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Thursday, November 19, 2020

वाहन चेकिंग तक सीमित यातायात माह, कागजों पर सिमटा अभियान

जाम से लोग हलकान हर चैराहे पर वाहनो की लगती कतार

फतेहपुर, शमशाद खान । नवम्बर माह को यातयात माह के रूप में लोगो को यातायात नियमो के प्रति जागरूक कराने व उनका पालन कराये जाने के लिये मनाया जाता है लेकिन जनपद में यातयात माह महज दिखावा बनकर रह गया है। जिला प्रशासन द्वारा यातयात माह की धूमधाम से शुरुआत की गयी थी लेकिन लोगों में जागरूकता फैलाना दूर की बात है पुलिस सिर्फ चैराहो पर वाहन चेकिंग तक ही सीमित होकर रह गयी है। जबकि शहर में सड़कों पर लगने वाला जाम लोगो का सुकून छीन रहा है। शहर के रोडवेज बस स्टॉप, ज्वालागंज चैराहा, बाकरगंज, निबंधन कार्यालय, सदर अस्पताल तिराहा, पटेल नगर से आईटीआई रोड, वर्मा तिराहा, देवीगंज स्थित गाजीपुर बस स्टॉप, राधानगर जैसे मार्गो पर आम आदमी का निकलना हर समय दूभर रहता है। वाहनो के जाम से आम जनमानस का निकल कर अपने-अपने गंतव्य तक जाना बेहद कठिन एवं एक चुनौती जैसा बनता जा रहा है। सड़को पर दोनों ओर अवैध रूप से वाहनो की पार्किंग से जाम की स्थिति और गहरा जाती है। वाहनों की कतारें

जीटी रोड पर लगे जाम में फसे वाहन।

लगने से लोग जहा के तहां फंस जाते है और इसमें परिवार को लेकर जाने वाले निजी वाहनों के अलावा मरीजों को ले जाने वाली गाड़िया भी होती है। शहर में जाम से सबसे बुरी हालत ज्वालागंज रोडवेज बस स्टॉप से लेकर सदर अस्पताल तिराहा तक है जहां रोडवेज बसड्डा, बाकरगंज चैराहा, पुरानी तहसील स्थित रजिस्ट्री ऑफिस और सदर अस्पताल के पास हर समय जाम जैसी स्थिति बनी रहती है। यातायात को नियंत्रित करने के लिये पुलिसकर्मी तो रहते है लेकिन इन पुलिसकर्मियों की संख्या इतनी नही होती कि वह यातायात नियंत्रित कर सके। जबकि यातयात नियंत्रित करने के लिये लगाया गया बाकी का पुलिस बल केवल वाहनो को चेकिंग में ही लगा रहता है। प्रतिबर्ष नवम्बर माह को यातायात जागरूकता माह के रूप के मनाया जाता है। हर वर्ष यातयात के प्रति लोगो मे जागरूकता अभियान चलाकर उन्हें ट्रैफिक नियमो की जानकारी देने के साथ ही दुर्घटनाएं रोकने के लिये जरूरी सावधानी एव बचाव के तरीको से लोगो को अवगत कराया जाता है। साथ ही इस माह की यातयात बेहद चाक चैबंद व्यवस्था भी बनाई जाती है और इसे वर्ष भर लागू भी कराया जाता है। परंतु इस वर्ष यातायात माह में भी जगह जगह जाम की समस्या जस की तस बनी हुई है जबकि यातायात माह में जागरूकता अभियान महज कागजों में सिमट कर रह गया है। सड़को के दोनों ओर वाहनो की अवैध पार्किंग हो या धुंआ फेंकते हुए वाहन हो शायद ही विभाग को नजर आ रहे हो। जबकि यातायात की जिम्मेदारी संभालने वाली पुलिस केवल वाहनो की चेकिंग तक सीमित होकर रह गयी है।


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