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Sunday, November 8, 2020

आप बदले या ना बदले समय सब बदल देता ..............

देवेश प्रताप सिंह राठौर...   

(वरिष्ठ पत्रकार)

............ आज के हालातों को देखते हुए और पुराने  हालातों को सोचते हुए  जब हम तुलना करते हैं। उस समय हमें सच्चाई का पता चलता है। आप अपने को बदले या ना बदले स्थित  परिस्थितियों को देखकर पर समय आप को बदल देता है। जब हम दूसरों को बदलने की बातें करते हैं परन्तु स्वयं को बदलने के विषय में नहीं सोचते हैंसमय का पहिया निरंतर घूमता रहता है. दिन के बाद रात और रात के बाद दिन आता है. प्रकृति के चक्र में मौसम आते हैं और जाते हैं. कभी गर्मी ,कभी सर्दी ,कभी वर्षा,  कभी बसंत तो कभी पतझड़. कुछ भी तो नहीं रूकता. सब कुछ निरंतर चलता रहता है और बदलता रहता है. समय कभी किसी की प्रतीक्षा नहीं करता. कब समय ने हमारे दरवाज़े पर दस्तक दी और वह कब आगे बढ़ गया - इसका तो पता ही नहीं चलता. समय सदा संकेत देता है. यह हम पर निर्भर करता है कि हम चौकस रह कर समय के संकेत को समझते हैं  और अपने आप को समय की मांग के अनुरूप ढालते हैं. जो व्यक्ति समय के अनुसार अपने आप को ढाल लेता है वह आगे बढ़ जाता है और जो समय


की नज़ाकत को नहीं समझता वह पिछड़ जाता है. समय के अनुसार हम अपने आप में परिवर्तन लायें और यदि हम ऐसा नहीं करते हैं तो समय हमें बदल देगा. प्रश्न यह है कि यदि हम अपने आप को बदलना चाहते हैं तो इसके लिए हमें क्या करना होगा ? समय के साथ-साथ हमें निम्न लिखित पर विचार करके अपने आप को परिवर्तित करना होगा.सभी प्राणी कर्म करते हैं क्योंकि यह एक स्वाभाविक प्रवृति है. कोई भी व्यक्ति ख़ाली नहीं बैठ सकता. कोई न कोई कर्म तो उसने करना ही है. यदि हम अच्छे कर्म करते हैं तो उसका फल भी अच्छा ही होगा. यदि हम बुरे कर्म करेंगे तो उनका फल भी बुरा होगा. यह ठीक ही कहा गया है: “जैसा बोओगे, वैसा ही काटोगे.” हम जीवन में ऐसे कर्म न करें जो वर्जित हों क्योंकि उनका हमारे ऊपर ही नहीं बल्कि समाज पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है. हमारे कर्म अनुकरणीय होने चाहियें जिससे समाज का कल्याण हो. निश्चय ही हमारे कर्मों से समाज में परिवर्तन होगा. महान व्यक्तियों ने महान कार्य किये और आज हम उनका अनुसरण करते हैं. अतः हम भी दूसरों के लिए एक "आदर्श” बनें.हम जब भी कोई कार्य करते हैं तो हमारे सामने लक्ष्य होता है. उस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए हम कर्म करते हैं परन्तु हमारी दृष्टि कर्म के फल पर होती है. यह ठीक है कि बिना फल के तो कोई भी व्यक्ति कार्य नहीं करता परन्तु जब हमारा पूरा ध्यान ही फल पर रहता है तो हम स्थिरता से कार्य नहीं कर पाते. हमारा ध्यान कर्म पर केन्द्रित न होकर फल पर केन्द्रित होता है. ऐसी स्थिति में हमें वांछित परिणाम प्राप्त नहीं होता.  इसलिए हम अपना ध्यान कर्म और केवल कर्म पर ही केन्द्रित करें. समय बड़ी तेज़ी से आगे बढ़ता है. बीता हुआ एक पल भी कभी वापिस नहीं आता. थोड़ी सी  सुस्ती अथवा लापरवाही हमें जीवन की मुख्य धारा से मोड़ देती है और तब हम हाथ मलते रह जाते हैं. जीवन में सभी को आगे बढ़ने का, उन्नति करने का अवसर अवश्य मिलता है. वे कुछ पल ही होते हैं जिनका हम उसी समय सदुपयोग  करलें तो जीवन ही परिवर्तित हो जाता है अन्यथा यह उक्ति हम पर चरितार्थ होती है : " अब पछताए होत क्या जब चिडियां चुग गई खेत.”कर्म तो सभी करते हैं और सफलता की इच्छा भी उसी के साथ संबद्ध होती है परन्तु क्या कर्म करने मात्र से ही सफलता प्राप्त होती है? यह तो नहीं कह सकते कि कर्म करने से सफलता नहीं मिलती परन्तु यह निश्चित है कि कर्तव्यनिष्ठ कर्म से सफलता प्राप्त होने के साथ-साथ स्वयं में भी परिवर्तन आता है और उसका प्रभाव समाज पर भी पड़ता है.विभिन्न व्यक्तियों के विभिन्न कर्तव्य हैं. छात्र का कर्तव्य है ध्यानपूर्वक अध्ययन करके जीवन के लक्ष्य को प्राप्त करना. एक अध्यापक का कर्तव्य है शिक्षा का प्रसार करना  परन्तु उसके साथ ही उसे ऐसी शिक्षा देना जिससे विद्यार्थियों को जीवन की दिशा मिल सके. इससे समाज में निश्चित रूप से परिवर्तन आयेगा. इसी प्रकार प्रत्येक व्यक्ति अपने–अपने क्षेत्र में अपने कर्तव्य को निष्ठापूर्वक, ईमानदारी और लगन से निभाये सबसे बड़ी बात यह है कि हम अपने को वचनों को पूर्ण रूप से निभा पा रहे हैं कि नहीं सबसेे बड़ी जिम्मेदारी हमारी यही बनतीी है हम अपने बाहुबल से आतंक से धनवल से समय को आगे आनेेेेेे वाले समय भूल जाए पर एक समय यह ऐसा है वह आपको कभी नहीं भूलता। इसलिए कभी भी इंसान को घमंड नहीं करना चाहिए इसीलिए इतिहास के पन्नों पर आपने देखा होगा जिस अहंकार घमंड से लोगों ने जीना सीखा है उसका अंत किस प्रकार हुआ है।

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