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Tuesday, November 17, 2020

पंजाबी भगवान आश्रम में श्रद्धालुओं ने चखा प्रसाद

चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरि। पंजाबी भगवान आश्रम में अन्नकूट महोत्सव धूमधाम से मनाया गया। जिसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं, साधु-संतों, शिष्यों ने प्रसाद ग्रहण किया।

आश्रम के महंत राजकुमारदास महाराज ने बताया कि विगत वर्षों की भांति इस वर्ष भी अन्नकूट महोत्सव आश्रम में धूमधाम के साथ मनाया गया है। उन्होंने बताया कि दीपावली के दूसरे दिन गोवर्धन पूजा का प्रचलन है। इस दिन को अन्नकूट महोत्सव भी कहते हैं। पुराणों के अनुसार द्वापर युग में सबसे पहले भगवान श्री कृष्ण के कहने पर ही गोवर्धन पर्वत की पूजा की गई थी। इस परंपरा के पीछे प्रकृति पूजा का संदेश छुपा है। इस दिन घर के मुख्य द्वार पर गाय के गोबर से गोवर्धन की आकृति बनाकर भगवान श्रीकृष्ण की पूजा की जाती है। बताया गया है कि गाय के गोबर में भी

छप्पन भोग लगाते महंत।

लक्ष्मी का निवास होता है। इसलिए सुख और समृद्धि के लिए भी गोवर्धन पूजा करने की परंपरा है। इस दिन गायों की सेवा का महत्व है। बताया कि अन्नकूट मे नए अनाज का भोग लगता है। इस दिन भगवान के निमित्त छप्पन भोग बनाया जाता है। अन्नकूट महोत्सव मनाने से मनुष्य को लंबी आयु तथा आरोग्य की प्राप्ति होती है। अन्नकूट महोत्सव इसलिए मनाया जाता है, क्योंकि इस दिन नए अनाज की शुरुआत भगवान को भोग लगाकर की जाती है। घर के आंगन पर गोबर से गोवर्धन पर्वत बनाएं। इस पर्वत के बीच में या पास में भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति रखें। गोवर्धन पर्वत और श्री कृष्ण की पूजा करें और मिठाइयों का भोग लगाएं। देवराज इंद्र, वरुण, अग्नि और राजा बलि की भी पूजा करें। पूजा के बाद कथा सुनें। ब्राह्मण को भोजन करवाकर दान-दक्षिणा दें। इस अवसर पर सैकड़ों साधु-संत, श्रद्धालु, शिष्य मौजूद रहे।


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