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Sunday, November 8, 2020

गैरतरही नातिया मुशायरे में शायरों ने पेश किये कलाम

बांदा, के एस दुबे । शनिवार की रात शहर के गूलरनाका में मंसूरी इमामबाड़े में मुहिब्बाने रसूल कमेटी की ओर से एक गैरतरही नातिया मुशायरे का आयोजन किया गया। जिसमें मुकामी व बैरूनी शायरों ने शिरकत की और देर रात तक शायरों ने अपने अपने कलाम प्रस्तुत किये। मुशायरे में कोरोना काल का भी ध्यान रखा गया। मुशायरे की सदारत जनबा आजम रब्बानी साहब ने की और निजामत मौलाना इमरान रजा गदीरी ने की। मुशायरे में शायरों के अलावा शहर के तमाम गणमान्य सामईन ने हिस्सा लिया।

मुशायरे में कलाम पेश करते शायर

मुशायरे में हसन बांदवी ने फरमाया कि इश्के सादिक के बिना बात नही हो सकती, लफ्ज गूंगे हो तो फिर बात नही हो सकती। मास्टर मुस्तहसन इलाहाबादी अक्सर नवी के पांव में आ जाता था वरम, इतनी शबाब पर थी इबादत रसूल की। आसिफ दतियावी ने फरमाया खुदा का जिक्र करें, जिक्रे मुस्तफा न करें, हमारे मुंह में हो ऐसी जुबां खुदा न करें। इक्तेदार मुस्तफाबादी कौशाम्बी ने फरमाया ये जमीं क्या है शबे मेराज शाहे दो जहां, अर्शे आजम भी तहे पाए पयम्बर हो गया। ताजुद्दीन मौदहवी ने फरमाया क्या असर किरदार की ठोकर में था सरकार की, इन्कलाबे वक्त भी करवट बदलकर रह गया। इसके अलावा डा. खालिद इजहार बांदवी, आजम रब्बानी, रऊफ महोबवी, हकीम वशीर तालिब बांदवी, सलीम इटावी, अब्दुल हमीद एडवोकेट व अनवर बांदवी आदि ने अपने अपने कलाम प्रस्तुत कर लोगों की जमकर तालियां बटोरी। अंत में अराकीने कमेटी द्वारा आये हुये सभी शायरों व सामयीनों का आभार जताया गया।


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