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Sunday, November 8, 2020

पराली: किसानों पर कार्रवाई 2022 के चुनाव में बिगाड़ सकती गणित

वाह री पुलिस खेतों में आग सेकने वाले अन्नदाता को भी बना दिया अभियुक्त

सीएम के फरमान के बाद भी किसानों का शोषण जारी, अन्नदाताओं में बढ़ रही नाराजगी 

फतेहपुर, शमशाद खान । कृषि प्रधान देश भारत में खेती किसानी के कार्यों से सत्तर प्रतिशत आबादी जुड़ी हुई है। कोरोना काल में देश जब मंदी के दौर से गुजर रहा था तो देश में किसानों की बदौलत अर्थव्यवस्था को काफी राहत मिली थी, लेकिन अन्नदाता बताये जाने वाले उसी किसान का अब पराली जलाने के नाम पर शोषण किया जा रहा है। खेतों में धान की फसल के बाद बचे अवशेष रूपी पराली को जलाने के नाम पर किसानों पर एफआईआर दर्ज कराने के साथ ही जेल भेजने एवं दस हजार रुपये जुर्माना लगाये जाने की कार्रवाई की जा रही है। पराली जलाने के नाम पर किसानों पर की जा रही कार्रवाई से किसानों में आक्रोश व्याप्त हो रहा है। देश में निवास करने वाली लगभग सत्तर प्रतिशत से अधिक आबादी खेती किसानी से कहीं न कहीं जुड़ी है। ऐसे में किसानों पर की जा रही कार्रवाई से किसानों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। ग्रामीण क्षेत्र में निवास करने वाले लोगों की माने तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा किसानों का किसी तरह का शोषण न करने के फरमान जारी किए गये थे लेकिन जनपद में सीएम के आदेश का घोर उल्लंघन किया जा रहा है। रातों की ठंड में खेतों में पानी लगाने के समय खेत मे आग जलाने वाले किसानों को भी पराली जलाने वाला बताकर प्रशासन किसानों के विरुद्ध कार्रवाई कर रहा है। वहीं लोगों का तो यहां तक कहना है कि किसानों में इस तरह की कार्रवाई किये जाने से नाराजगी बढ़ती जा रही है। जो कि विधानसभा चुनाव में सत्ताधारी दल की गणित बिगाड़ सकती है। पराली जलाने के नाम पर किसानो पर की जा

खेत में जलती पराली।

रही कार्रवाई का राजनैतिक दलों के साथ ही सत्ताधारी दल के नेता भी खुलकर न सही दबी जुबान में विरोध कर रहे है और पराली जलाने वाले किसानों को जेल भेजे जाने व दस दस हजार की भारी भरकम धनराशि वसूले जाने को दुर्भाग्यपूर्ण बता रहे है। पराली जलाने के मामले में कार्रवाई का अधिकार मिलने के बाद से पुलिस द्वारा वसूली की बात भी कही जा रही है। वहीं ग्रामीणों की माने तो ठंड के मौसम में किसान रातों को खेतों में आलू समेत अन्य फसलों में पानी लगाता है इसमें ठंड से बचने के लिये अलाव का सहारा लेता है। यह कार्य हमेशा से किये जाते रहे हैं लेकिन अब मात्र अलाव जलाने पर ही कार्रवाई की जा रही है जो कि गलत है। उन्होंने कहा कि अलाव में हल्के धुंए से कहीं ज्यादा फैक्ट्रियों, ईंट भट्ठों, कोयले की भट्ठी, कारखानों, जनरेटर से निकलने वाला काला धुंआ एवं वाहनों से प्रदूषण होता है और यह सब खुलेआम होता है। सरकार इस पर अंकुश लगानें में तो नकाम है लेकिन किसानों पर कार्रवाई कर रही है। ग्रामीणों के आरोपों पर यदि नजर डालें तो अब तक प्रशासन पराली जलाने वाले सैकड़ों किसानों पर कार्रवाई कर चुका है। बड़ी संख्या में किसानों पर जुर्माना लगाए जाने के साथ ही उन्हें जेल भी भेजा जा चुका है। ऐसे में आगामी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस, सपा, बसपा, राष्ट्रीय लोकदल जैसे राजनैतिक दल इसे बड़ा मुद्दा बनाकर सरकार के लिये मुसीबत खड़ी कर सकते है। वहीं प्रदूषण रोकने के लिये सरकार पर भारी दबाव भी है। हालात ऐसे होते जा रहे है कि ग्रामीण क्षेत्र की जिस जनता की बदौलत सत्ता शिखर पर भाजपा पहुँची है अब उन्हीं किसान रूपी अपने वोटरों के विरुद्ध कार्रवाई करके उनके लिये विरोधी होती जा रही है। किसानों के विरुद्ध कार्रवाई से बढ़ते असंतोष से सत्ताधारी दलों के स्थानीय नेताओं में बेचैनी बढ़ती का रही है। पंचायत चुनाव नजदीक देखकर उनमें बेचैनी भी बढ़ गयी है। क्षेत्रीय नेताओं द्वारा इसे शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचाया भी जा रहा है। ऐसे में यदि समय रहते डैमेज कंटोल नही किया जाता तो पंचायत चुनाव के साथ विधानसभा चुनाव में किसानो के विरुद्ध कार्रवाई सत्ताधारी दलों के लिये एक बड़ी मुसीबत बनने वाली है, जबकि विपक्षी दलों को चुनाव जींतने के लिये संजीवनी बूटी जैसी साबित हो सकती है।

दीन दयाल समिति के प्रदेश सचिव ने किसानों का जाना हाल

फतेहपुर। दीन दयाल सेवा समिति के प्रदेश सचिव धर्मेंद्र सिंह जनसेवक द्वारा पराली जलाने के नाम पर जेल भेजे गये किसानों से मिलकर उनकी जमानत कराने में मदद की। धर्मेंद्र सिंह का कहना रहा कि प्रदेश सरकार द्वारा किसानों का शोषण रोकने की बात कही गयी थी लेकिन प्रशासन किसानों का दमन कर रहा है। खेतो में आग सेकने वाले किसानों को भी जेल भेजा जा रहा है जबकि गरीब किसानों पर दस हजार रुपये की भारी भरकम जुर्माना लगाया जाना बेहद गलत व अन्याय है। किसान जुर्माना अदा करने के लिये खेतांे को गिरवी रखने पर मजबूर हो जायेगा। उन्होंने सीएम से दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग किया।


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