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Sunday, October 25, 2020

असत्य पर सत्य की विजय का प्रतीक दशहरा........

देवेश प्रताप सिंह राठौर 

( वरिष्ठ पत्रकार )

..............दशहरा या विजयदशमी का त्योहार बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। असत्य पर सत्य की विजय का प्रतीक दशहरा आज हमारेे मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम जी ने रावणजैसा राक्षस पापी का अंत किया था।यह त्योहार भारतीय संस्कृति के वीरता का पूजक, शौर्य का उपासक है। आश्विन शुक्ल दशमी को मनाया जाने वाला दशहरा यानी आयुध-पूजा हिन्दुओं का एक प्रमुख त्योहार है। व्यक्ति और समाज के रक्त में वीरता प्रकट हो इसलिए दशहरे का उत्सव रखा गया है। भगवान राम ने इसी दिन रावण का वध किया था। इसे असत्य पर सत्य की विजय के रूप में मनाया जाता है। इसीलिए इस दशमी को विजयादशमी के नाम से जाना जाता है। दशहरा वर्ष की तीन अत्यंत शुभ तिथियों में से एक है, अन्य दो हैं चैत्र शुक्ल की एवं कार्तिक शुक्ल की प्रतिपदा। इसी दिन लोग नया कार्य प्रारंभ करते हैं, इस दिन शस्त्र-पूजा, वाहन पूजा की जाती है।प्राचीन काल में राजा लोग इस दिन विजय की प्रार्थना कर रण यात्रा के लिए प्रस्थान करते थे। दशहरा का पर्व दस प्रकार के पापों- काम, क्रोध, लोभ, मोह मद, मत्सर, अहंकार,


आलस्य, हिंसा और चोरी जैसे अवगुणों को छोड़ने की प्रेरणा हमें देता है।  दशहरा या दसेरा शब्द 'दश'(दस) एवं 'अहन्‌‌' से बना है। दशहरा उत्सव की उत्पत्ति के विषय में कई कल्पनाएं की गई हैं। कुछ लोगों का मत है कि यह कृषि का उत्सव है। दशहरे का सांस्कृतिक पहलू भी है। भारत कृषि प्रधान देश है। जब किसान अपने खेत में सुनहरी फसल उगाकर अनाज रूपी संपत्ति घर लाता है तो उसके उल्लास और उमंग का ठिकाना हमें नहीं रहता। इस प्रसन्नता के अवसर पर वह भगवान की कृपा को मानता है और उसे प्रकट करने के लिए वह उसका पूजन करता है। तो कुछ लोगों के मत के अनुसार यह रण यात्रा का द्योतक है, क्योंकि दशहरा के समय वर्षा समाप्त हो जाते हैं, नदियों की बाढ़ थम जाती है, धान आदि सहेज कर में रखे जाने वाले हो जाते हैं।इस उत्सव का संबंध नवरात्रि से भी है क्योंकि नवरात्रि के उपरांत ही यह उत्सव होता है और इसमें महिषासुर के विरोध में देवी के साहसपूर्ण कार्यों का भी उल्लेख मिलता है। दशहरा या विजया दशमी नवरात्रि के बाद दसवें दिन मनाया जाता है। इस दिन राम ने रावण का वध किया था। रावण भगवान राम की पत्नी देवी सीता का अपहरण कर लंका ले गया था। भगवान राम युद्ध की देवी मां दुर्गा के भक्त थे, उन्होंने युद्ध के दौरान पहले नौ दिनों तक मां दुर्गा की पूजा की और दसवें दिन दुष्ट रावण का वध किया। इसलिए विजयादशमी एक बहुत ही महत्वपूर्ण दिन है। राम की विजय के प्रतीक स्वरूप इस पर्व को 'विजयादशमी' कहा जाता है। दशहरा पर्व को मनाने के लिए जगह-जगह बड़े मेलों का आयोजन किया जाता है। यहां लोग अपने परिवार, दोस्तों के साथ आते हैं और खुले आसमान के नीचे मेले का पूरा आनंद लेते हैं। मेले में तरह-तरह की वस्तुएं, चूड़ियों से लेकर खिलौने और कपड़े बेचे जाते हैं। इसके साथ ही मेले में व्यंजनों की भी भरमार रहती है। इस समय रामलीला का भी आयोजन होता है। रावण का विशाल पुतला बनाकर उसे जलाया जाता है। दशहरा अथवा विजयदशमी भगवान राम की विजय के रूप में मनाया जाए अथवा दुर्गा पूजा के रूप में, दोनों ही रूपों में यह शक्ति-पूजा, शस्त्र पूजन, हर्ष, उल्लास तथा विजय का पर्व है। रामलीला में जगह-जगह रावण वध का प्रदर्शन होता है। शक्ति की उपासना का पर्व शारदेय नवरात्रि प्रतिपदा से नवमी तक निश्चित नौ तिथि, नौ नक्षत्र, नौ शक्तियों की नवधा भक्ति के साथ सनातन काल से मनाया जा रहा है। इस मौके पर लोग नवरात्रि के नौ दिन जगदंबा के अलग-अलग रूपों की उपासना करके शक्तिशाली बने रहने की कामना करते हैं। भारतीय संस्कृति सदा से ही वीरता व शौर्य की समर्थक रही है। दशहरे का उत्सव भी शक्ति के प्रतीक के रूप में मनाया जाने वाला उत्सव है। 

