया जा रहा है. उन्होंने कहा, 'किसानों को भ्रमित करने में बहुत सारी शक्तियां लगी हुई हैं. मैं अपने किसान भाइयों और बहनों को आश्वस्त करता हूं कि एमएसपी और सरकारी खरीद की व्यवस्था बनी रहेगी. ये विधेयक वास्तव में किसानों को कई और विकल्प प्रदान कर उन्हें सही मायने में सशक्त करने वाले हैं।अब बारी विपक्ष की थी. लिहाजा राहुल गांधी ने किसान बिल के विरोध में ऊंचा सुर लगाया. राहुल ने कहा, 'किसान ही हैं जो खरीद खुदरा में और अपने उत्पाद की बिक्री थोक के भाव करते हैं. मोदी सरकार के तीन 'काले' अध्यादेश किसान-खेतिहर मज़दूर पर घातक प्रहार हैं ताकि न तो उन्हें एमएसपी व हक़ मिलें और मजबूरी में किसान अपनी जमीन पूंजीपतियों को बेच दें। विपक्ष द्वारा किसानों को भड़कााया जा रहा है।ये तो रही किसान बिल पर बात राजनीति की. अब आप ये समझिए कि किसान विरोध क्यों कर रहे हैं।किसान वैसे तो तीनों अध्यादेशों के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहे हैं लेकिन सबसे ज्यादा आपत्ति उन्हें पहले अध्यादेश के प्रावधानों से है. उनकी समस्या मुख्य रूप से व्यापार क्षेत्र, व्यापारी, विवादों का हल और बाजार शुल्क को लेकर हैं. किसानों ने आशंका जताई है कि जैसे ही ये विधेयक पारित होंगे, इससे न्यूनतम समर्थन मूल्य प्रणाली को खत्म करने का रास्ता साफ हो जाएगा और किसानों को बड़े पूंजीपतियों की दया पर छोड़ दिया जाएगा.नए विधेयकों के मुताबिक अब व्यापारी मंडी से बाहर भी किसानों की फसल खरीद सकेंगे. पहले फसल की ख़रीद केवल मंडी में ही होती थी. केंद्र ने अब दाल, आलू, प्याज, अनाज और खाद्य तेल आदि को आवश्यक वस्तु नियम से बाहर कर इसकी स्टॉक सीमा समाप्त कर दी है. इसके अलावा केंद्र ने कॉन्ट्रैक्ट फॉर्मिंग को बढ़ावा देने पर भी काम शुरू किया है.सान विधेयकों पर विपक्षी दलों का तर्क है कि ये विधेयक न्यूनतम समर्थन मूल्य प्रणाली को कमजोर कर देगा और बड़ी कंपनियां किसानों के शोषण के लिए स्वतंत्र हो जाएंगी, जबकि कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने इन विधेयकों को परिवर्तनकारी और किसानों के हित में बताते हुए कहा कि किसानों के लिए एमएसपी प्रणाली जारी रहेगी, मैसेज बिल किसान विरोधी बिल नहीं है किसान की स्वायत्तता और लाभ के स्थित को अधिक सट्टा द्वारा बताया गया पंजाब के किसान इस चीज को मानने को तैयार नहीं हो रहे हैं वैसे मेरी राय में किसान जो बिल है और किसान के हित में है जो लोग दलाल थे जिनकी दलाली से अरबपति बने बैठे हुए किसान आज भी गरीब है वह लोग इस बिल को भड़काने का काम कर रहे हैं, और किसान की आड़ में वह अपनी को मजबूत करने की स्थिति पैदा कर रहे हैं। जबकि किसान बिल किसान के हित में है बिचौलियों और दलालों के हित में नहीं है इसलिए बिल वर्चस्व रखने वाले दलाल किसानों को भड़का रहे हैं। पहले इस बिल को पूर्ण रूप से पढ़ें और समझे जिस तरह से भड़काया जा रहा है कि प्राइवेट संस्था को किसान की फसल खरीदने का दायित्व दिया जाएगा और सरकार द्वारा जो निर्धारित है मूल्यों समाप्त के दौर से स्थित पैदा होगी जो हमें न्यूनतम धनराज किसान जो रेट निर्धारित करती है वह किसान को उतना लाभ प्राइवेट संस्थाएं नहीं दे सकेंगे बहुत सी चीजें हैं जो लोगों को भ्रमित करने का कारण अपने हित हित को देखते हुए किसानों को भड़काने का काम किया जा रहा है जबकि यह वास्तव में यह बिल इतना विरोधी नहीं है कितना किसान करो ना कॉल में धरना प्रदर्शन किया जा रहा है।आज दिल्ली में कोरोना संक्रमित लोग कितने तेजी से बढ़ रहे हैं पूरे देश में कोरोना संक्रमित के समय इस तरह से किसान धरना प्रदर्शन दिल्ली में इकट्ठे होकर अपनी जिद पर अड़े हैं उन्हें आज के समय को देखते हुए इतनी जल्दी इस तरह से भीड़ इकट्ठी करने की जरूरत नहीं करनी चाहिए थी ।क्योंकि कोरोना आज बहुत तेजी से बढ़ रहा है देश से लेकर विदेश तक जो किसानों के हित में नहीं है आम जनमानस के हित में आज के दौर को देखते हुए धरना प्रदर्शन करना उचित नहीं है।

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