  इस दिन क्षत्रियों के यहां शस्त्र की पूजा होती है। इस दिन रावण, उसके भाई कुंभकर्ण और पुत्र मेघनाद के पुतले जलाए जाते हैं। कलाकार राम, सीता और लक्ष्मण के रूप धारण करते हैं और आग के तीर से इन पुतलों को मारते हैं जो पटाखों से भरे होते हैं। पुतले में आग लगते ही वह धू-धू कर जलने लगता है और इनमें लगे पटाखे फटने लगते हैं और उससे उसका अंत हो जाता है। यह त्योहार बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है। लेकिन आज भारत देश में रावण के स्वरूप में बहुत से लोग मौजूद हैं जो इस देश को कमजोर करने के लिए रावण जैसे अनैतिक की नीति पर चल रहे हैं। आज मर्यादा पुरुषोत्तम श्री रामचंद्र जी ने उस पाप का अंत किया निष्पाप ने रावण जैसे स्वरूप को अंत किया है। आप देखते रहे और हम भी देखते हैं रावण तो मर्यादा पुरुषोत्तम श्री रामचंद्र जी ने मार दिया लेकिन आज हर गली मोहल्ले शहर राज्य भारत और विश्व में बहुत से रावण है जिससे आज भारत रावण से  घिरा है। परंतु जिस देश में मर्यादा पुरुषोत्तम श्री रामचंद्र जी ने जन्म लिया हो उस देश का कोई भी बाल बांका नहीं कर सकता इसलिए हमारे मर्यादा पुरुषोत्तम श्री रामचंद्र जी का भव्य मंदिर उनकी जन्मस्थली अयोध्या में सैकड़ों वर्षो बाद बनने की नींव रखी डर गई है। हमें गर्व है कि हम उस देश के वासी हैं जिस देश में मर्यादा पुरुषोत्तम श्री रामचंद्र जी ने जिस देश में श्री कृष्ण जी ने भगवान बुद्ध  ने और बहुत से महापुरुषों ने जन्म लिया हम उस देश के वासी हैं। आज हमारे देश के रक्षा मंत्री माननीय राजनाथ सिंह जी ने सिक्कम में जाकर अस्त्र पूजा करेंगे भारतीय सेना के साथ यह बड़ा गर्व की बात है शस्त्र की पूजा होगी और देश के रक्षा मंत्री माननीय राजनाथ सिंह के द्वारा उस रावण रूपी राक्षस का अंत होगा जो हमारी सीमा रेखा के अंदर घुसने  का प्रयास कर रहे हैं परंतु उनका यह प्रयास मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम के भक्त देश के 130 करोड़ के लोग इस रामायण रूपी पड़ोसी देशों का अंत करेंगे। दशहरा पर असत्य पर सत्य की विजय का प्रतीक है। आज दशहरा का पर्व कोरोना वायरस के कारण लोग उतना धूमधाम से नहीं मन आप पाएंगे क्यों की कोरोना के नियम का पालन करते हुए अधिक संख्या में लोग एकत्रित होकर सोशल डिस्टेंस बनाकर दशहरे का पर्व का आनंद लें। क्योंकि दो गज दूरी मास्क है जरूरी इसका पालन करते हुए दशहरा का पर्व असत्य पर विजय का प्रतीक का अंत रावण रूपी राक्षस का आज ही के दिन अंत हुआ था। इससे यह अर्थ निकालना मुमकिन है व्यक्ति कितनी भी कठिनाइयां परेशानियां क्यों ना हो जाए विचलित नहीं होना चाहिए रावण रूपी  स्वरूप के लोग बहुत है इस दुनिया में जो ईश्वर की मार से बच नहीं सकते, समय लगता है उसी का नाम है सत्य परेशान होता है पराजित नहीं, यह मर्यादा पुरुषोत्तम श्री रामचंद्र जी ने रावण को मार कर यह सिद्ध किया है।

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